गणेश चतुर्थी क्यों है कलंक चतु्र्थी, कलंक से कैसे हो मुक्ति?
भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की गणेश चतुर्थी को कलंक चतुर्थी कहा जाता है. कलंक चतुर्थी को चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए अन्यथा चोरी का झूठा कलंक लगता है. 2 सितंबर 2019 को है कलंक चतुर्थी. क्यों कहते हैं इसे कलंक चतुर्थी, कैसे बचें यदि अंजाने में हो जाए भूल.
धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-
प्रभु शरणं के नए पोस्ट की सूचना अपने मोबाइल पर पानाचाहते हैं तो कृपया वेबसाइट को सब्सक्राइव कर लें. इसके लिए आपको बस इतना करना है – आप वेवसाइट खुलने पर आपको एक घंटी बनी दिखती होगी. आप उस घंटी को बस क्लिक कर दें. आपको हर पोस्ट की सूचना सबसे पहले मिलने लगेगी.
भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी जिसे गणेश चतुर्थी कहा जाता है. उस दिन चंद्रमा को बिल्कुल नहीं देखना चाहिए. चंद्रदर्शन से चोरी का झूठा कलंक लगता है. इसलिए इसे कलंक चतुर्थी भी कहते हैं. भगवान श्रीकृष्ण ने भी भूले से कलंक चतुर्थी को चंद्रमा के दर्शन कर लिए थे इस कारण उन पर भी लगा था आरोप. यदि भूले से भी हुए हों चंद्रदर्शन तो उसकी मुक्ति के उपाय कर लेने चाहिए. मुक्ति के बड़े सरल उपाय है. मुश्किल से 5 मिनट भी नहीं लगता.
इस पोस्ट में आप जानेंगे-
- भाद्रपद की गणेश चतुर्थी को कलंक चतुर्थी क्यों कहते हैं?
- कलंक चतुर्थी को चंद्रदर्शन क्यों नहीं करने चाहिए
- कलंक चतुर्थी को भूल से हो जाए चंद्रदर्शन तो क्या उपाय करना चाहिए
- भगवान श्रीकृष्ण को कलंक चतुर्थी के चंद्रदर्शन से क्या आरोप लगा था
- कलंक चतुर्थी की कथा
भगवान श्रीकृष्ण पर द्वारका में स्यमंतक मणि की चोरी का आरोप लग गया. भगवान बड़ी दुविधा में थे कि आखिर उनपर यह आरोप क्यों लगा? ऐसा कौन सा पाप या अपराध उनसे हुआ है कि चोरी का झूठा आरोप लग गया. भगवान इसी सोच में थी कि तभी नारदजी वहां प्रकट हो गए.
अभिवादन के बाद नारदजी ने कहा- प्रभु आप तो अंतर्यामी हैं. आप इस दुविधा में कैसे. आप गणेशजी द्वारा चंद्रमा को दिए शाप के बारे में भूल गए थे और अंजाने में आपने चौथ के चंद्रमा के दर्शन कर लिए. चौथ का चंद्रमा तो कलंकित है. इसलिए यह कलंक तो लगना ही था. कलंक चतुर्थी के चंद्रदर्शन का यह परिणाम है मायापति.
भगवान श्रीकृष्ण ने पूछा- नारद, यह तो आपने बड़ी विचित्र बात कही. ऐसी क्या भूल हो गई थी चंद्रमा से जो उसे गणेशजी ने ऐसा शाप दे दिया. चंद्रमा तो देव हैं. देव के दर्शनमात्र से मनुष्य कलंकित हो जाए यह तो बड़ी हैरान करनी वाल बात हुई? मुझे सारी कथा विस्तार से कहो.नारदजी ने कथा सुनानी शुरू की. हे केशव एक बार ब्रह्माजी ने गणेशजी को प्रसन्न करने के लिए चतुर्थी का व्रत रखा. गणेशजी प्रसन्न होकर प्रकट हुए और ब्रह्मदेव से पूछा कि आप किस अभीष्ट की कामना से यह व्रत कर रहे हैं. मैं आपसे प्रसन्न हूं. आप अपना अभीष्ट कहें मैं उसे पूरा करूंगा.
गणेश जी द्वारा वरदान मांगने को कहे जाने पर संतुष्ट ब्रह्माजी ने मांगा- हे गणपति आप लोभ, मोह, मद अहंकार आदि का नाश करने वाले हैं. मुझे अपनी रची सृष्टि का मोह न हो, मुझे यही वर की अभिलाषा है. कृपया यह वरदान प्रदान करें.
