इच्छाधारी नाग से रोमांचक मुलाकात
इच्छाधारी नाग एक ऐसा शब्द जो बचपन से ही रोमांचित करता रहा है। किस्सों-कहानियों में, फिल्मों में सुनते-देखते बड़े हुए हैं। इच्छाधारी नाग की दुनिया होती है क्या? रहस्य-रोमांच से भरी कथा में इच्छाधारी नाग के बारे में जानेंगे।
भक्ति कथाओं के लिए प्रभु शरणम् फेसबुक पेज लाइक करें-यह कहानी है एक यायावर साधक की, जो सृष्टि के रहस्यों की तलाश में है। एक बार यह यायावर साधक जहां तहां भटकता एक ऐसे स्थान पर पहुंच गया जिसके बारे में लोगों का कहना था, कि यहां एक इच्छाधारी नाग रहता है। उस साधक ने अपना अनुभव कई जगह लिखा है। उसे ही संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। साधक के पूर्वजन्मों के पुण्य थे जिसके फलस्वरुप इच्छाधारी नाग ने उसे दर्शन दिए। आइए रोमांच की एक नई दुनिया में चलें।
यह एक वास्तविक घटना है लेकिन इच्छाधारी के रहने का स्थान और साधक का नाम गुप्त रखा गया है। उस साधक को एक स्थान पर रात्रि में बड़ी तेज अलौकिक रौशनी दिखाई पड़ती थी। वह उस रौशनी को देखता तो चौंक जाता। रात में ऐसा दूधिया प्रकाश और खुशबू का झोंका। उसने वहां रहने वालों से पूछा तो सबने कहा- पुरखों से सुना था वहां कोई इच्ठाधारी नाग रहता है। हम इस डर से उधर जाते ही नहीं।
इच्छाधारी नाग है यहां पर, यह बात उस यायावर की उत्सुकता का सारी सीमाएं तोड़ने के लिए काफी थी। उन्हीं की जुबान से सुनते हैं इच्छाधारी नाग से भेंट कैसे हुई, क्या देखा? सब कुछ सारी कहानी, उसी अज्ञात यायावर साधक की जुबानी।
इच्छाधारी नाग से रोमांचक मुलाकातः
काफी मुश्किलें झेलने के बाद मैं उस स्थान पर पहुंचा, जहां पर वह इच्छाधारी नाग निवास करता था। देर रात तक इंतजार करने के बाद दूधिया प्रकाश दिखाई दिया। मैं अपने मित्र के साथ आगे बढ़ा। सांप कोई बीस मीटर दूर था लेकिन अब स्पष्ट दिख रहा था। काले रंग का विशाल नाग था, बिल्कुल काला। चाँद की रोशनी और मणि के प्रकाश में वह नीला दिख रहा था।
अचानक सांप घूमा, उसने मुड़कर मुझे देखा। उसके नेत्र ज्वाला की तरह थे। मैंने झट से दोनों हाथ जोड़ लिए और सिर झुका लिया। इस प्रकार मैंने अपनी मंशा ज़ाहिर कर दी, कि हम कोई नुकसान नहीं पहुंचाने नहीं आए। सर्प ने फुंकार भरी। हम दोनों पीछे हटे क्योंकि वह क्रोध में था।यह महानाग बार बार अपना फन फैलाता और फिर बंद करता। ऐसा उसने कई बार किया। नाग के सर पर रखी मणि चमकती जा रही थी। इतनी ज्यादा कि आँखें चुंधिया जाती थीं।
तभी फिर से एक और फुंकार! और हम खड़े रह गए जस के तस। जैसे समय स्थिर हो गया हो। हम एक दूसरे के सामने थे। वो महानाग भी वहीँ खड़ा था। आधा शरीर उठाये। खड़े हम भी थे लेकिन आधा शरीर झुकाए। उसकी मणि का प्रकाश चमक रहा था। उसकी चमक में मेरी कमीज के अंदर पहनी हुई बनियान भी चमकने लगी थी!
मणि का प्रकाश दूधिया था। बहुत दूधिया! उसने फिर से एक फुंकार मारी, बिल्कुल ऐसे जैसे एक मरखनी भैंस या गाय आवाज़ करती है। ऐसी गरजती हुई आवाज़ आई। वो आगे बढ़ा! और हम झुक कर बैठ गए दोनों हाथ जोड़े हुए! वो और करीब आया!
