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पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय कैसे बना सबसे प्रभावशाली शिवमंत्र

पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय कैसे बना सबसे प्रभावशाली शिवमंत्र

पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय कैसे बना सबसे शक्तिशाली शिवमंत्र, मंत्र की महिमा और परिचय

“ॐ नम: शिवाय”—इस महामंत्र से संसार में भला कौन परिचित होगा। सनातन धर्म में इसे पंचाक्षर मंत्र के नाम से जाना जाता है। वैसे तो मूल पंचाक्षर मंत्र केवल ‘नमः शिवाय’ है, लेकिन इसके आगे प्रणव “ऊँ” का संपुट जोड़कर जब इसका जप किया जाता है, तब यह षडाक्षर (छह अक्षरों वाला) बनकर पूर्ण फलदायी हो जाता है।

यही कारण है कि इसे पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय रूप में ही सबसे अधिक जपते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह महामंत्र सबसे पहले कैसे प्रकट हुआ?

पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय की जप एवं सिद्धि की विधि
पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय का जप करती माता पार्वती

इस लेख में क्या-क्या जानेंगे?

  • पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय की उत्पत्ति
  • पंचाक्षर और षडक्षर मंत्र के बीच का रहस्य और अंतर
  • शिव महापुराण और लिंग महापुराण में पंचाक्षर मंत्र के अनछुए रहस्य
  • पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय के पांचों अक्षरों के अर्थ
  • ऊँ नमः शिवाय महामंत्र को सिद्ध कैसे करें
  • जप के अचूक विधान, माला के नियम
  • ऊँ नमः शिवाय का महिलाओं द्वारा जप संबंधी जानकारी
  • पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय के जप के लिए दीक्षा जरूरी है?

पंचाक्षरी मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई? (रहस्य जो बहुत कम लोग जानते हैं)

शिव पुराण और वेदों के अनुसार पंचाक्षर मंत्र का प्राकट्य

शिव महापुराण और लिंग महापुराण के अनुसार, इस मंत्र की उत्पत्ति साधारण नहीं है। जब प्रलय काल आता है, तब समस्त चराचर जगत, देवता, असुर और राक्षस नष्ट हो जाते हैं। प्रकृति में सब कुछ लीन हो जाता है, तब एकमात्र शिव शेष रहते हैं। उस समय सभी वेदों और शास्त्रों के सार को महादेव इसी पंचाक्षर मंत्र में सुरक्षित रखते हैं।

सृष्टि के आरंभ में भगवान शिव के पांच मुखों से निकले पवित्र अक्षर

सृष्टि के विस्तार के समय जब ब्रह्माजी के मानस पुत्रों को सहायता की आवश्यकता पड़ी, तब महादेव के पांच मुखों (सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष, और ईशान) से पांच पवित्र अक्षर—न, म, शि, वा, य—प्रकट हुए।

ब्रह्माजी ने इन्हें ग्रहण किया और अपने पुत्रों को इसका उपदेश दिया। इसी पंचाक्षर के प्रभाव से वे सब तत्काल शिवजी को जानने में सक्षम हुए और उन्हें अणिमा आदि आठ सिद्धियाँ प्राप्त हुईं।

ब्रह्मांड के पांच तत्वों से जुड़ाव

यह पांचों अक्षर प्रकृति के पांच मूल तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं:

  • – पृथ्वी तत्व

  • – जल तत्व

  • शि – अग्नि तत्व

  • वा – वायु तत्व

  • – आकाश तत्व

संपूर्ण मंत्र ऊँ नमः शिवाय का अर्थ क्या है?

