कजरी तीजः सुहागिनों व अविवाहिताओं दोनों के सुखद दांपत्य कामना का पर्व
भारत में तीन तरह के तीज मनाए जाते हैं, अक्खा तीज, कजरी तीज और हरियाली तीज. हर तीज का अपना अलग महत्व है. तीनों ही तीज में माता पार्वती और शिवजी की विशेष पूजा की जाती है. कजरी तीज कैसे मनाते हैं.
भाद्रपद तृतीया को कजरी तीज कहते हैं जिसे बड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है. उत्तर भारत में तीज पर्व बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं. खासतौर पर सुहागिनें इसे धूमधाम से मनाती हैं. औरतें अपने पति के लिए व कुआरी लड़की अच्छे पति के लिए व्रत रखती है. इस दिन वे पूरे दिन निर्जल व्रत रखती है और पति की लंबी उम्र की की कामना करते हुए शिव-पार्वतीजी की आराधना करती हैं. इस पर्व की सबसे खास बात यह है कि इसे महिलाएं गीत-नृत्य और आनंद में भरकर मनाती हैं.
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कजरी तीज में पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं. घरों में पकवान, मिष्ठान आदि बनाए जाते हैं जिसे तीजा भी कहा जाता है. झूले-हिंडोले पर बैठकर फिर सामूहिक रूप से कजरी गीत भी गाती हैं. माना जाता है कि माता पार्वती ने शिव जी से विवाह करने के लिये कुछ 108 बार जन्म लिया तब जाकर भगवान शिव उनसे शादी करने के लिए माने. इसलिए शादीशुदा महिलाएं माता पार्वती की पूजा करती हैं. उनसे अपने विवाह तथा पति के दीर्घायु होने की मंगलकामना करती हैं. कजरी तीज माता गौरी और शिवजी के साथ, श्रीराधा-कृष्ण की उपासना का दिन है.
कजरी तीज की इस पोस्ट में जानेंगेः-
- कजरी तीज व्रत पूजन की पूरी विधि
- तीज माता के पूजन की विधि
- कजरी तीज पूजन से जुड़े मंत्र
- सुखद दांपत्य जीवन, दांपत्य से जुड़ी विशेष मनोकामना के लिए कैसे करें पूजन
- कजरी तीज व्रत के लिए आवश्यक पूजन सामग्री
- कजरी तीज की पूजा से पूर्व क्या-क्या तैयारियां हों.
- कजरी तीज को क्या करें, क्या न करें.
- कजरी तीज व्रत की कथा
हमारे देश में हर प्रान्त में हर त्यौहार को अलग अलग तरह से मनाया जाता है. उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान सब जगह यह त्यौहार अलग तरीके से मनाया जाता है. उत्तर प्रदेश व बिहार में लोग नाव पर चढ़कर कजरी गीत गाते है. पूर्वांचल और बिहार आदि में इसे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. वहां तीज के गानों को वर्षागीत के साथ गाया जाता है.
राजस्थान में भी इस तीज का बहुत महत्त्व है. लोग बड़े हर्षोल्लास के पारंपरिक नृत्य करते मनाते हैं. ऊंट, हाथी की सवारी की जाती है. बूंदी की तीज तो खास तौर से मशहूर है.कजरी तीज की पूजन सामग्रीः
कुमकुम, काजल, मेहंदी, चंदन, मोली, दीपक, चावल, लोटा, फल-फूल, नीम की डाली, दूध, चुनडी, सत्तू, घी, और कुछ सिक्के.
कजरी तीज पूजन विधि:
- हाथ में अक्षत, रोली और पानी लेकर संकल्प पूजन का संकल्प करें. बिना संकल्प के की गई पूजा पूर्ण नहीं है. संकल्प लेना बहुत सरल है. प्रभु शरणम् ऐप्पस में विधि है. सामान्य रूप से संकल्प भी ले सकते हैं- कहें मैं… पत्नी श्री… गोत्र…. तीज पूजन का संकल्प करती हूं. फिर गणपति का आह्वान करके उनकी विधिवत पूजा करें. विधिवत शब्द सुनकर परेशान न हों क्योंकि इस पूजा की विधि अत्यंत सरल है. आपको इसे सीख ही लेना चाहिए क्योंकि हर पूजा में पहले यह पूजा होती ही है. आपने इतना कठिन व्रत रखा है तो फिर पूजन विधिवत ही होना चाहिए. प्रभु शरणम् एप्प के मंत्र-चालीसा सेक्शन में दैनिक पूजा विधि में इसे दिया गया है. हर स्त्री को यह पूजा विधि कंठस्थ होनी ही चाहिए.
