शुक्रवार से शुरू हुआ पंचक, श्राद्धपूर्व इस पंचक में अनिष्ट टालने के लिए बरतें ये सावधानियां

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iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करेंज्योतिषशास्त्र में शुभ-अशुभ मुहूर्तों का विचार बहुत गंभीरता से और विस्तृत रूप किया गया है. ज्योतिष में कुछ नक्षत्रों में शुभ कार्य करने वर्जित बताए गए हैं. माना जाता है कि उन नक्षत्रों में किए गए कार्यों के परिणाम प्रतिकूल होते हैं.
धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद एवं रेवती नक्षत्रों को कई शुभ कार्यों के लिए उचित नहीं माना जाता और उन नक्षत्रों में शुभकार्य करने से बचने को कहा जाता है. धनिष्ठा नक्षत्र से शुरू होकर रेवती नक्षत्र के अंत तक समय को ज्योतिष में पंचक कहा जाता है. पंचक में शुभ कार्य वर्जित हैं.
25 सितंबर यानी शुक्रवार की दोपहर से पंचक शुरू हुआ है जो 29 सितंबर, मंगलवार को शाम छह बजे तक रहेगा. यह पंचक श्राद्ध पूर्व का है इसलिए इसका विचार ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है. विभिन्न दिनों में आरंभ होने वाले पंचक को कई ज्योतिषशास्त्री अलग-अलग नाम देते हैं.
विद्वानों के अनुसार पंचक के पांच प्रकार बताए गए हैं. रोग पंचक, राज पंचक, अग्नि पंचक, चोर पंचक और मृत्यु पंचक. इनका विचार पंचक आरंभ होने वाले दिन के आधार पर होता है. आइए विस्तार से जानते हैं इन पंचकों के बारे में.
रोग पंचक
यदि पंचक रविवार को शुरू होता है तो इसे रोगदायी बताया जाता है. इस कारण इसे कुछ विद्वान रोग पंचक भी कहते हैं. इसके प्रभाव से पंचक पांच दिनों में शारीरिक और मानसिक परेशानियों का विशेष रूप से सामना करना पड़ता है. मांगलिक कार्यों के लिए यह पंचक अशुभ माना गया है.
राज पंचक
यदि पंचक सोमवार को शुरू होता है तो उस पंचक को राज पंचक कहा जाता है. आमतौर पर शुभ प्रभावों से दूर कहा जाने वाला पंचक यदि सोमवार को आरंभ होता है तो इसे शुभ माना जाता है. इसके प्रभाव से पंचक पांच दिनों में सरकारी कामों में सफलता की संभावना बढ़ती है. राज पंचक में प्रॉपर्टी कारोबार लाभदायक बताया जाता है.अग्नि पंचक
यदि पंचक मंगलवार को शुरू होता है तो इसे अग्नि पंचक भी कहा जाता है. इन पांच दिनों में कोर्ट कचहरी के कार्यों में सफलता मिलती है. इस पंचक में अग्नि का भय होता है जो अशुभ होता है. इस पंचक में निर्माण कार्य, औजार और मशीनरी के कामों की शुरुआत करने में हानि की आशंका रहती है.
चोर पंचक
यदि पंचक का आरंभ शुक्रवार को होता है तो उस पंचक को चोर पंचक के नाम से भी जाना जाता है. विद्वान इस पंचक में यात्रा नहीं करने का सुझाव देते हैं. इस पंचक में लेन-देन, व्यापार और किसी भी तरह के सौदे भी नहीं करने चाहिए इसमें हानि की आशंका रहती है.
मृत्यु पंचक
शनिवार को शुरू होने वाला पंचक मृत्यु पंचक भी कहलाता है. शनिवार से शुरू होने वाला पंचक मृत्यु के समान परेशानियों का कारण हो सकता है. इन पांच दिनों में ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए जिसमें किसी भी तरह का कोई जोखिम हो. इसके प्रभाव से विवाद, चोट, दुर्घटना आदि होने का खतरा रहता है.