इस संपूर्ण महामंत्र का सरल शब्दों में अर्थ है— “मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ।” यहाँ शिव का अर्थ केवल एक पौराणिक देवता से नहीं, बल्कि उस परम चेतना (कल्याणकारी शक्ति) से है जो हर कण में व्याप्त है।

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पंचाक्षर मंत्र के जप के संपूर्ण विधान और नियम

शिवमहापुराण में स्पष्ट कहा गया है कि करोड़ों मंत्रों के होने पर भी भगवान शिव द्वारा दिए गए इस पंचाक्षर मंत्र के बराबर दूसरा कोई मंत्र नहीं है। जो व्यक्ति विधि-विधान से इस मंत्र का जप कर लेता है, वह समस्त पापकर्मों से मुक्त हो जाता है।

जप का स्थान और उसका फल

  • घर में जप: सामान्य फल दायक होता है।

  • गोशाला में जप: घर से सौ गुना अधिक फलदायक।

  • नदी के तट पर जप: इसका पुण्य लाख गुना माना गया है।

  • देवालय या मंदिर में जप: इसका फल अनंत गुना होता है।

  • अन्य पवित्र स्थान: समुद्र तट, देव सरोवर, पर्वत या पवित्र आश्रमों में किया गया जप करोड़ गुना फलदायक होता है।


ओम नमः शिवाय जप के तीन प्रकार: वाचिक, उपांशु और मानस जप यज्ञ

शास्त्रों में पंचाक्षर मंत्र के जप को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जिनका साधक के लिए अलग-अलग महत्व है:

  1. वाचिक जप: इस विधि में मंत्र का उच्चारण बोलकर किया जाता है, ताकि आसपास ध्वनि गूंजे। शुरुआती साधकों के लिए यह उत्तम है।

  2. उपांशु जप: इसमें होंठ हिलते हैं और जीभ हल्की सुगबुगाहट करती है, पर आवाज केवल खुद को सुनाई देती है। इसका फल वाचिक से अधिक है।

  3. मानस जप (मानसिक जप): यह जप सबसे श्रेष्ठ और उच्च कोटि का माना जाता है। इसमें न तो आवाज होती है और न ही होंठ हिलते हैं। भक्त मन ही मन एकाग्र होकर श्वास-प्रश्वास के साथ ‘ॐ नमः शिवाय’ का ध्यान करता है।

पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय- नारद ने बताया था पार्वती को शिव प्राप्ति का यह मंत्र
पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय- पार्वती जी ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए जपा था

 

पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय को सिद्ध कैसे करें?

‘ॐ नमः शिवाय’ केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि भगवान शिव का साक्षात् पंचाक्षर स्वरूप माना गया है। इस मंत्र का नियमित जप स्वयं में अत्यंत पुण्यदायी है, किंतु जब कोई साधक इसे मंत्र-सिद्धि के उद्देश्य से करता है तो उसे सामान्य जप की अपेक्षा अधिक अनुशासन, संयम और नियमों का पालन करना पड़ता है।

विभिन्न शैव परंपराओं में मंत्र-सिद्धि की विधियां अलग-अलग बताई गई हैं। अनेक साधना-पद्धतियों में किसी शुभ मुहूर्त, विशेषकर सोमवार, मासिक शिवरात्रि या महाशिवरात्रि से साधना प्रारंभ करने का विधान माना जाता है। साधक भगवान शिव को साक्षी मानकर अथवा गुरु से दीक्षा प्राप्त करके निश्चित अवधि तक नियमित जप का संकल्प लेता है।

आपको पुनः स्मरण कराते चलें कि शिव जी की उपासना कर्मकांडों से मुक्त है। उनके सबसे प्रभावशाली पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय का जप बिना सिद्ध किए भी करें तो भी लाभ होता है। किसी भी मंत्र को योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही सिद्ध करना चाहिए।

सिद्धि के लिए कितनी संख्या में मंत्र का जप करना चाहिए

कुछ परंपराओं में 41 दिनों के भीतर पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय के कुल 5 लाख मंत्र-जप का विधान बताया गया है।

इसके अनुसार साधक प्रतिदिन निश्चित संख्या में रुद्राक्ष की माला से ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करता है। जप के समय स्थान, आसन और समय यथासंभव एक ही रखना श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि इससे मन की एकाग्रता बढ़ती है और साधना में स्थिरता आती है।