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- फिर माता पार्वती और शिवजी की स्तुति मंत्रों सहित विधिवत करें. (विस्तृत विधि के लिए देखें प्रभु शरणम् ऐप्प)
- गणेशजी, शिवजी और तीज माता के रूप में पार्वतीजी की विशेष पूजा के बाद श्रीराधा-कृष्ण की पूजा करनी चाहिए. तीज माता को पारंपरिक रूप से पूजना चाहते हैं तो उसकी विधि भी इसी पोस्ट में आगे विस्तार से दी गई है.
- घर की उत्तर दिशा में हरा वस्त्र बिछाकर श्री राधा-कृष्ण का झूला झूलते हुए चित्र स्थापित करें.
- सर्वप्रथम श्री राधा-माधव के चित्र का विधिवत पूजन करें. पान के पत्ते से जल छिडकें.
- शुद्ध घी का दीपक जलाएं. चंदन का धूप जलाएं.
- श्रीकृष्ण पर चंदन अर्पित करें. राधाजी पर मेहंदी चढाएं.
- श्री राधाकृष्ण के चित्र पर जौ शक्कर घी और मेवा से बना सत्तू चढ़ाए.
- श्रीराधाकृष्ण को मिश्री और तुलसी का भोग लगाकर तत्पश्चात मीठा पान चढ़ाएं.
- 2 साबुत सुपारी बाएं हाथ में रखकर दाएं हाथ से तुलसी की माला से नीचे बताए कृष्ण मंत्र का तीन माला जाप करें.
कृष्ण मंत्रः
क्लीं कृष्णाय सर्वेश्वराय नमोस्तुते गोपेशु राधाकांता नमोस्तुते।।
मंत्र जाप के बाद साबुत सुपारी को पूरे साल भर संभाल कर रखें.
इस विशिष्ट पूजन और उपाय से दांपत्य विवाह और प्रणय संबंधित मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. पारिवारिक रिश्तों में सफलता मिलती है. शादी में आ रहे विघ्न दूर होते है तथा भावी जीवन के हर कार्य में सफलता मिलती है.कजरी तीज पर क्या करें, क्या न करें. तीज माता की पूजा कैसे करें, अगले पेज पर…धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-
कजरी तीज की पूजा से पूर्व की तैयारीः
औरतें हाथों में मेहँदी लगा कर नए नए कपड़े-गहने पहनकर तैयार होकर शाम को तीजमाता की पूजा करें और कथा करें.
तीजमाता या कजलीमाता देवी पार्वती का ही एक रूप है.
माता के आगे सत्तू (भुने चने, चावल, या गेहूं के आटे के साथ चीनी मिलाकर बनाये गए पिंड) रखकर उसका भोग लगाएं.
पूजा के समय गोबर की पाल बनाकर एक तलाई बनाई जाती है और उसमें दूध डालते है. बहुएं अपनी सास के पैर छूकर शक्कर और रुपयों का बयना देती है. वे भी बहू को आशीर्वाद देती है.हर व्रत की तरह इस व्रत पर भी त्याज्य हैं तीन बातें:
- छल-कपट न करें.
- मिथ्याचार अर्थात झूठ न बोलें.
- दुर्व्यवहार तथा परनिंदा अर्थात किसी के साथ भी बुरा व्यवहार ना करना और किसी की बुराई ना करना.
पारंपरिक रूप से तीज माता की पूजा इस प्रकार कर सकते हैंः
- पहले कुछ मिटटी या गोबर इक्कट्ठा कर उसका एक पाल बना लें, ध्यान रखें कि उसमें से दूध बाहर न बिखरने पाए.
- उसके एक तरफ नीम की डाली लगा दें और उस पर चुनरी डाल दें.
- गणेश जी की फोटो या प्रतिमा पास में रख दें या गोबर से ही गणेशजी बनाएं.
- पूजा के लोटे पर स्वस्तिक बनाएँ और उस पर मोली बांधें. उस पर थोडा चावल, गुड़ और सत्तू लगाएं. इसी तरह से पूजा के स्थान पर चावल, गुड़, सिक्का, मोली और सत्तू लगाएं.
