Advertisement728 × 90

आरती में न करें भूल, इस विधि से करें आरती देवता होंगे प्रसन्न

आरती में न करें भूल, इस विधि से करें आरती देवता होंगे प्रसन्न

शास्त्रों में आता है पूजा में जो कमी रह जाए सबकी पूर्ति आरती से की जाती है. आरती से जुड़े कुछ विधान हैं जिनका पालन अवश्य करना चाहिए. आरती सभी ने की होगी. आरती के दौरान कई बार अंजाने में चूक करते रहते हैं. जानिए आरती से जुड़े सारे विधान जो हमेशा काम आएंगे.

गंगा आरती काशी

धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना  WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर  9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से SAVE कर लें. फिर SEND लिखकर हमें इसी पर WhatsApp कर दें. जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना  WhatsApp से मिलने लगेगी. यदि नंबर सेव नहीं करेंगे तो तकनीकि कारणों से पोस्ट नहीं पहुँच सकेंगे.

 

आरती को नीराजन भी कहा जाता है. इसका अर्थ है विशेष रूप से प्रकाशित करना. देवपूजन से प्राप्त सकारात्मक शक्तियां हमारे मन को प्रकाशित कर दें इसलिए आरती जरूरी है. आपको आरती से जुड़ी छोटी-छोटी मगर काम की बातें बताएंगे. इन्हें अपनाकर आप अपनी पूजा के फल को और बेहतर कर सकते हैं.

इस पोस्ट में आप जानेंगे- आरती क्यों करनी चाहिए? आरती किन चीजों से होती है उसका क्या कारण है? किस देवता की कितनी आरती उतारनी चाहिए? घर की आरती और मंदिर की आरती में क्या अंतर है? आरती के क्या-क्या नियम हैं जिनका पालन होना चाहिए? आप समझ लें कि भगवान की आरती से जुड़ी सारी बातें आपको बताई जाएंगी.

हिंदू धर्म से जुड़ी सभी शास्त्र आधारित जानकारियों के लिए प्रभु शरणम् से जुड़ें. सर्वश्रेष्ठ हिंदू ऐप्प प्रभु शरणम् फ्री है. Android मोबाइल ऐप्प डाउनलोड करने के लिए यहां पर क्लिक करें

 

आरती क्यों कर लेनी चाहिए?

कोई ऐसी पूजा करते हों जिसमें आप वैदिक मंत्रों का पाठ नहीं कर पाते वहां आरती जरूर कर लेनी चाहिए. बहुत से लोग वैदिक मंत्रों के पाठ में सहज या समर्थवान नहीं होते. वे वैदिक मंत्रों से पूजन के स्थान पर चालीसा आदि ही केवल पढ़ पाते हैं. उन्हें आरती अवश्य कर लेनी चाहिए. इससे पूजा पूर्ण हो जाती है. बहुत से लोग यहां पर भ्रम में पड़ जाते हैं कि हम किस देवता की आरती करें. पंचदेव उपासना का वैदिक विधान है. यदि आप किसी देवता की आरती नहीं गा पा रहे हैं तो समस्त देवताओं का ध्यान करके उन्हें आरती दिखा सकते हैं. चाहें तो इस मंत्र का उच्चारण कर लें-

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।

जो कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, वे भगवान शिव माता भवानी सहित मेरे ह्रदय में सदैव निवास करें और उन्हें मेरा नमन है.

यह आरती स्वयं नारायण ने शिव-पार्वती के विवाह के अवसर पर की थी. यह आरती संपूर्ण मानी जाती है. वैसे आप जिस भी इष्ट की आरती करना चाहें कर सकते हैं.आरती की लौ के ऊपर हाथ फेरकर फिर शरीर का स्पर्श क्यों करते हैं?

आरती का अर्थ है देवताओं की समस्त सकारात्मक शक्तियों को अग्नि के माध्यम से एकत्र करना. आरती की लौ को आत्मा समझना चाहिए. उसके ऊपर से हाथ फेरकर अपने शरीर के अंगों को स्पर्श करने के पीछे भाव है कि देवताओं की शक्ति हमारे मन को प्रकाशित करे.

