नौकरी समस्या, तलाक, अपमान, षडयंत्रों के होंगे शिकार यदि सूर्य है अशुभ- संक्रांति के बाद इस रविवार से करें ये उपाय

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जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना whatsapp से मिलने लगेगी।मकर संक्राति से सूर्य उत्तरायण हो गए हैं. इन्हें प्रसन्न करने और इनकी बाधा से बचने के उपाय करने का यह सही समय है. यह रविवार उत्तरायण के बाद का पहला रविवार है इसलिए आपको आज मैं कुछ टिप्स दे रहा हूं.
सबसे पहले तो यह जानते हैं कि सूर्य को प्रसन्न करके रखना क्यों आवश्यक है. सूर्य प्रसन्न हैं तो क्या मिल सकता है और अगर अप्रसन्न हो गए तो क्या गंवा सकते हैं.
सूर्य ग्रहमंडल के अधिपति है. हमारे कुंडली में सूर्य की स्थिति से बहुत सी ऐसी चीजों का निर्धारण होता है जिनकी बाधा से जीवन नर्क समान हो जाता है.
यदि कुंडली में सूर्य की स्थिति ऐसी है कि आपको उसके शुभफल नहीं मिल रहे तो आपको यश, मान प्रतिष्ठा, मानसिक शांति, वैवाहिक सुख, नौकरी की समस्या, धन की किल्लत, घर-परिवार से लेकर ऑफिस आदि में षडयंत्र का शिकार होना पड़ता है.
पति-पत्नी छोटी-छोटी बात पर झगडेंगे और तलाक तक की तैयारी करने लगेंगे, गर्भधारण में समस्या होगी और गर्भपात हो सकता है. सामाजिक तौर पर कहीं बड़ी बदनामी हो सकती है.
चोट आदि लगना आम बात हो जाती है जिसके कारण आप पीड़ित रहेंगे. नौकरी के लिए बात बनते-बनते बिगड़ जाएगी और व्यापार में लाभ हमेशा अपेक्षा से कम होगा.
यदि सूर्य शुभ फल प्रदान करें तो सामाजिक मान-प्रतिष्ठा में आप शिखर पर होंगे. शीर्ष राजनेता वही बनते हैं जिनका सूर्य बलशाली हो, शुभ प्रभाव दे रहा हो. नौकरशाही में वही जाते हैं जिनका सूर्य उच्च हो.
इसलिए ज्योतिषशास्त्र में सूर्य की दशा के विचार पर बहुत जोर दिया गया है. सूर्य शौर्य और ऊर्जा के प्रतीक हैं. यह आपमें उग्रता भी देते हैं. सूर्य की शुभता से प्राप्त शक्तियों को संभालकर भी रखना आवश्यक हो जाता है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.सूर्य कब आपको पीडित करते हैं. यदि आप नीचे बताए कारणों से दुखी हैं तो बहुत संभव है कि सूर्य के प्रभाव के कारण ही यह हो रहा हो.
-प्रथम भाव से सूर्य अशुभ हो तो शारीरिक कष्ट होगा, दांपत्य जीवन तनाव से भरा रहेगा, एक स्थान पर कहीं टिके नहीं रहेंगे. माइग्रेन की परेशानी और त्वचा के रोग आदि की समस्या रहती है.
-सूर्य यदि द्वितीय भाव में हो तो आंखों की परेशानी होती है. पारिवारिक कलह होता है.
-सूर्य यदि चतुर्थ भाव में हो तो हृदय रोग, मातृसुख की कमी, आपको जल्दी-जल्दी चोट लगने की आशंका रहती है. हड्डियों में परेशानी रहती है.
-पंचम भाव में सूर्य अशुभ हो तो संतान और विद्या बुद्धि में कमी आती है. बार-बार गर्भपात की बाधा हो सकती है. आपकी पढ़ाई में बाधा आएगी और परिश्रम के अनुकूल सफलता नहीं मिलेगी.
-सातवें भाव में सूर्य अशुभ हो तो दांपत्य जीवन कष्टमय रहता है. छोटी-छोटी बातों पर तनाव होगा. पति-पत्नी में अचानक झगड़े होते रहेंगे और बात तलाक तक पहुंच सकती है.
-नवम भाव में सूर्य अशुभ हो तो भाग्य में कमी आती है. भाग्य का साथ नहीं मिलता.
-दशम भाव में अशुभ हो तो पिता के साथ विवाद होता है. नौकरी मिलने में समस्याएं आएंगी.
-एकादश भाव में अशुभ हो तो लाभ में कमी आएगी. कामकाज अच्छा नहीं चलेगा.
