परशुराम कथाः व्याध ने राम को कहा मातृहंता पापी, राम ने क्यों किया था अपनी माता का वध, भाग-4

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पिछली कथा में आपने पढ़ा कि राम जब शिवजी को प्रसन्न करने के लिए घोर तप में थे तब एक शिकारी आया और उसने राम को कहा कि उनकी तपस्या व्यर्थ जाएगी. राम पर ब्रह्महत्या का दोष है.
उन्होंने अपनी माता का वध किया है. संसार में उनकी बड़ी निंदा हो रही है. वह उसी पाप के प्रायश्चित के लिए और संसार की निंदा से छिपने के लिए तप का स्वांग कर रहे हैं.
राम को इस बात का आश्चर्य हुआ कि एक व्याध को उनके द्वारा माता के वध की बात कैसे पता है. उन्हें शंका होने लगी कि कहीं व्याध रूप में कोई असुर या उनकी तपस्या भंग करने के लिए किसी का षडयंत्र तो नहीं है.
कथा को आगे बढ़ाने से पहले राम द्वारा माता के वध के प्रसंग की चर्चा भी कर लेते हैं. सत्यवती और ऋचीक के पुत्र महर्षि जमदग्नि का विवाह रेणुका से हुआ. जमदग्नि और रेणुका के पांच पुत्र हुए- रुक्मवान, सुखेण, वसु, विश्वानस और राम.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:mbo]
एक बार की बात है जगदग्नि कोई यज्ञ कर रहे थे. यज्ञ के लिए नदी के पवित्र जल की आवश्यकता हुई. उन्होंने रेणुका को यज्ञ के लिए जल लाने नदी भेजा. रेणुका नदी पर पहुंची और जल भरने लगी.
दैवयोग से गंधर्वराज चित्ररथ अपनी अप्सराओं के संग नदी में जलक्रीड़ा कर रहे थे. रेणुका का ध्यान उस ओर गया तो वह उस जलक्रीडा देखने में मगन हो गईं. उनके मन में आसक्ति उत्पन्न हुई और वह कल्पना में खो गईं.
इस सब में हवन का शुभ मुहूर्त बीत गया. जब रेणुका की तंद्रा टूटी तो वह जल लेकर आश्रम आईं. विलंब के कारण जमदग्नि का क्रोध सारी सीमाएं लांघ गया था.
जमदग्नि ने बारी-बारी से अपने प्रत्येक पुत्र को बुलाया और आदेश दिया कि वे अपनी माता रेणुका का सिर काट दें. रुक्मवान, सुखेण, वसु और विश्वानस ने माता के प्रेम में पिता की आज्ञा मानने से मना कर दिया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:mbo]
फिर जमदग्नि ने राम को बुलाया और माता के वध का आदेश दिया. परशुराम इससे दुखी तो थे किंतु माता ने उन्हें हमेशा यह सिखाया था कि पिता का आदेश ईश्वर का आदेश होता है.
राम ने आज्ञा का पालन करते हुए माता रेणुका का सिर काट डाला. जमदग्नि पुत्र की पितृभक्ति से बड़े प्रसन्न हुए. उन्होंवे आज्ञा की अवहेलना करने वाला चारों पुत्रों को जड़ हो जाने का शाप दे दिया और राम से वरदान मांगने को कहा.
राम ने पिता से तीन वर मांगे- पहला वर कि माता जीवित हो जाएं और उन्हें अपने मरने की घटना का बिल्कुल स्मरण न रहे. दूसरा वर कि उनके चारों भाई पुनः चेतन हो जाएं. तीसरा, मैं युद्ध में किसी से परास्त न होता हुआ दीर्घजीवी रहूं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:mbo]
परशुराम की मातृ-पितृ भक्ति देखकर देवों ने पुष्पवर्षा की. जमदग्नि ने वरदान देते हुए कहा- पुत्र! तुम्हारा पृथ्वी पर आगमन पूर्वनियोजित था. आज जो हुआ वह देवताओं के आग्रह पर तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए हुआ जिसमें तुम सफल रहे.
परशुराम की कथा को आगे बढ़ाते हुए कल चर्चा करेंगे कि जिस रहस्य से संसार में बहुत कम लोग परिचित थे, उसे एक क्रूर शिकारी कैसे जानता था. कौन था वह शिकारी? कोई असुर, दिक्पाल या स्वयं शिव… यह प्रसंग कल
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