तभी एक भीनी सी सुगंध आयी, यह कनेर के फूल जैसी भीनी सुगंध थी! वो और आगे आया! करीब दस मीटर रह गया!फिर फुंकार मारी! फन फैलाया, किसी छोटी छतरी समान फन था उसका! उसके कंठ पर चमचमाता हुआ पीले रंग का गौ-चरण चिन्ह बहुत बड़ा था।
बड़ा सा, मेरे सीने के बराबर। ये बड़ा ही विचित्र नज़ारा था। एक इच्छाधारी के सामने था मानव। वो सहस्त्र वर्षों से इस संसार में था और हमारी आयु तो कुछ न थी उसके आगे.
आदर सहित दम साधकर हम हाथ जोड़े बैठे थे, उसने फिर से फुफकार भरी। इस बार हल्की सी फुफकार, भयानक वाली नहीं. वह समझ गया था कि हम उसको नुकसान नहीं पहुंचा रहे, न ही उसकी मणि ही लेने आये हैं.
हिंदू धर्म से जुड़ी सभी शास्त्र आधारित जानकारियों के लिए प्रभु शरणम् से जुड़ें. एक बार ये लिंक क्लिक करके देखें फिर निर्णय करें. सर्वश्रेष्ठ हिंदू ऐप्प प्रभु शरणम् फ्री है.
Android ऐप्प के लिए यहां क्लिक करें
लिंक काम न करता हो तो प्लेस्टोर में सर्च करें-PRABHU SHARNAM
धार्मिक पोस्ट के लिए प्रभु शरणम् का फेसबुक पेज लाईक करें.
वो और आगे आया करीब पांच मीटर तक। फन बंद कर लिया, लेकिन उसका सर बहुत बड़ा था! आदमी के सर से भी बड़ा! उसके दाढ़ी नहीं थी युवा था वो! उसकी आँखें ऐसी जैसे अंगार! उसने जीभ लपलपाई, माहौल का जायज़ा लिया और फिर ऊंचा उठा।
ऐसे लहराया जैसे कोई सपेरा किसी सांप को बीन से लहराता है। उसका शरीर बहुत मोटा था। हाथी के पाँव से भी मोटा। अजगर जैसा एकदम काला वो और आगे आया, करीब तीन मीटर लहरा कर और अब हम लेट गए नीचे। दोनों हाथ आगे किये, सर झुकाये। वो और आगे आया और एकदम हमारे करीब।मणि के प्रकाश से आँखें मिचमिचा गयीं। चमक के मारे आँखें बंद ही हो गयीं। मैंने अब अपने हाथों पर गरम गरम श्वांस महसूस की। वो हमारे करीब ही था। भय तो था हमें। उसने एक दंश मारना था, और मैं सीधा परलोक सिधार जाता। मैंने सर उठाया और उसके भयानक नेत्रों को देखा। पीला लौह जैसे खौलता है, ऐसे नेत्र। उसने जीभ फिर लपलपाई, मेरे शरीर में झुरझुरी छूट गयी।
“क्षमा! क्षमा हे नागराज!” मैंने कहा,
उसने मुझे देखा और जीभ लपलपाई। दो-फाड़ जीभ ऐसी जैसे कि दो तलवारें आपस में भिड़ी हुईं।
“क्षमा!” मैंने कहा।
वो पीछे हटा और हटता ही चला गया। मैं उठा घुटनों पर बैठा, हाथ जोड़े हुए। वो पीछे हट गया था और अब कुंडली मारकर गौर से हमें ही देख रहा था।
उसका फन बंद था, अब कोई फुंफकार नहीं! शांत था वो। जैसे हमारी धृष्टता को क्षमा कर दिया था उसने। मैंने प्रणाम किया उसको और खड़ा हो गया।
वो पीछे हटा, कुंडली खोली, पीछे घूमा! और चल पड़ा पीछे। हमारे देखते ही देखते प्रकाश झलकाता हुआ झाड़ियों से होकर जंगल में चला गया। हम भौचक्के से उसको देखते रहे और वह ओझल हो गया। कितना अलौकिक नज़ारा था।उसकी गरम श्वास अभी तक जैसे मेरे हाथों पर जीवंत थी और वो भीनी भीनी अलौकिक सुगंध अभी तक नथुनों में बसी थी। मैं लौट आया, लेकिन मन उसी इच्छाधारी में था। उस सहस्त्र वर्षों के तपस्वी में, तपस्याधारी में रमा हुआ था।
अगले दिन रात करीब ग्यारह बजे मैं फिर से उसी स्थान पर पहुंचा। फिर से प्रकाश सा चमका अब ये दो रंग का था! एक सफ़ेद दूधिया और एक संतरी। आज दो मणियाँ थीं उसके पास। हम उसकी ओर बढ़े। वह बैठा था फन फैलाये कुंडली मारे। आज वे मणियाँ उसके मस्तक पर नहीं थीं बल्कि कुंडली के मध्य थीं। वहीँ से प्रकाश आ रहा था।
संतरी वाला प्रकाश तो जैसे दहक रहा था। प्रकाश उसके कुंडली के बीच से ऐसे आ रहा था। जैसे कोई टॉर्च भूमि में दबा दी हो। उस प्रकाश में उसका फन साफ़ दिखायी दे रहा था। मैं डरता हुआ आगे गया और बैठ गया घुटनों के बल। उसने फुंफकार भरी और फिर फुंकार छोड़ी। भयानक आवाज़ हुई, कोई हाथी भी हो तो भाग जाए पीछे।
फिर कुछ देर ऐसे ही रहा मैं, न वो हिला, और न हम। फिर मैं आगे बढ़ा। सांप ऐसे ही बैठा रहा। मैं और आगे गया! कोई हरक़त नहीं की उसने। हमारे बीच कोई एक मीटर की दूरी रह गयी!