-द्वादश भाव में कमी है तो आंखों का कष्ट होता है. फिजूलखर्ची की आदत होती है. द्वादश पति-पत्नी के शैय्या सुख का भाव भी होता है. इसकी अशुभता से शैय्या सुख भी बाधित होता है.
सूर्य की बाधा शांत कैसे करें. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.
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मैं आपको आज सूर्य की शांति के सरल उपाय बता रहा हूं. अगर आप ऊपर बताई बाधाओं से पीड़ित हैं तो ये उपाय कर लेने चाहिए. सूर्य के उत्तरायण होने के बाद किसी भी शुक्लपक्ष से इन्हें शुरू किया जा सकता है.
मकर संक्रांति को सूर्य उत्तरायण हो गए हैं. इसलिए यह रविवार इसके लिए शुभ समय है.
सूर्य को प्रतिदिन जल में लाल रोली या लाल चंदन मिलाकर अर्घ्य दें. अर्घ्य या जल देते समय आपको निम्न मंत्र का जप करना हैः
“एही सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पत्ये अनुकम्प्य माँ भक्तया गृहणार्ध्ये दिवाकरम्”
यदि इस मंत्र का उच्चारण नहीं कर पाचे तो ऊं घृणि सूर्याय नमः का उच्चारण करते हुए नित्य सूर्य को अर्ध्य दें.
बाल्मिकी रामायण में वर्णित आदित्य हृदय स्तोत्र के 31 श्लोकों का विनियोग के साथ रोज पाठ करें. जो लोग समय के अभाव के कारण प्रतिदिन नहीं कर पाते उन्हें रविवार को आदित्य हृद्य स्तोत्र का पाठ जरूर करना चाहिए. जिनके पास समय हो वह नित्य करें.
इन मंत्रों से करें सूर्य की शांति. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.
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सूर्य को शांत करने के लिए उनके बीच मंत्र अथवा तंत्र-मंत्र की एक निश्चित संख्या में जप एवं हवन के लिए शास्त्रों में कहा गया है.
“ऊं घृणि सूर्याय नमः” सूर्य का तंत्र-मंत्र है.
“ऊं ह्रीं ह्रौं सूर्याय नमः” सूर्य का बीज मंत्र है.
दोनों में से किसी मंत्र का जप एवं हवन करा लेना चाहिए. सूर्य के मंत्र की सात हजार की संख्या में जप का विधान है किंतु कलियुग में चतुर्गुणित यानी चौगुना जप करना होता है.
इसलिए किसी भी सूर्य मंत्र का 28,000 की संख्या में जप करने के बाद सूर्य की समिधा जिसमें मदार की लकड़ी जरूर हो, उससे हवन जरूर करना चाहिए.
यह जप एवं हवन किसी रविवार, संक्रांति या सप्तमी तिथि को प्रारंभ करना चाहिए. यह आप स्वयं भी कर सकते हैं या किसी वेदपाठी ब्राह्मण द्वारा संकल्प लेकर करा सकते हैं.
सूर्य शांति के ज्योतिषीय प्रयोग. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.
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किसी विद्वान ज्योतिषी के परामर्श से शुद्ध साढ़े सात रत्ती माणिक्य सोने में बनवाकर अनामिका उंगली में रविवार को धारण करना चाहिए. रत्न पूर्ण और शुद्ध होना चाहिए.
अंगूठी धारण करने की विधिः
रविवार को सुबह साढ़े दस बजे से पहले गंगाजल से स्नान कराकर, माणिक्य को लालचंदन, लाल पुष्ण से पूजा करके धूप-दीप दिखाएं फिर ऊं घृणि सूर्याय नमः की एक माला से जप करके उसमें प्राण प्रतिष्ठा कर लें उसके बाद धारण कर लें. ऐसा करने से सूर्य की अशुभता से बचा जा सकता है और सभी ऐश्वर्य प्राप्त होता है.
रविवार के दिन संकल्प लेकर सूर्य के निमित्त दान करें.
ऐसा करने से मान-सम्मान पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है.
कुंडली में सूर्य-बुध की शुभयुति अगर बन जाए तो वह व्यक्ति जिस क्षेत्र में हाथ लगाए वहां लाभ पाता है. शीर्ष के राजनेता और अधिकारियों में यह संयोग अवश्य होता है.
इस रविवार से कर सकते हैं ये उपाय. सरल हैं और लाभदायक भी. इसे आजमाने में क्या हर्ज है.
प्रस्तुतकर्ताः
डॉ. नीरज त्रिवेदी,
सहायक प्रोफेसर, ज्योतिष, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान
ज्योतिषाचार्य, पीएचडी (ज्योतिष)
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
संपर्क मेल: niraj.trivedibhu@gmail.com
WhatsApp: 9680745904 (केवल मैसेज, फोन बिलकुल न करें)
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