गणेशजी ने ब्रह्माजी को उनका इच्छित वर दे दिया और वहां से चले. गणेशजी का शरीर भारी-भरकम है. लंबा पेट है और मुख के स्थान पर हाथी का मस्तक. जबकि चतुर्थी के दिन चंद्रमा सबसे ज्यादा सुंदर रूप में होते हैं. उस दिन वह पूरे शृंगार के साथ प्रकट हुए थे.
गणेशजी कुछ विचारते हुए चले जा रहे थे तभी दैवयोग से कुछ अनहोनी हो गई.गणेशजी की चाल दैवयोग से लड़खड़ा गई. वह गिरते-गिरते बचे. इसे देखकर चंद्रमा की हंसी छूट गई. उन्होंने गजानन का तिरस्कार कर दिया. चंद्रमा द्वारा किए उपहास से गणेशजी क्रोध में तमतमाने लगे.
क्रोधित गणेशजी ने चंद्रमा को शाप दे दिया- रूप के गर्व में फूले चंद्रमा तुमने मेरी काया का तिस्कार किया है. तुम्हें अपनी सुंदरता का मिथ्याअभिमान हो गया है. जिस रूप के गर्व में मतवाले हो रहे हो वह अब किसी को प्रिय नहीं होगा. मैं तुम्हें शाप देता हूं आज से कोई तुम्हारा मुख तक नहीं देखना चाहेगा. देव हो या मानव कोई भी चंद्रदर्शन नहीं करेगा.गणेशजी द्वारा मिले शाप के बाद चंद्रमा का तत्काल क्षय होने लगा. उनकी सुंदर काया तत्काल अत्यंत डरावनी हो गई. शाप से पीड़ित चंद्रमा को मानसरोवर में जाकर छिपना पड़ा. चंद्रमा विलुप्त हो गए.
चंद्रमा के विलुप्त हो जाने से ऋतुओं के परिवर्तन में बाधा होने लगी. इससे प्राणियों को बड़ा कष्ट होने लगा. सभी ने ब्रह्माजी से इस संकट से उबारने की गुहार लगाई.
ब्रह्माजी ने बताया कि यह सब गणेशजी के शाप के कारण हो रहा है. चंद्रमा ने अपनी मूर्खता में गणेशजी का अपमान कर दिया है. हम सबको मिलकर गणेशजी को प्रसन्न करने का प्रयास करना होगा. ब्रह्माजी के आदेश पर सभी देवताओं ने गणेशजी का व्रत किया और उनकी विविध प्रकार से स्तुति की.
देवताओं की व्रत-पूजा से गणेशजी प्रसन्न होकर वहां प्रकट हो गए.
करीब पांच लाख लोग अपनी नित्यपूजा प्रभु शरणम् ऐप्प की सहायता से करते हैं. आप भी जुड़कर लाभ लें. सर्वश्रेष्ठ हिंदू ऐप्प प्रभु शरणम् फ्री है तो फिर क्यों चूक रहे हैं.
Android मोबाइल ऐप्प डाउनलोड करने के लिए यहां पर क्लिक करें
गणेशजी ने कहा- देवताओं मैं आपसे प्रसन्न हूं. मैं आपके लिए क्या करूं जो आपको प्रियकर हो. आप जो भी चाहें मुझसे मांग लें.
देवताओं ने कहा- आप तो सर्वज्ञ हैं. हमारी इस स्तुति का अभिप्राय भी जानते हैं. हे प्रभु आप चंद्रमा को क्षमा कर दें. आपसे शापित होने के कारण वह लुप्त हैं इससे प्राणियों को बड़ा कष्ट हो रहा है. जगतकल्याण के लिए आप चंद्रमा को शापमुक्त कर दें.
गणेशजी ने कहा- मैं अपने शाप को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकता क्योंकि चंद्रमा को उसका दंड मिलना ही चाहिए. फिर भी आप सबकी प्रसन्नता के लिए मैं शाप में एक संशोधन करता हूं जिससे चंद्रमा को दंड़ भी मिल जाएगा और आपकी मनोकामना भी पूरी हो जाएगी.गणेशजी ने शाप में संशोधन करते हुए कहा- मैं चंद्रमा को पूरे वर्ष शाप से मुक्त करता हूं. किंतु चंद्रमा को अपनी भूल का स्मरण होता रहे इसके लिए भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा का मुख देखना अशुभ माना जाएगा. जो भी व्यक्ति अथवा देवगण इस दिन चंद्रमा के दर्शन करेगा, उस पर चोरी आदि के झूठे कलंक लगेंगे. सामाजिक रूप से उसकी प्रतिष्ठा की बड़ी हानि होगी. उस दिन लोग चंद्रमा का तिरस्कार करेंगे.