प्रतिदिन जप से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना, भगवान शिव का ध्यान करना तथा शिवलिंग का जलाभिषेक करना भी साधना का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। श्रद्धा के अनुसार बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प या सफेद पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं। जप के लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग विशेष फलदायी माना गया है।

सावधानियांः

फिर से बता दें, किसी भी मंत्र को एक योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही सिद्ध करना चाहिए। पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय की सिद्धि के दौरान साधना-काल में सात्विक आहार, सत्य का पालन, इंद्रिय-संयम, क्रोध और कटु वाणी से बचना तथा यथासंभव ब्रह्मचर्य का पालन करने की भी सलाह दी जाती है।

मंत्र-साधना केवल शब्दों की पुनरावृत्ति नहीं है, बल्कि जीवन को भी उसी पवित्रता के अनुरूप ढालने का प्रयास है।

आहुति विधानः

कई साधना-परंपराओं में निर्धारित जप पूर्ण होने के बाद उसके दशांश के बराबर आहुतियों से हवन करने का विधान भी बताया गया है। यह साधना की पूर्णाहुति मानी जाती है। यदि किसी साधक के लिए इतना विस्तृत अनुष्ठान संभव न हो तो वह अपनी सामर्थ्य के अनुसार विद्वान आचार्य के मार्गदर्शन में इसका आयोजन कर सकता है।

अंततः यह स्मरण रखना चाहिए कि मंत्र की वास्तविक सिद्धि केवल संख्या पूरी करने से नहीं होती। जब श्रद्धा, नियम, शुद्ध आचरण और भगवान शिव की कृपा एक साथ मिलते हैं, तभी पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय साधक के जीवन में अपना दिव्य प्रभाव प्रकट करता है। ऐसे साधक को मानसिक शांति, आत्मबल, आध्यात्मिक उन्नति और शिवकृपा का अनुभव होने लगता है।

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ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जाप करने से क्या होता है? (चमत्कार और लाभ)

मानसिक शांति और चक्रों का संतुलन

नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करने से शरीर के सातों चक्र संतुलित होने लगते हैं। मन की चंचलता समाप्त होती है और गहरी मानसिक शांति की अनुभूति होती है।

ऊँ नमः शिवाय मंत्र के क्या चमत्कार हैं? (संकटों से रक्षा)

शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति सच्चे भाव से इस मंत्र को अपने जीवन का आधार बना लेता है, उसे अकाल मृत्यु या अमंगल का भय नहीं रहता। यह मंत्र व्यक्ति के जीवन में आने वाले बड़े से बड़े संकटों को टालने की क्षमता रखता है।

आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष का मार्ग

यह महामंत्र मनुष्य को सांसारिक मोह-माया के बंधनों से मुक्त करते हुए अंततः मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है।

पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय- क्यों माना जाता है शिव जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र
पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय- शिव जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र

जप की माला और मनकों के प्रकार का रहस्य

माता पार्वती के पूछने पर महादेव ने बताया कि अलग-अलग कामनाओं के लिए अलग-अलग मनकों की माला का उपयोग किया जाता है:

  • 25 मनकों की माला: मोक्ष प्राप्ति के लिए।

  • 27 मणियों की माला: पुष्टि के लिए।

  • 30 मनकों की माला: धन संपदा की प्राप्ति के लिए।

  • 50 मनकों की माला: अभिचार कर्म के लिए।

  • 108 मनकों की माला: सर्वफल (सभी प्रकार की मनोकामनाओं) के लिए।

किस साधन से पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय के जप पर कैसा फल होगा?

पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय की गणना में साधक द्वारा प्रयोग किए जाने वाले विभिन्न साधनों के भी अलग-अलग फल बताए गए हैं। जानते हैं किस साधन से जप का कितना फल मिलता हैः

  • उंगलियों पर गणना करने से सामान्य फल मिलता है,

  • शंखमणियों से सौ गुना फल मिलता है,

  • प्रवाल (मूंगा) से जप पर हजार गुना फल,

  • स्फटिक से दस हजार गुना फल,

  • मोतियों से लाख गुना फल,

  • कमल के बीज से दस लाख गुना फल, और

  • रुद्राक्ष अथवा कुशा ग्रंथि से पंचाक्षरी मंत्र का जप करने पर अनंत गुना फल प्राप्त होता है।

जप की दिशा और अंगुलियों का महत्व

  • दिशा का प्रभाव: पूर्व मुख होकर जप करने से वशीकरण, दक्षिण मुख से अभिचार, पश्चिम मुख से धन, और उत्तर मुख करके जप करने से शांति की प्राप्ति होती है।

  • अंगुलियों का प्रयोग: अंगूठा मोक्ष, तर्जनी शत्रु नाश, मध्यमा धन, अनामिका शांति, और कनिष्ठा रक्षा का प्रतीक है। मंत्र जप हमेशा अंगूठे के साथ अन्य अंगुलियों के मेल से करना चाहिए, क्योंकि बिना अंगूठे के किया गया जप निष्फल होता है।

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पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय का जप कैसे करें-पूरी विधि और नियम
पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय का जप कैसे करें-पूरी विधि और नियम

पंचाक्षर और षडक्षर मंत्र से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या महिलाएं और कोई भी गृहस्थ पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय का जाप कर सकता है?

उत्तर: हाँ, शास्त्रों के अनुसार पंचाक्षर मंत्र पर किसी एक वर्ग का अधिकार नहीं है। गृहस्थ जीवन में रहने वाले लोग, महिलाएं और हर आयु वर्ग के लोग पूरी पवित्रता और श्रद्धा के साथ इस मंत्र का नियमित जाप कर सकते हैं।

क्या बिना दीक्षा के पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय का जाप किया जा सकता है?

उत्तर: हाँ, यह एक ऐसा सार्वभौमिक और तारक मंत्र है जिसे सामान्य लोक कल्याण और मानसिक शांति के लिए बिना किसी गुरु दीक्षा के भी पूरी श्रद्धा के साथ जपा जा सकता है।

क्या सोते समय या लेटे हुए इस मंत्र का मानसिक जाप कर सकते हैं?

उत्तर: मानसिक रूप से भगवान का स्मरण या श्वास के साथ मंत्र का ध्यान किसी भी स्थिति में किया जा सकता है, लेकिन पूर्ण फल प्राप्ति के लिए स्नान आदि से निवृत्त होकर शुद्ध आसन पर बैठकर जप करना ही सर्वोत्तम माना गया है।


निष्कर्ष

पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय केवल शब्दों का एक समूह नहीं है, बल्कि यह साक्षात शिवतत्व की कुंजी है। आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में जब मन अशांत और दिशाहीन हो जाता है, तब यह महामंत्र हमारी जीवन नैया को स्थिरता और शांति प्रदान करता है। आवश्यकता है तो बस इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की, ताकि महादेव की असीम अनुकंपा सदा हम पर बनी रहे।

आइए, आज से ही इस  पंचाक्षर महामंत्र  ऊँ नमः शिवाय को अपने जीवन का आधार बनाएं और शिवमय हो जाएं—हर हर महादेव!

संकलन व संपादन:
राजन प्रकाश

( डिस्कलेमरः पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय की यह पोस्ट शिव महापुराण, लिंग महापुराण और अन्य ग्रंथों में वर्णित सामग्री के आधार पर धर्मशास्त्र के जानकारों के साथ परामर्श के बाद तैयार की गई है। इस पोस्ट का उद्देश्य सिर्फ एक प्रचलित जानकारियां देना है। इसका उद्देश्य कोई गलत जानकारी देना या अंधविश्वास फैलाना नहीं हैं।)

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