माता पार्वती ने भगवान शिव से अमरकथा और सृष्टि का आदि रहस्य सुनने की जिज्ञासा प्रकट की। भगवान शिव ने बताया भी, लेकिन वह बीच में ही सो गईं। जबकि तुरंत जन्मे तोते के बच्चे ने वह आदि रहस्य(ब्रह्म ज्ञान) सुन लिया। वह वेदव्यास के बेटे शुकदेव के रुप में जन्मा।
उधर तल्लीन होकर ब्रह्म ज्ञान का उपदेश दे रहे भगवान शिव की नजर नींद में डूबी माता पार्वती पर पड़ी तो वे क्रोधित हो गए। जब माता की निद्रा टूटी तो महादेव ने उलाहना देते हुए कहा, कि तुम आदिशक्ति हो, लेकिन कभी कभी तुम्हारा आचरण अज्ञानी और निम्न श्रेणी से मनुष्यों की तरह हो जाता है। इससे माता पार्वती रुष्ट हो गईं। उन्होंने संकल्प लिया कि अब आपको मुझे प्राप्त करने के लिए मनुष्य रुप धारण करना होगा। ऐसा कहकर जगदंबा अंतर्ध्यान हो गईँ।
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जगदजननी के वियोग में जगद्पिता विह्वल हो उठे। लेकिन माता पार्वती नहीं लौटीं, क्योंकि वे एक मछुवारे की पुत्री के रूप में धरती में जन्म ले चुकी थी. भगवान शिव पार्वती को न पाकर विचलित हुए परन्तु उसी समय नारद जी उनके सामने प्रकट हुए तथा उन्हें दिलासा दिया।
उधर मृत्युलोक में माता पार्वती विवाह के योग्य हुई तो भगवान शिव ने अपने गण नंदी को धरती पर भेजा.
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नंदी ने एक बहुत ही विशाल मच्छ का रूप धरा तथा वहां उत्पात मचाना शुरू कर दिया जहां माता पार्वती के परिवार के लोग मछलियाँ पकड़ते थे. नंदी रुपी मच्छ ने वहां भारी आतंक मचाया और मछुआरों के सभी जाल फाड़ डाले। कई लोगों को घायल कर दिया। नौबत ये आ गई कि मछुआरे भूखे मरने लगे। क्योंकि वो मछलियां पकड़ने के लिए जल में उतरने का साहस ही नहीं कर पा रहे थे।
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तब माता पार्वती के पिता, जो वहां के मुखिया थे तथा उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह उस व्यक्ति से करने का प्रस्ताव रखा जो उन्हें नदी में उत्पात मचा रही भयानक मच्छ से मुक्ति दिलाएगा. तब भगवान शिव मछुआरे का रूप धारण कर नदी के समीप गए तथा नंदी रूपी उस विशाल मच्छ को वश में कर उसे वहाँ से भगा दिया. शर्त के अनुसार भील कबीले के मुखिया ने अपनी पुत्री का विवाह भगवान शिव से कराया तथा इस तरह भगवान शिव और माता पार्वती का पुनः मिलन हुआ !
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शिव और शिवा की यह लीला अद्भुत है। इसमें जगदंबा और जगद्पिता ने सुख सुविधा संपन्न महलों में अवतार नहीं लिया।बल्कि प्रकृति के बीच संघर्षपूर्ण जीवन बिताने वाले मनुष्यों के बीच अवतरित होकर उनके दुख सुख को समझा।
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इसलिए बाकी सब देव लेकिन शिव महादेव। जन जन के पिता सबके सुख दुख को समझने वाले। देव-दानव, मनुष्य, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, नाग, प्रेत, पशु, राक्षस सबके प्रिय महादेव को कोटि कोटि नमन
हर हर महादेव
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