शाप में यह संशोधन होने से चंद्रमा को बहुत सुकून मिला. शाप स्वीकार करने के बाद चंद्रमा ने गणेशजी की स्तुति आरंभ कर दी. वह नियमित रूप से गणेश स्तुति करते रहे. लंबे समय तो उनके तप से गणेशजी चंद्रमा पर प्रसन्न हो गए.
गजानन गणेशजी प्रसन्न होकर बोले- चंद्रमा मैं तुम्हारी स्तुति से प्रसन्न हूं और तुम्हारी मूर्खता को क्षमा कर चुका हूं. तुम्हारे शाप में संशोधन भी कर चुका हूं परंतु मैंने पहले भी कहा है कि तुम्हें शापमुक्त नहीं कर सकता. इसके अतिरिक्त बताओ तुम्हारी प्रसन्नता के लिए मैं क्या करूं. जो इच्छित हो वह वरदान मांग लो.चंद्रमा ने विनीत भाव से कहा- प्रभु आपने जो दंड दिया है मैं उसके योग्य ही हूं. आपकी अनुकंपा है कि आपने क्षमा कर दिया. मुझ पर प्रसन्न हैं तो एक कृपा करें. यदि कोई अज्ञानतावश चतुर्थी के दिन मेरे दर्शन भूल से कर ले तो उसकी मुक्ति का कोई उपाय बताएं. भूल से होने वाले अपराध की क्षमा का तो विधान है. मैं बस उसी विधान का पालन करने की विनती कर रहा हूं.
गणेशजी का क्रोध शांत हो चुका था.
वह चंद्रमा की चतुराई पर हंसते हुए बोले- चंद्रदेव आप बड़े चतुर हैं. आपकी इस चतुराई पर भी मैं प्रसन्न हूं. अप्रत्यक्ष रूप से आप इस शाप से मुक्ति ही चाहते हैं. मैंने तो निर्णय किया था कि आपको पूरी तरह से शापमुक्त नहीं करूंगा पर आपकी चतुराई से प्रसन्न होकर मैं भूल से हुए चंद्रदर्शन दोष से मुक्ति का मार्ग बताता हूं.गणेशजी बोले- जो मनुष्य प्रत्येक द्वितीया को तुम्हारे दर्शन करता रहेगा, वह इस लांछन से बच जाएगा. उसे इस शाप का प्रभाव न होगा. इस चतुर्थी तिथि को मैं अपना प्रिय दिन स्वीकारता हूं. चतुर्थी तिथि ही मेरी तिथि होगी. इस दिन सिद्धि विनायक व्रत करने से सारे दोष छूट जाएंगें.
इतनी कथा सुनाकर नारदजी श्रीकृष्ण से बोले- हे नाथ! इस प्रकार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा का दर्शन करने से आपको यह कलंक लगा है. आप भी गणेश चतुर्थी का व्रत करें तो यह दोष मिट जाएगा.
तब श्रीकृष्ण ने भी कलंक से मुक्त के लिए चतुर्थी का व्रत किया.भगवान श्रीगणेश वहां प्रकट हुए और बोले- आप पर सत्राजित ने जो आरोप लगाया वह चंद्रदर्शन के दोष के कारण था पर आप उससे मुक्त हैं. आपने यह शाप स्वीकार करके मुझे बहुत प्रसन्न किया है. अतः भूल से यदि कोई भाद्रपद की चतुर्थी के चंद्रमा का दर्शन कर लेगा तो उसकी मुक्ति एक रास्ता और बनाता हूं.
कलंक चतुर्थी को भूल से चंद्रमा के दर्शन करने वाला यदि आप पर स्यमंतक मणि की चोरी के आरोप लगने और फिर आरोप से मुक्ति की कथा यदि सुन ले तो वह उस दोष से मुक्त हो जाएगा.
यह वरदान देकर श्रीगणेशजी अंतर्धान हो गए. कलंक चतुर्थी के चंद्रदर्शन के दोष से मुक्ति के दो सरल उपाय कहे गए हैं. उसे कर लेना चाहिए अन्यथा चोरी का आरोप लगता ही है.
यदि आपने भूलवश आज चंद्रमा के दर्शन कर लिए हैं तो उपाय जरूर करें-
- पहला, स्यमंतक मणि की कथा सुनें.
- दूसरा उपाय है भगवान श्रीगणेश और श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए ब्रह्मवैवर्त पुराण में वर्णित निम्न मंत्र को तीन बार पढ़कर क्षमा मांग लें.
सिंहः प्रसेनमवधीतं सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः।।
(अर्थः सुंदर सलोने कुमार! इस मणि के लिए सिंह ने प्रसेन को मारा है और जाम्बवान ने उस सिंह का संहार किया है. अतः तुम रोओ मत. अब इस स्यमन्तक मणि पर तुम्हारा ही अधिकार होगा.)
