विवाह में अपशकुन का अंत के लिए मंडप द्वार पर मारते हैं तोरणः तोरण मारने के पीछे की दंतकथा
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प्राचीन समय में किसी गांव में एक दंपत्ति रहते थे. उनकी एक प्यारी सी बिटिया थी. अपनी इकलौती संतान को माता पिता प्यार से आंगन की चिड़िया कहा करते थे. उनके आंगन में एक पेड़ था जिस पर एक चिड़ा (नर चिड़िया) रहता था.
यह दम्पत्ति अपनी बिटिया को हंसी-हंसी में हमेशा कहा करते थे कि बिटिया तू तो हमारे आंगन की चिड़िया है. जब तू बड़ी होगी तो घर के बाहर पेड़ पर जो चिड़ा बैठता है उसके साथ तेरा विवाह कर देंगे.
चिड़ा उनकी ये बातें पेड़ पर बैठा सुनता रहता. उसने इस बात को सच मान लिया. उसने मन ही मन में उस लड़की को अपनी होने वाली पत्नी ही मान लिया और उसके बड़े होने का इंतजार करने लगा.
समय अपनी गति से चलता रहा. बच्ची बड़ी हुई और विवाह के योग्य हुई. माता-पिता को विवाह की चिंता हुई और आखिरकार पिता ने एक सुयोग्य वर देखकर उसका विवाह तय कर दिया.
विवाह की तैयारियां शुरू हो गईं. किसी और के साथ उस लड़की का विवाह होता देखकर उस चिड़े को बड़ा क्रोध आया. अपने मन की बात कहने वह लड़की के पिता के पास गया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.चिड़ा लड़की के पिता से बोला- इतने वर्षों से तो आप अपनी कन्या का विवाह मेरे साथ करने के लिए कहा करते थे. मैंने इतने साल तक इस दिन की प्रतीक्षा की है. अब आप अपनी बात से मुकरकर इसका विवाह किसी और से करा रहे हैं. यह तो गलत है.
चिड़ा को सबने बहुत समझाया कि ऐसा नहीं हो सकता. मानव और पंक्षी का विवाह कैसे हो सकता है. हम तो बस ठिठोली करने के लिए ऐसी बात कह दिया करते थे. विवाह कैसे संभव है?
सबने उसे बहुत समझाया फिर भी चिड़ा माना नहीं. अपनी जिद्द पर ही अड़ा रहा. वह क्रोध से जलने लगा. चिड़ा ने उस लड़की को हासिल करने के लिए दूसरा उपाय सोचा.
तोरण नामका एक राक्षस उस चिड़ा का परम मित्र था. चिड़ा अपने मित्र के पास गया और रो-रोकर अपनी सारी पीड़ा बताई. उसने तरह-तरह से स्वांग रचकर अपने मित्र को सहायता के लिए राजी कर लिया.
तोरण राक्षस ने चिड़ा से कहा- मित्र, तुम चिंता मत करो. मैं उस कन्या का विवाह किसी और के साथ होने ही नहीं दूंगा. जो भी विवाह को आएगा उसको मैं घर में प्रवेश ही नहीं करने दूंगा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.चिड़ा तोरण को साथ लेकर चला. तोरण राक्षस आकर उस कन्या के घर के प्रवेश द्वार पर आकर बैठ गया और वह चिड़ा अपने उस मित्र के सिर पर बैठ गया. दोनों ने तय किया कि वर को प्रवेश ही नहीं करने देंगे.
जब बारात वहां पहुंची तो उस वर से यह कहा गया कि अगर तुम्हें इस कन्या से विवाह करना है तो पहले इस तोरण को मारना होगा तब ही तुम इस घर में प्रवेश कर पाओगे और विवाह संभव होगा.
चिड़ा और तोरण वर से भिड़ गए. उस बहादुर युवक ने उनसे युद्ध किया और अपनी तलवार के वार से द्वार पर बैठे तोरण को मारकर गिरा दिया. उसके बाद घर में प्रवेश करके कन्या से विवाह किया.
कहते हैं तभी से यह प्रथा चली आ रही है. विवाह मंडप में प्रवेश द्वार पर एक चिड़ा बनाया जाता है. मंडप में प्रवेश से पहले वर तोरण पर तलवार से वार करता है. तोरण के सिर पर चिड़ा बैठा होता है तोता नहीं.
कहते हैं इस तरह दंपत्ति पर आने वाले अपशकुन का अंत होता है. विवाह जैसे शुभ कार्य में मारने-काटने जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाता अतः इसे तोरण मारना कहा जाता है.
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