इसके अलावा बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक में ऊपर दी गई बातों का पालन करना जरूरी नहीं माना गया है। इन दो दिनों में शुरू होने वाले दिनों में पंचक के पांच कामों के अलावा किसी भी तरह के शुभ काम किए जा सकते हैं।
पंचक में न करें पांच कार्यः पढ़ें अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.
पंचक में न करें पांच कार्यः
1. पंचक में चारपाई न बनवाएं. ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.
2. पंचक के दौरान जब घनिष्ठा नक्षत्र हो तब जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी न करें अग्निकांड हो सकता है.
3. पंचक के दौरान दक्षिण में यात्रा नही करें. दक्षिण यम की दिशा है. इससे अनिष्ट की आशंका बढ़ती है.
4. पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र हो तो घर की छत न डलवाएं. उस घर में धन नहीं टिकता और गृहक्लेश बहुत होता है.
5. पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले गरूड़ पुराण में कई तरह की सावधानियां कही गई हैं. शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश से बनाकर पहले अर्थी पर रखना चाहिए. इन पांचों सांकेतिक शवों का भी पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार करना चाहिए, तो पंचक दोष समाप्त हो जाता है.कुछ शुभ कार्य जो पंचक में कर सकते हैं-
पंचक में पड़े उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है. धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्रों को यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि कार्यों के लिए उत्तम माना गया है. इस दौरान सगाई, विवाह जैसे शुभ कार्य भी वंचित नहीं हैं.
पंचक में आने वाले तीन नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद व रेवती यदि रविवार को होते हैं तो इससे चर, स्थिर व प्रवर्ध जैसे शुभ योग बनते हैं. जो सफलतादायी व धनदायी हैं.
पंचक परिहारः
पंचक के दौरान प्रतिदिन पांच घटी (दो घंटे) विशेष सावधानी के होते हैं. उस समय का ध्यान कर लें तो इसकी अशुभता का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है. आइए जानते हैं किस नक्षत्र में किस समय विशेष सावधानी के होते हैं-
धनिष्ठा नक्षत्रः शुरू के पांच घटी यानी नक्षत्र आरंभ के शुरूआती दो घंटे में रखें सावधानी
शतमिषा नक्षत्रः मध्य की पांच घटी.
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रः शुरू की पांच घटी यानी दो घंटे
उत्तरा भाद्रपदः अंत की पांच घटी यानी दो घंटे
रेवती नक्षत्रः इस नक्षत्र में पूरे दिन सावधानी रखने की बात ज्योतिषशास्त्र में कही गई है.भाद्रपद के पंचक का विचारः
शुक्रवार रात 12.30 बजे से शतमिषा नक्षत्र शुरू हुआ जो शऩिवार रात 11 बजे तक चलेगा. यानी मध्य के पांच घटी सुबह करीब 5.45 से 7.45 तक हुए जिसमें विशेष सावधानी की आवश्यकता है.
शनिवार(26-09-15) रात्रि 11 बजे से पूर्वाभाद्रपद आरंभ होगा जो रविवार की रात 09.25 तक जारी रहेगा. पूर्वाभाद्रपद के आरंभ के पांच घटी यानी रात्रि 11 बजे से एक बजे तक विशेष सावधानी के हैं.
रविवार(27-09-15) रात्रि 09.25 से सोमवार सायं 07.40 तक उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र है. उत्तरा भाद्रपद में अंत के पांच घटी विशेष विचारणीय हैं. यानी सोमवार सांय 5.40 से 7.40 तक विशेष ध्यान रखें.
सोमवार(28-09-15) सायं 7.40 से मंगलवार (29-09-15) करीब सायं 06 बजे तक रेवती नक्षत्र रहेगा. रेवती में पूरा दिवस सावधानी का होता है.
( यह लेख विभिन्न ज्योतिषीय मतों पर आधारित विश्लेषण है)
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