इस मंत्र का संस्कृत या हिंदी पाठ करने के बाद स्यमंतक मणि की चोरी और भगवान की आरोप मुक्ति की कथा अवश्य पढ़ लेनी चाहिए. प्रतय्क्ष दर्शन न भी हुए हों तो कई बार छाया दर्शन या शीशे आदि में भूल से दर्शन हो ही जाता है. इसलिए बेहतर है कि कलंक चतुर्थी की शाम को आपने चंद्रदर्शन किया हो या न किया हो पर ऊपर बताए छोटे से मंत्र का पाठ कर लें और स्यमंतक की कथा पढ़ लें. मुश्किल से 4 या 5 मिनट लगेंगे.आज से पूरे गणपति उत्सव तक हम आपको भगवान श्रीगणेश की कथाएं, विभिन्न प्रभावशाली मंत्रों के बारे में प्रतिदिन कुछ बहुत उपयोगी जानकारियां देंगे. गणेशजी की स्थापना के मंत्र और विधि से भी आज परिचित कराएंगे. गणपति की ये कथाएं ऐसी हैं जो आपने न सुनी होंगी. आपको नई बात जानने को मिलेगी.
जैसे क्या पार्वतीपुत्र ही गणेश हैं या गौरीपुत्र गणेश का कोई और रहस्य है. यदि पार्वतीपुत्र ही गणेश होते तो फिर शिव-पार्वती विवाह में गणपति की पूजा कैसे होती? सोचिए. स्वयं ब्रह्माजी ने शिव-पार्वती के विवाह से पहले गणेश पूजन कराया था. यानी आप जो जानते हैं वह बात ही पूरी नहीं. रहस्य कुछ और भी है.
यह सब आप जानना चाहेंगे? तो तत्काल प्रभु शरणम् ऐप्प डाउनलोड कर लीजिए. गणपति उत्सव के दौरान आपको अद्भुत गणपति रहस्यों से परिचित कराएंगे. नीचे लिंक है.
हिंदू धर्म से जुड़ी सभी शास्त्र आधारित जानकारियों के लिए प्रभु शरणम् से जुड़ें. सर्वश्रेष्ठ हिंदू ऐप्प प्रभु शरणम् फ्री है.
Android मोबाइल ऐप्प डाउनलोड करने के लिए यहां पर क्लिक करें
आपको यह पोस्ट कैसी लगी, अपने विचार लिखिएगा. प्रभु शरणम् ऐप्प में ऐसे उपयोगी पोस्ट बहुत मिल जाएंगे. छोटा सा ऐप्प है. करीब पांच लाख लोग उसका प्रयोग करके प्रसन्न हैं. आप भी ट्राई करके देखिए. अच्छा न लगे तो डिलिट कर दीजिएगा.प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना पाना चाहते हैं तो Prabhu Sharnam को सब्सक्राइव कर लें. इसके लिए आपको इतना भर करना है कि इस वेबसाइट पर आने के बाद आपको एक घंटी बनी दिखती होगी. उसे क्लिक करके हां पर क्लिक कर दें. कोई भी नया धार्मिक पोस्ट आएगा तो उसकी सूचना सबसे पहले आप तक पहुंचेगी.
धार्मिक अभियान प्रभु शरणम् के बारे में दो शब्दः
सनातन धर्म के गूढ़ रहस्य, हिंदूग्रथों की महिमा कथाओं ,उन कथाओं के पीछे के ज्ञान-विज्ञान से हर हिंदू को परिचित कराने के लिए प्रभु शरणम् मिशन कृतसंकल्प है. देव डराते नहीं. धर्म डरने की चीज नहीं हृदय से ग्रहण करने के लिए है. तकनीक से सहारे सनातन धर्म के ज्ञान के देश-विदेश के हर कोने में प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से प्रभु शरणम् मिशन की शुरुआत की गई थी. इससे देश-दुनिया के कई लाख लोग जुड़े और लाभ उठा रहे हैं. आप स्वयं परखकर देखें. आइए साथ-साथ चलें; प्रभु शरणम्!
इस लाइऩ के नीचे फेसबुक पेज का लिंक है. इसे लाइक कर लें ताकि आपको पोस्ट मिलती रहे. धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-
हम ऐसी कहानियां देते रहते हैं. Facebook Page Like करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा: Please Like Prabhu Sharnam Facebook Page
धार्मिक चर्चा करने व भाग लेने के लिए कृपया प्रभु शरणम् Facebook Group Join करिए: Please Join Prabhu Sharnam Facebook Group
