विक्रम-वेताल(किंकर) कथाः स्त्री-पुरुष दोनों के पाप में किसका पाप भारी और क्यों, विक्रमादित्य का निर्णय. अंतिम भाग

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पिछली कथा से आगे…
राजा के कहने पर तोते ने कहा- राजन मेरी यह कथा सुनकर आपको यह विश्वास हो जाएगा कि स्त्री कितनी झूठी, लालची और हत्यारी होती है. तोते ने कहानी सुनानी शुरू की.
सागरदत्त नाम का एक सेठ कंचनपुर नामक नगर में रहता था. उसका कारोबार दूर-दूर तक फैला था और नगर में उसका बड़ा नाम था. उसका श्रीदत्त नाम का एक पुत्र था.
कंचनपुर से बस सवा कोस की दूरी पर एक और नगर था, नाम था श्रीविजयपुर. उस नगर में सोमदत्त नाम के सेठ का बड़ा कारोबार चलता था. सोमदत्त की साख भी दूर-दूर तक थी.
सोमदत्त की एक लड़की थी जयश्री जिसका विवाह श्रीदत्त से हुआ था. ब्याह के बाद श्रीदत्त भी व्यापार करने परदेस चला गया. बारह बरस हो गए फिर भी श्रीदत्त नहीं आया तो जयश्री व्याकुल होने लगी.
एक दिन वह अपने छत पर खड़ी थी कि उसे एक बड़ा सजीला युवक दिखाई दिया. उस युवक ने भी उसे देखा तो वह देखता रह गया. उसने कुछ प्रेमपूर्ण संकेत किए तो जयश्री ने भी प्रेम दर्शाया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.विवाहिता जयश्री देखते ही उस युवक पर मोहित हो गई और इशारे में ही जयश्री ने उसे अपनी सखी के घर का पता बता दिया. जयश्री की सहेली के घर पहुंचा और फिर अपने सहेली की मिली भगत होने के चलते जयश्री उससे रोज मिलने लगी.
रात होते ही वह उस सखी के घर चली जाती और रात-भर वहां रहकर दिन निकलने से पहले ही अपने घर लौट आती. इस तरह बहुत दिन बीत गए. उनका प्रेम परवान चढ़ रहा था कि कुछ दिनों बाद श्रीदत्त परदेस से लौट आया.
जयश्री के घर से निकलने पर बंदिश हो गई. वह बड़ी दु:खी रहने लगी और सोचती कि क्या उपाय करे? श्रीदत्त हारा-थका था. जल्दी ही उसकी आंख लग गई और जयश्री अवसर देख अपने प्रिय से मिलने चल दी.
रात के अंधेरे में जयश्री के रास्ते में एक चोर खड़ा था. वह देखने लगा कि यह सजी धजी युवती इतनी रात को कहाँ जाती है. चोर ने यह जानने के लिए उसका पीछा किया. धीरे-धीरे वह सहेली के मकान पर पहुँची. चोर भी पीछे-पीछे गया.
संयोग खराब थे. वह युवक जब जयश्री की प्रतीक्षा अंधेरे में खड़ा होकर एक स्थान पर कर रहा था. तभी उसको साँप ने काट लिया था. जब जयश्री उसके पास पहुंची तब वह मरा पड़ा था. जयश्री को लगा कि वह स्वांग कर रहा है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.वहीं आंगन में पीपल का एक विशाल पेड़ था जयश्री ने समझा कि वह आँगन में पेड़ के चबूतरे पर सो रहा है. आंगन में खड़े उस विशाल पीपल के पेड़ की डाल पर एक पिशाच बैठा यह सब लीला देख रहा था.
पिशाच ने उस मरे युवक के शरीर में प्रवेश किया और जयश्री जैसे ही युवक को जगाने और चकित कर देने की सोच उसे चुंबन देने झुकी उसने उसकी नाक काट ली.
कुछ ही क्षणों बाद वह प्रेत फिर उस आदमी की देह से निकलकर पेड़ की डाल पर जा बैठा. जयश्री रोती हुई अपनी सहेली के पास चली गई. चिंता बताई कि अब करे तो क्या करे.
सहेली बहुत चतुर थी. उसने कहा कि तुम अपने पति के पास जाओ और इसका दोष उस पर लगा दो. उसने ऐसा ही किया. छुपते छुपाते जैसे आयी थी रात के अंधेरे में वैसे ही लौट गयी.
पति अभी भी थका हारा नींद में था. वह पहले तो उसके सिरहाने सावधानी से बैठ गयी और फिर सब कुछ समझ बूझ कर अचानक जोर-जोर से रोकर कहने लगी कि पति ने बिना कारण उसकी नाक काट दी.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.उसका रोना सुनकर लोग इकट्ठे हो गये. चीख पुकार सुनकर जयश्री का पति जाग उठा. उसे सारा हाल मालूम हुआ तो वह बड़ा दु:खी हुआ. उसने सोचा कि नींद में यह सब कैसे हुआ. उसकी कुछ समझ में नहीं आया.
इधर जयश्री के पिता ने कोतवाल को ख़बर दे दी. कोतवाल उन सब को राजा के पास ले गया. लड़की ने सारा वृतांत बताया तो इतनी सुंदर युवती की यह दयनीय हालत देखकर राजा को बड़ा गुस्सा आया.
उसने आदेश दिया- इस आदमी ने अकारण ही अपनी निरपराध स्त्री को अंगविहीन किया है, इसे अभी सूली पर लटका दो. वह चोर जो जयश्री के पीछे गया था वह अब तक की सारी घटना बहुत अचरज के साथ देखे जा रहा था.
जब उसने देखा कि एक बेक़सूर आदमी को सूली पर लटकाया जा रहा है तो उससे रहा न गया. उसने राजा के सामने जाकर सब हाल सच-सच बता दिया. राजा ने कहा कि तुम्हारी बात पर यकीन कैसे किया जाए.
चोर बोला- महाराज, आपको अगर मेरी बात का विश्वास न हो तो जाकर स्वयं देख लीजिए. उस मरे आदमी के मुँह में इसी स्त्री की नाक है. अभी बहुत समय नहीं बीता था. राजा ने सैनिक भिजवाए तो बात सच निकली. अब तो मामला ही पलट गया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.इतना कहकर तोता बोला- हे महाराज! स्त्रियां ऐसी होती हैं! राजा ने उस स्त्री जयश्री का सिर मुंडवाकर, गधे पर बिठाकर, नगर में घुमवाया और शहर से निकाल किया.
कहानी सुनाकर बेताल बने रुद्रकिंकर ने विक्रम से कहा- राजन, स्त्री और पुरुष दोनों के संबंधों और उसमें खोट की कहानी आपने सुनी. दोनों एक से बढ कर एक हैं. ऐसे में तोते का दावा सही है या मैना का? स्त्री और पुरुष दोनों में ज्यादा पापी कौन है?
राजा विक्रमादित्य ने कहा- स्त्री ही अधिक पापिनी है. बेताल ने पूछा- सो कैसे? राजा ने कहा- पुरुष कितना ही परम दुष्ट क्यों न हो, व्याभिचार में पड़ने पर भी उसमें धर्म का थोड़ा-बहुत विचार रहता ही है. परंतु यदि स्त्री के मन में व्याभिचार आ जाए तो वह सभी सीमाएं लांघ जाती है. इसलिए वह अधिक पापिन है.
(भविष्य पुराण)
संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्
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