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क्षमा का स्थान दंड से ऊंचा है, जैसे कद बढ़ता जाए, क्षमाशीलता बढ़नी चाहिए- प्रेरक कथा

क्षमा का स्थान दंड से ऊंचा है, जैसे कद बढ़ता जाए, क्षमाशीलता बढ़नी चाहिए- प्रेरक कथा

krishna chakra
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एक राजा था. स्वभाव का बड़ा क्रोधी. उसने 10 खूंखार जंगली कुत्ते पाल रखे थे. कोई गलती करता तो राजा उसे कुत्तों के आगे डाल देता. मामूली गलतियों के लिए भी ऐसी भयंकर मौत की सजा देता था.

एक बार राजा के वर्षों पुराने भरोसेमंद एक मंत्री से कोई गलती हो गई. राजा ने उसे भी शिकारी कुत्तों के आगे फिंकवाने का हुक्म दे दिया. राजा ने मंत्री से उसकी आखिरी इच्छा पूछी.

मंत्री बोला- महाराज! मैंने आज्ञाकारी सेवक की तरह आपकी 10 सालों से सेवा की है. मैं चाहता हूं कि मुझे सजा देने से पहले 10 दिनों की मोहलत दी जाए. राजा मान गया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.दस दिन बाद सैनिक मंत्री राजा का हुक्म पूरा करने के लिए मंत्री को पकड़ लाए और राजा का इशारा पाते ही उसे खूंखार कुत्तों के सामने फेंक दिया. परंतु यह क्या, कुत्ते मंत्री पर टूट पड़ने की बजाए उसके साथ खेलने लगे.

राजा आश्चर्य से यह सब देख रहा था. उसे लगा यह क्या हो रहा है. उसके वफादार कुत्ते ऐसे क्यों हो गए. उसे कुत्तों पर भी गुस्सा आने लगा.

राजा से रहा नहीं गया. उसने मंत्री से पूछा- यह क्या हो रहा है. मेरे स्वामीभक्त कुत्ते मेरे हुक्म पर तुम्हें काटने की बजाय तुम्हारे साथ खेल क्यों रहे हैं?

मंत्री ने बताया- मैंने आपसे जो दस दिनों की मोहलत ली थी, उसका एक-एक क्षण मैंने इन बेजुबानो की सेवा में लगा दिया. मैं रोज इन्हें नहलाता, खिलाता व हर तरह से उनका ध्यान रखता.

ये कुत्ते खूंखार और जंगली होकर भी मेरे दस दिन की सेवा नहीं भुला पा रहे हैं परंतु खेद है कि आप प्रजा के पालक हो कर भी मेरी 10 वर्षों की स्वामीभक्ति भूल गए और मेरी एक छोटी सी त्रुटि पर इतनी बड़ी सजा सुना दी.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.राजा को अपनी भूल का एहसास हो चुका था. उसने तत्काल मंत्री को आज़ाद करने का हुक्म दिया और आगे से ऐसी गलती ना करने की सौगंध ली.

मित्रों, कई बार इस राजा की तरह हम भी किसी की बरसों की अच्छाई को उसके एक पल की बुराई के आगे भुला देते हैं. संसार में कोई भी प्राणी सर्वगुण संपन्न और विकार रहित नहीं होता. सुधारने का प्रयास नफरत से ज्यादा बड़ा है.

हमें क्षमाशील होना चाहिए. किसी की हज़ार अच्छाइयों को उसकी एक बुराई के सामने छोटा ना होने दें क्योंकि हो सकता है स्वयं आपसे भी ऐसी भूल हो जाए. जैसे-जैसे आपका कद बढ़े, वैसे-वैसे बढ़नी चाहिए आपकी क्षमाशीलता.

संकलनः वृंदा अग्रवाल
संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्

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