अब उसने जीभ लपलपाई और मैं बैठ गया। हाथ जोड़े और घुटनों पर बैठ गया। मेरे सामने एक विशाल सर्प था। जो विषैला, खतरनाक, और ताक़तवर था। शायद मैने उसका विश्वास जीत लिया था। मैंने सर उठाकर उसके दहकते नेत्रों में देखा। कुछ पल ऐसे ही बीते।
“हे नागराज!” मैंने कहा, उसने फुंकार मारी। “हे नागराज!” मैंने फिर कहा, और फिर से एक भयंकर फुंकार!
सर्वश्रेष्ठ हिंदू ऐप्प प्रभु शरणम् को एक बार देखें जरूर.
Android ऐप्प के लिए यहां क्लिक करें
लिंक काम न करता हो तो प्लेस्टोर में सर्च करें-PRABHU SHARNAM
धार्मिक पोस्ट के लिए प्रभु शरणम् का फेसबुक पेज लाईक करें.
मैं घबरा गया लेकिन साहस बटोरकर एक बार फिर मैंने पुकारा। अब कोई फुंकार नहीं! शांत! एकदम शांत! मेरी हिम्मत बढ़ी! मैंने उसको प्रणाम किया।
“हे नागराज! आप क्रोधित न हों! हम बस आपके दर्शन करना चाहते हैं! इच्छाधारी स्वरुप में!” मैंने कहा। उसने फिर से फुंकार भरी, मेरी आँखें बंद हुईं।
“हे नागराज हम बस आपके दर्शन के अभिलाषी हैं!”
उस सांप ने कुंडली खोली और वो अलौकिक मणियाँ अपने मस्तक पर धारण करके अपना फन फैलाकर मेरे सामने आया। मैंने उसके शल्क देखे एकदम करीब से, दम साध लिया मैंने।सांस थम सी गयी। मेरे माथे पर उसने अपना फन रखा। मैं कांपा अब. लगा कुंडली में दबोच लेगा मुझे लेकिन नहीं वह मेरे कंधे से गुजरा। मेरी साँसे अटकी हुई थीं। उस पल मुझे मौत सामने दिख गयी।
सर्वश्रेष्ठ हिंदू ऐप्प प्रभु शरणम् को एक बार देखें जरूर.
Android ऐप्प के लिए यहां क्लिक करें
लिंक काम न करता हो तो प्लेस्टोर में सर्च करें-PRABHU SHARNAM
वो फिर से पलटा! और मेरे सामने आ गया। “हे नागराज! इच्छा पूर्ण करें!” मैंने डरते, सहमते कहा।
उसने फिर से कुंडली बनायी और फिर फुंकार भरी। उसके नेत्र दहक उठे मैं घबरा सा गया और हाथ जोड़कर घुटने के बल बैठ गया!