लौ लेने के बाद शरीर पर स्पर्श करते समय यह प्रार्थना करनी चाहिए- हे ईश्वर हमारे व्यक्तित्व को उज्जवल निर्मल प्रकाशित कर दें.

स्कंद पुराण में भगवान की आरती के संबंध में काफी कुछ बताया गया है. घर में या मंदिर में आरती हो रही हो उस स्थिति में बैठना या लेटना नहीं चाहिए. इससे दोष लगता है. सिर्फ बीमारों के लिए इससे छूट है.आरती में शंख और घंटा क्यों बजाया जाता है?

आरती पूजा को पूर्णता की ओर ले जाता है. हो सकता है कि पूजा के दौरान मन कई बार उधर-उधर भटक गया हो. उस चूक की भरपाई आरती में होती है. इसलिए आरती के दौरान मन न भटके इसे ध्यान में रखकर गीत-संगीत का समावेश है. इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है. आरती गाने से ध्यान नहीं भटकता. बहुत से लोगों को वह आरती पता नहीं होती. इसलिए शंख और घंटे की ध्वनि को केंद्र में रखकर वे ध्यान एकाग्रचित कर सकते हैं.

लयबद्ध संगीत या ध्वनि ध्यान को केंद्रित करने में सहयोगी है. इसलिए आपने देखा होगा कि घंटा या करताल बजाने का एक नियम रहता है. घंटे की ध्वनि से मन में चल रहे विचारों की उथल-पुथल कम होती जाती है क्योंकि स्नायु तंत्र अपने आसपास की सबसे तीव्र ध्वनि को ही सबसे तेजी से पकड़ता है. इसलिए घंटा और अन्य ध्वनियां की जाती हैं.कर्पूर या घी से आरती के पीछे है बड़ा कारणः

कर्पूर के आरती में प्रयोग के पीछे वैज्ञानिक कारण हैं. इसके माइक्रो सैल्युलोज जब वाष्पित होते हैं तो उससे जो गंध निकलती है वह शक्तिशाली जीवाणुनाशक होती है. आपने अनुभव किया होगा कि यदि सीलन लगे घर में कर्पूर जलाकर रख दिया जाए तो वहां तुरंत सांस लेने की सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं. पूजा पाठ के दौरान पानी, अक्षत, गुड़, दूध, दही और ऐसी बहुत सी वस्तुओं का प्रयोग होता है. कई बार आपस में एक दूसरे से विमेल होते हैं. अर्थात उनके मिलने से जहर बन सकता है. इसलिए पूजा के आखिर में कपूर की आरती कर देने से कोई भी विषैला पदार्थ यदि बना हो वह नष्ट हो जाता है. सोचिए कितनी वैज्ञानिकता के साथ रचा गया है आरती का विधान.

कपूर के समान ही कुछ हद तक गुण गाय के घी में होता है. कर्पूर का फायदा यह है कि उसकी गंध तेजी से फैलती है इसलिए उसका असर ज्यादा है. इसलिए घी की आरती में भी एक टुकड़ा कपूर आखिर में रख ही दिया जाता है. आपको आरती के पीछे का यह वैज्ञानिक कारण जानकर गर्व हुआ होगा.बत्तियों की संख्याः

मंदिरों में होने वाली आरती में पांच, सात या ग्यारह बत्ती वाला दीपक प्रज्वल्लित किया जाता है. घर पर एक बत्ती वाले दीपक से आरती की जाती है. यदि घर में भी एक से अधिक बत्ती वाले दीपक से करना चाहते हों तो विषम संख्या में बत्ती होनी चाहिए. तीन, नौ एवं तेरह बत्ती वर्जित है. पांच, सात, ग्यारह एवं इक्कीस की संख्या में बत्तियां शुभ मानी जाती हैं.

