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हार का दोषी कौनः भगवान, किस्मत या स्वयं इंसान

हार का दोषी कौनः भगवान, किस्मत या स्वयं इंसान

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एक राजा के दरबार में विरोचन और मुनि नामक दो गायक थे. विरोचन की गायकी प्रतिभा का पूरा दरबार कायल था. हर कोई उसे ही सुनना चाहता था. मुनि को यह बात अखरती थी.

मुनि ने धीरे-धीरे इसे अपनी किस्मत मानते हुए समझौता कर लिया. अब दरबार में केवल विरोचन गाते थे तो विरोचन ही सुने जाते, मुनि की प्रतिभा दबती चली गई.

लगातार खुद की उपेक्षा होते देख, मुनि ने अपना नियमित अभ्यास भी छोड़ दिया. वह रोज शिव मंदिर के सामने बैठकर खुद की किस्मत और भगवान को कोसता रहता.

एक दिन भगवान ने सोचा क्यों ना इसकी भी सुन ली जाए. मुनि मंदिर में बैठा भगवान को अपनी खराब किस्मत के लिए कोस रहा था तभी शिवजी प्रकट हो गए. महादेव ने मुनि पूछा- तुम क्या चाहते हो?हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

मुनि ने कहा- प्रभु मैं भी अच्छा गायक हूं. मुझे भी विरोचन की तरह दरबार में किसी खास मौके पर गाने के लिए मौका चाहिए ताकि मैं अपनी कला का प्रदर्शन कर सकूं, लेकिन मेरी किस्मत में तो यह है ही नहीं.

भगवान ने कहा- ठीक है मैं तुम्हें एक मौका जल्द ही देता हूं. कुछ दिनों बाद राजा के दरबार में कुछ दूसरे राजा और विद्वान आए. उनके मनोरंजन के लिए गाने को विरोचन को बुलाया गया. लेकिन उस दिन विरोचन का गला खराब था.

राजा ने मुनि को बुलवाया और अपने खास अतिथियों का अपने गीत से मनोरंजन करने को कहा. चूंकि मुनि ने तो रियाज करना ही छोड़ दिया था इस कारण वह ठीक से गा नहीं पाया.

अतिथियों के सामने हुई हंसी से राजा को गुस्सा आया. उसने मुनि को राजसभा में गाने से हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया. दुखी मुनि मंदिर पहुंचा. वहां शिवजी उसकी ही प्रतीक्षा कर रहे थे.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

मुनि ने उनसे फिर शिकायत की- प्रभु यह क्या. इतनी प्रतीक्षा के बाद आप इतना बड़ा मौका देने वाले थे, तो इसके बारे में यदि पहले बता देते तो मैं थोड़ा अभ्यास कर लेता. अब तो राह ही बंद हो गई.

शिवजी हंस दिए. उन्होंने समझाया- मुनि, जीवन में कोई भी अवसर बताकर नहीं आता. कब किस्मत खुल जाए, कब जीवन का सबसे बड़ा अवसर मिल जाए, इसके बारे में कहा नहीं जा सकता.

इसके लिए इंसान को हमेशा स्वयं को तैयार रखना चाहिए. तुमने तो आस ही छोड़ दी, अभ्यास करना छोड़ दिया इसलिए तुम्हें आज अपमानित होना पड़ा.

कई लोग अपनी सारी असफलता और परेशानी को भगवान या किस्मत पर छोड़ देते हैं. जब भी किसी काम में अच्छे परिणाम नहीं मिलते तो किस्मत को कोसने लगते हैं अपनी हार भगवान के मत्थे मढ़ देते हैं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

कई लोग यह सोचकर दोबारा प्रयास भी नहीं करते कि शायद किस्मत में लिखा ही नहीं है. ऐसे में निराशा हावी हो जाती है. हम कोशिशें बंद कर देते हैं और फिर निष्क्रिय रहना हमारा स्वभाव बन जाता है.

संकलनः सारिका शर्मा
संपादनः प्रभु शरणम्

यह प्रेरक कथा सारिका शर्माजी ने ऑस्ट्रेलिया से भेजी है. सारिकाजी ने मैनेजमेंट की ऊंची शिक्षा प्राप्त की है और अभी ऑस्ट्रेलिया में प्रवास कर रही हैं.

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