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बर्बरीक ने बताई थी भीम को नीति की बातें- स्कंदपुराण में वर्णित भीम-बर्बरीक युद्ध प्रसंग

बर्बरीक ने बताई थी भीम को नीति की बातें- स्कंदपुराण में वर्णित भीम-बर्बरीक युद्ध प्रसंग

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अज्ञातवास झेल रहे पांडव एक दिन चंडिका देवी के दर्शन को चंडिका स्थान पहुंचे. बहुत थके होने के कारण वे थोड़ा विश्राम करने लगे. भीमसेन को बहुत जोर की प्यास लगी थी.

उन्हें चंडी देवी का कुंड नजर आया. युधिष्ठिर ने भीम को सावधान किया कि अगर हाथ-पैर धोने हों तो कुंड से पानी निकालकर बाहर धोना अन्यथा जल दूषित करने का दोष लगेगा.

भीम प्यास से व्याकुल थे. कुंड देखकर उन्हें युधिष्ठिर की चेतावनी याद नहीं रही. कुंड में प्रवेश किया और हाथ-मुंह धोने लगे. देवी चंडिका के सेवक बर्बरीक ने उन्हें ऐसा करते देख जोरदार आवाज में टोका.

बर्बरीक ने कहा- तुम देवी के कुंड में हाथ-पैर धो रहे हो. इसी जल से मैं देवी को स्नान कराता हूं. क्या जल प्रयोग की गरिमा तुम्हें नहीं सिखाई गई? तत्काल कुंड से बाहर आओ.

भीमसेन बर्बरीक के दादा थे लेकिन दोनों का पहले कभी मेल हुआ नहीं था इसलिए दोनों एक दूसरे को पहचान नहीं पाए.भीम बोले- तुम मुझे आचार-व्यवहार सिखाने वाले कौन होते हो? जल का प्रयोग स्नान आदि के लिए मुनियों ने भी बताया है- मैं वही कर रहा हूं.

बर्बरीक क्रोधित हो गए. उन्होंने कहा- मुनियों ने बहते जल में स्नान की बात कही है. कुंड का जल स्थिर होता है. इसमें स्नान करने से यह गंदा होता है. अपनी भूल तत्काल सुधारो.

दोनों महावीरों में अप्रिय बहस होने लगी. कोई झुकने को तैयार न था. क्रोधित हो बर्बरीक ने भीम पर एक चट्टान दे मारा. भीम बर्बरीक को ललकारते हुए कुंड से बाहर आए.

दोनों बड़े वीर थे. हर युद्ध में पारंगत, इसलिए भयंकर युद्ध शुरू हुआ. भीमसेन युवा बर्बरीक के आगे कमजोर पड़ने वगे. बर्बरीक ने भीम को उठा लिया और समुद्र में फेंकने चल पड़े.

भगवान शिव ने आकाशवाणी की- पुत्र यह महान गदाधर और तुम्हारे दादा भीम हैं. पांडव धर्मयुद्ध के लिए शक्तियां अर्जित कर रहे हैं. तुम्हारी आराध्या देवी चंडिका दर्शन को आए हैं.आकाशवाणी सुनकर बर्बरीक को बड़ा पश्चाताप हुआ. वह भीम के चरणों में गिरकर माफी मांगने लगे. भीम को प्रसन्नता हुई कि उनका पौत्र इतना बलशाली है. लेकिन बर्बरीक के मन का शोक कम नहीं हो रहा था.

भीम ने कहा- श्रीकृष्ण ने हमें बताया था कि तुम इसी देवीस्थान में निवास करते हो किंतु हम यह बात भूल गए थे. मैं प्रसन्न हूं कि तुम वीर होने के साथ-साथ अत्यंत बुद्धिमान और नीतिवान भी हो.

किंतु बर्बरीक का अपने पूर्वजों को अपमानित करने का शोक समाप्त नहीं हो रहा था. प्राण त्यागने के लिए समुद्र में प्रवेश कर गए. चंडिका देवी प्रकट हुई. उन्होंने बर्बरीक को रोकते हुए कहा- स्वयं भगवान विष्णु तुमसे प्राणदान मांगकर उद्धार करने को अवतरित हुए हैं.

चंडिका देवी ने आशीर्वाद देते हुए कहा- पुत्र तुम चंडिकास्थान पर जिस कर्तव्यनिष्ठा के साथ सेवा कर रहे हो, तुम चंडील के नाम से भी प्रसिद्ध होगे और पूजनीय बनोगे.

प्रभु शरणम्

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