पांच बत्तियों वाले दीपक को पंच प्रदीप कहते हैं. इसके पीछे भाव यह होता है कि हे भगवान हम पंच-प्राणों के साथ आपकी आरती उतार रहे हैं. घी की ज्योति को आत्मा की ज्योति का प्रतीक मानना चाहिए. शरीर पंचभूतों से बना है. पांचो बातियां उन पंच भूतों का प्रतिनिधित्व करती हैं. उन्हें पुष्ट करती हैं.प्रतिदिन कितनी बार करें आरतीः

आरती प्रतिदिन में एक से पांच बार की जा सकती है. घरों में आरती दो बार प्रातःकालीन और संध्याकाल में करनी चाहिए. मंदिरों में पांच बार तक आरती की जाती है.

सर्वश्रेष्ठ हिंदू ऐप्प प्रभु शरणम् धर्मप्रचार के लिए बना है, एकदम फ्री है.
Android मोबाइल ऐप्प डाउनलोड करने के लिए यहां पर क्लिक करें

 

दीपक के अतिरिक्त इन वस्तुओं से भी होती है आरतीः

आरती से पहले भगवान को नमस्कार करते हुए तीन बार फूल अर्पित करना चाहिए. आरती केवल धूप-दीप से नहीं होती. पदम पुराण में कहा गया है कि विशेष पूजन में आरती पांच चीजों से की जा सकती है. पहली धूप से, दूसरी दीप से, तीसरी धुले हुए वस्त्र से, कर्पूर से, पांचवी आरती जल से.आरती की थाल घुमाने का सही क्रम क्या है?

आरती को अपने बांई ओर से शुरू करके दाईं ओर ले जाना चाहिए. यानी घड़ी की सूई की दिशा में घुमाना चाहिए. इस क्रम को सात बार करना चाहिए.

सबसे पहले भगवान की मूर्ति के चरणों में चार बार आरती दिखानी चाहिए. फिर नाभि प्रदेश में दो बार आरती दिखाएं. मुखमंडल में एक बार घुमाना चाहिए. इसके बाद देवमूर्ति के सामने ऊपर से नीचे तक आरती को सात बार गोलाकार घुमाते हुए समस्त अंगों को दिखाना चाहिए.

आरती संपन्न होने के बाद थाल के चारों ओर जल जरूर घुमाया जाना चाहिए. इससे आरती शांत की जाती है.

भगवान की आरती के बाद चंवर डोलाने के पीछे भाव मुख्य कारण है. हे प्रभु यदि भूल से मैंने आरती की लौ आपके बहुत समीप कर दिया हो जिससे आपको जलन हुई हो तो उसे पंखा फेरकर शांत कर रहा हूं.

शास्त्रों में हर देवता के समक्ष घुमाई जाने वाली आरती के संबंध में कुछ विधान कहे  गए हैं जिनका पालन होना चाहिए.किस देवता को दिखाएं कितनी बार आरती, जानिए अगले पेज पर…धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-
किस देवता की होती है कितनी आरतीः

भगवान के सामने आरती इस प्रकार से घुमाते हुए करें कि ऊँ की आकृति बने. भिन्न-भिन्न देवी-देवताओं के सामने दीपक घुमाने की संख्या अलग बताई गई है. संख्या में अंतर के पीछे कुछ कारण भी कहे गए हैं.

देवताओं के समक्ष की जाने वाली आरती की संख्या में अंतर का सबसे बड़ा कारणहै उस देवता के प्रिय अक्षर. जिस देव का संबंध जितने अक्षरों से होता है उनको उतनी आरती दिखानी चाहिए-