- पहले गणेश जी और लक्ष्मीजी की पूजा करें.(गणेशजी की संक्षिप्त पूजा है जिससे उनका आह्वान किया जाया है. पांच मिनट से भी कम की पूजा है. आप इसे प्रभु शरणम् एप्प के मंत्र-चालीसा सेक्शन के दैनिक पूजा विधि में देख सकते हैं. एप्प का लिंक ऊपर है उससे डाउनलोड कर लें. लिंक पुनः दे देंगे)
- फिर माता को सत्तू का भोग लगाएं. पाल में थोडा दूध डालें.
- फिर हर सुहागन को कुमकुम, मेहंदी और काजोल की सात बार बिंदी लगानी होती है. कुंवारी लड़कियां सोलह बिंदियाँ लगाती हैं.
- फिर कपूर की आरती कर दें. दीपक जलाए रखें और व्रत कथा कहें.
- व्रत कथा के बाद सब पाल में सत्तू, फल, सिक्का और चुनरी की छाया देखते हैं. इसमें दीपक और गहने भी देखते हैं.
- फिर सभी तीज माता को शीश नवाते हैं.
कजरी तीज व्रत-पूजन की कथा, अगले पेज परकजरी तीज की कथाः
एक किसान के 4 बेटे और बहुएं थी. उनमें से तीन बहुएं बहुत संपन्न परिवार से थीं लेकिन सबसे छोटी वाली गरीब थी और उसके मायके में कोई था भी नहीं. तीज का त्यौहार आया, और परंपरा के अनुसार तीनों बड़ी बहुओं के मायके से सत्तू आया लेकिन छोटी बहु के यहाँ से कुछ ना आया.
तब वह इससे उदास हो गई और अपने पति के पास गई. पति ने उससे उदासी का कारण पूछा. उसने सब बताया और पति को सत्तू लाने के लिए कहा. उसका पति पूरा दिन भटकता रहा लेकिन पैसों का इंतजाम न हो सका. कहीं सफलता नहीं मिली.
वह शाम को थक हार के घर आ गया. उसकी पत्नी को जब यह पता चला कि उसका पति कुछ ना लाया तब वह बहुत उदास हुई. अपनी पत्नी का उदास चेहरा देख वह रात भर सो ना सका. अगले दिन तीज थी जिस वजह से सत्तू लाना अभी जरुरी हो गया था.
वह रात में ही अपने बिस्तर से उठा और एक किराने की दुकान में चोरी करने के इरादे से घुस गया. वहां वह चने की दाल लेकर उसे पीसने लगा, जिससे आवाज हुई. उस दुकान का मालिक उठ गया. उन्होंने उससे पूछा यहाँ क्या कर रहे हो?
तब उसने अपनी पूरी गाथा उसे सुना दी. यह सुनकर दुकानदार बनिए का मन बदल गया और उसे दया आई.
उसने कहा- तू अभी चिंता छोड़कर घर चला जा. आज से तेरी पत्नी का मायका मेरा घर होगा. वह घर आकर सो गया.अगले दिन सुबह सुबह ही बनिए ने अपने नौकर के हाथ चार तरह के सत्तू, श्रृंगार व पूजा का सामान भेजा. यह देख छोटी बहुत खुश हो गई. उसकी सब जेठानी उससे पूछने लगी की उसे यह सब किसने भेजा तब उसने बताया की उसके धर्म पिता ने यह भिजवाया है.
इस तरह भगवान ने उसकी सुनी और पूजा पूरी करवाई. कजरी तीज को तीज माता की विधिवत पूजा, शिव-पार्वती की पूजा और राधा-कृष्ण के आशीर्वाद से अविवाहितों का शीघ्र विवाह होता है. विवाहितों को दांपत्य जीवन की जो भी विशेष लालसा हो वह पूरी होती है.
जो कजरी तीज का व्रत स्वयं नहीं कर पाते उन्हें किसी जरूरतमंद व्रती का व्रत में सहयोग कर देना चाहिए. उसे कुछ सामग्री अवश्य दे देनी चाहिए.आपको यह पोस्ट कैसी लगी, अपने विचार लिखिएगा. प्रभु शरणम् ऐप्प में ऐसे उपयोगी पोस्ट बहुत मिल जाएंगे. छोटा सा ऐप्प है. करीब पांच लाख लोग उसका प्रयोग करके प्रसन्न हैं. आप भी ट्राई करके देखिए. अच्छा न लगे तो डिलीट कर दीजिएगा.
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