वह करीब आया, मेरे चेहरे के सामने पूरा फन फैलाया उसने। जैसे ही मेरे नेत्र से उसके नेत्र भिड़े मैं तो सिहर गया उसकी आँखें देखकर। गेंद जैसी बड़ी बड़ी आँखें और कोड़े जैसी दो फाड़ जीभ। जीभ लहराती तो लगता जैसे कोई काला चुटीला लहरा रहा है। उसकी श्वास मेरे चेहरे से टकरायी और मैं जैसे काठ का बन गया। हाथ कांपने लगे थे, सर से टपकता पसीना माथे से होता हुआ आँखों में जाने लगा। और धड़कन ऐसी, कि जैसे दिल पसलियों से मुक्त हो गया है।
“हे नागराज! अपने स्वरुप का दर्शन दें!” मैंने फिर से साहस बटोरकर कहा।
उसने फुंफकार मारी! और फिर एक ही पल में वो प्रकाश-पिंड में परिवर्तित हो गया। मेरी तो आँखें चुंधिया गयीं ढक ली आँखें मैंने अपने हाथों से। और फिर बेहद मुश्किल से खोलीं तो हैरत में पड़ गया। मेरे सामने कोई राजा समान व्यक्ति खड़ा था, उज्जवल रूप था उसका।चौड़ा वक्ष, चौड़े ही कंधे और लम्बे लम्बे स्याह केश! पीछे कंधे से होते हुए पीठ तक जाते हुए। रौबदार ताव वाली मूंछें दमकता चेहरा। सुनहरे रंग की सुसज्जित वेश-भूषा। आभूषणयुक्त देह किसी पहलवान की तरह। और कद कोई आठ-नौ फीट। जैसे कोई देवता उतर आया था भूमि पर। अद्वितीय रूप था उसका। जो एक बार देख ले तो बस जड़ होकर देखता ही रह जाए।
समय अपनी गति भूल गया था! मुझे अचंभित देखकर नागराज मुस्कुराया! उसकी मुस्कुराहट भी कैसी दिव्य और कैसी आनंददायी थी!
जैसे अभय प्रदान कर रही हो। और फिर एक दिव्य स्वर गूंजा, जैसे वीणा बजी हो। जल-तरंग बज उठे हों आकाश में। कण कण में एक अलौकिक सुगंध फैल गई! देवत्व भरा था उस सुगंध में!
सर्वश्रेष्ठ हिंदू ऐप्प प्रभु शरणम् को एक बार देखें जरूर.
Android ऐप्प के लिए यहां क्लिक करें
लिंक काम न करता हो तो प्लेस्टोर में सर्च करें-PRABHU SHARNAM
धार्मिक पोस्ट के लिए प्रभु शरणम् का फेसबुक पेज लाईक करें.
“मै कंदर्पमणि हूँ।” वो बोला।
एक विलक्षण सा मद था उस स्वर में। शरीर में झुनझुनाहट सी हो गयी। बिना कुछ कहे मैंने हाथ जोड़ लिए।
“ये मेरा अहिरण्यक-प्रदेश है! मैं सहस्त्र वर्षों से यहीं हूँ। यहां मेरा शासन है।” उसने कहा।
सम्भवतः हमारे कुछ पुण्य संचित थे, जो इन नागराज का अलौकिक रूप देखने को मिला। मैं धन्य हो गया था। वाणी मूक थी, आंखों से आंसू बह रहे थे। बस हाथ जोड़ लिए। और तभी फिर से वही प्रकाश आँखें चुँधियाईं। अपने हाथ आगे करके आंखें ढंक ली। जब खोली तो सामने वही नागराज थे लेकिन अपने उसी सर्प-रूप में।
मैंने फिर से सर झुका कर प्रणाम किया। कुछ पल ऐसे ही बैठे रहे, उनका आशीर्वाद ग्रहण करते रहे। फिर एक फुफकार मारकर अपना फन उठायाऔर फिर पीछे हटकर चल दिए। दूर तक मणि का प्रकाश दिखता रहा। चलता रहा वह प्रकाश सर्पराज के आगे आगे और फिर धूमिल होता गया। और जैसे फिर शून्य में लोप होकर ओझल हो गया।
वेद-पुराण-ज्योतिष-रामायण-हिंदू व्रत कैलेंडेर-सभी व्रतों की कथाएं-व्रतों की विधियां-रामशलाका प्रश्नावली-राशिफल-कुंडली-मंत्रों का संसार. क्या नहीं है यहां! एक बार देखिए तो सही…
Android ऐप्प के लिए यहां क्लिक करें
लिंक काम न करता हो तो प्लेस्टोर में सर्च करें-PRABHU SHARNAM
हम ऐसी कथाएँ देते रहते हैं. फेसबुक पेज लाइक करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा. https://www.facebook.com/PrabhuSharanam कथा पसंद आने पर हमारे फेसबुक पोस्ट से यह कथा जरुर शेयर करें.
धार्मिक चर्चा में भाग लेने के लिए हमारा फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें. https://www.facebook.com/groups/prabhusharnam