  • नारायण का संबंध द्वादश अक्षर यानी 12 से है. नारायण का महामंत्र “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय: द्वादश अक्षरी है. इसलिए भगवान विष्णु के समक्ष बारह बार आरती दिखानी चाहिए.
  • भगवान शिव तीन नेत्रों वाले और पांचमुख वाले हैं. शिव परिवार जो मंदिर के गर्भविराजता है उसमें शिवजी के साथ जगदंबा, दोनों पुत्र और नंदीश्वर अवश्य विराजते हैं. अतः शिवजी को पांच बार आरती दिखानी चाहिए.
  • भगवान सूर्य को सात बार आरती दिखानी चाहिए. सूर्य सात रश्मियों से युक्त हैं. उनके रथ में सात दिव्य अश्व जुते हैं इसलिए सात उनकी प्रधान संख्या है. अत सूर्यनारायण की आरती करते समय सात बार घुमाएं.
  • मां दुर्गा का अक्षर नौ बताया गया है. मां के नौ स्वरूप नवदुर्गा हैं. माता का नवार्ण मंत्र महामंत्र है. अतः जगदंबा को नौ बार आरती दिखानी चाहिए.
  • गणेशजी चतुर्थी तिथि के अधिष्ठाता और स्वामी हैं. संख्या चार गणेशजी के आधिपत्य में है. चतुर्थी उनकी तिथी है अतः गणेशजी चार बार आरती अवश्य दिखानी चाहिए. इससे ज्यादा हो सकती है कम नहीं.
  • अन्य सभी देवताओं को आरती कम से कम सात बार अवश्य दिखा देनी चाहिए.

आपको यह पोस्ट कैसी लगी, अपने विचार लिखिएगा. प्रभु शरणम् ऐप्प में ऐसे उपयोगी पोस्ट बहुत मिल जाएंगे. छोटा सा ऐप्प है. करीब पांच लाख लोग उसका प्रयोग करके प्रसन्न हैं. आप भी ट्राई करके देखिए. अच्छा न लगे तो डिलिट कर दीजिएगा.

हिंदू धर्म से जुड़ी शास्त्र आधारित ज्ञान के लिए प्रभु शरणम् से जुड़ें. सर्वश्रेष्ठ हिंदू ऐप्प प्रभु शरणम् फ्री है. तकनीक के प्रयोग से सनातन धर्म के अनमोल ज्ञान को प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से इसे बनाया गया है. आप इसका लाभ लें. स्वयं भी जुड़े और सभी को जुड़ने के लिए प्रेरित करें. धर्म का प्रचार सबसे बड़ा धर्मकार्य है
Android मोबाइल ऐप्प डाउनलोड करने के लिए यहां पर क्लिक करें

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर 9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से SAVE कर लें। फिर SEND लिखकर हमें उस नंबर पर WhatsApp कर दें. जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना WhatsApp से मिलने लगेगी. यदि नंबर सेव नहीं करेंगे तो तकनीकि कारणों से पोस्ट नहीं पहुँच सकेंगे.

धार्मिक अभियान प्रभु शरणम् के बारे में दो शब्दः 

सनातन धर्म के गूढ़ रहस्य, हिंदूग्रथों की महिमा कथाओं ,उन कथाओं के पीछे के ज्ञान-विज्ञान से हर हिंदू को परिचित कराने के लिए प्रभु शरणम् मिशन कृतसंकल्प है. देव डराते नहीं. धर्म डरने की चीज नहीं हृदय से ग्रहण करने के लिए है. तकनीक से सहारे सनातन धर्म के ज्ञान के देश-विदेश के हर कोने में प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से प्रभु शरणम् मिशन की शुरुआत की गई थी. इससे देश-दुनिया के कई लाख लोग जुड़े और लाभ उठा रहे हैं. आप स्वयं परखकर देखें. आइए साथ-साथ चलें; प्रभु शरणम्!

इस लाइऩ के नीचे फेसबुक पेज का लिंक है. इसे लाइक कर लें ताकि आपको पोस्ट मिलती रहे. धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-

हम ऐसी कहानियां देते रहते हैं. Facebook Page Like करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा: Please Like Prabhu Sharnam Facebook Page

धार्मिक चर्चा करने व भाग लेने के लिए कृपया प्रभु शरणम् Facebook Group Join करिए: Please Join Prabhu Sharnam Facebook Group

 

error: Content is protected !!