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खुशियों की गारंटीः क्या खोया क्या पाया इस धन से

खुशियों की गारंटीः क्या खोया क्या पाया इस धन से

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जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना whatsapp से मिलने लगेगी।धन आवश्यक है लेकिन संसार में धन ही सबकुछ नहीं है. धन के बिना हम बहुत से सुखों से बेशक वंचित रह जाते हैं लेकिन ऐसा न समझें कि धन से सारे सुख आ ही जाते हैं.

प्रकृति का नियम है जो जितनी सुविधा का कारण बनता है वह उतनी असुविधा का भी कारण भी बनता है. इसलिए संतुलन जरूरी है.

फिर ऐसा क्या किया जाए कि खुशियां आएं और फिर वे जल्दी जाएं भी नहीं, इसकी गारंटी कैसे हो. मुश्किल है पर असंभव तो नहीं. पहले एक छोटी सी कथा देखते हैं. फिर इस गारंटी की चर्चा भी करेंगे.

एक मछुआरे ने जरूरत भर मछलियां पकड़ी और तालाब के किनारे आराम करने लगा.

तभी वहां से एक अमीर आदमी गुज़रा. उसने मछुआरे को आराम से बैठे देखकर सोचा कि क्यों न इसे समय का उपयोग समझाया जाए.

उसने मछुआरे से कहा-अभी दिन आधा भी नहीं बिता और तुम आराम से बैठ चुके हो. इस तरह समय व्यर्थ क्यों कर रहे हो.

मछुआरे ने कहा कि वह आज के काम लायक मछलियां पकड़ चुका है इसलिए आराम से बैठा है.

अमीर आदमी ने कहा- अगर तुम्हारा आज का काम इतनी जल्द निपट गया तो क्या हुआ, फिर भी मछलियां पकड़ो.

मछुआरे ने पूछा जब जरूरत ही नहीं तो क्यों पकड़ूं?

अमीर ने कहा- रोज जरूरत से ज्यादा मछलियां पकड़ो. उन्हें बेचकर एक बड़ी सी नाव खरीदो.

मछुआरे ने पूछा कि नाव अगर भी आ जाए तो उस नाव का मैं क्या करूंगा?हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

अमीर आदमी झुंझलाया- तुम्हें तो अक्ल ही नहीं है. दुनियादारी का कुछ भी ज्ञान नहीं है. अभी तालाब में ही मछलियां पकड़ते हो. कब तक तालाब में ही रहोगे.

तालाब से बाहर निकलो. कुछ बड़ा सोचो. अब तुम नदी और समुद्र में उतरो. ज्यादा मछलियां पकड़ोगे तो ज्यादा पैसे कमाओगे. नाव उसमें काम आएगी.

मछुआरे ने उसी मासूमियत से पूछा कि फिर उसके बाद क्या करूँगा,कुछ बताइए?

अमीर को लगा कि शायद अब मछुआरे को ज्ञान होने लगा है. उसे समझ आने लगी है. क्यों न एक नादान को अपने व्यापारिक ज्ञान से लाभान्वित किया जाए.

उसने समझाया- तुम पैसे जोड़ते रहना. एक के बाद एक कई बड़ी नाव खरीदना. खूब सारी मछलियां पकड़ना. दूर-दूर तक बेचना. खूब पैसे कमाना. अपने साथ बहुत से सहायक रख लेना.

मछुआरे ने फिर से वही सवाल कर दिया. उसके बाद मैं क्या करूँगा?

अमीर ने समझाया- फिर तुम भी मेरी तरह एक बहुत अमीर आदमी बन जाओगे. रूपए-पैसे की दिक्कत न रहेगी.

मछुआरे ने पूछा- अमीर हो जाने से क्या हो जाएगा?

अमीर ने कहा- तुम्हारे पास पैसों की कोई कमी नहीं रहेगी तो तुम अपनी जिंदगी शांति और आनंद से बिता पाओगे.

मछुआरे ने कहा- ऐसी सुखद जिंदगी तो मैं अभी भी बिता रहा हूं. शांति, सुकून आनंद सब है. मुझे कोई अभाव महसूस ही नहीं हो रहा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

अमीर बोला- वह तो ठीक है लेकिन तुम्हारे पास धन आने के बाद वाली खुशी तो नहीं है. उस खुशी का भी आनंद लो. सच पूछो तो आनंद उसी में है.

मछुआरे ने कुछ सोचा फिर पूछा- आप कहां जा रहे थे? अमीर ने कहा- मैं वैद्य के पास जा रहा था. मुझे मधुमेह, रक्तचाप, अनिद्रा हृद्य और पेट की कई बीमारियां हो गई हैं भाई.

वैद्य का लगातार चक्कर लगा रहता है. एक बीमारी दबती है तो दूसरी उभर आती है. परेशान हो गया हूं इन बीमारियों के चक्कर में. धन और शरीर दोनों जा रहे हैं.

मछुआरे ने पूछा- आपको यह सब बीमारी बचपन से थी. सेठ ने इतराते हुए कहा- नहीं, मैं पहले बहुत तगड़ा आदमी था. मेरे जैसे हठ्ठे-कठ्ठे इंसान को देखकर दूसरों में ईर्ष्या होती थी.

खूब मेहनत करता था. काम के सिलसिले में मीलों पैदल चलता. बीमारी क्या होती है मुझे पता भी नहीं था. पर अब वह बात ही नहीं रही. भोजन से ज्यादा दवाइयां ही खाता हूं.

मछुआरे ने पूछा- अच्छा फिर अब ऐसा क्यों हो गया? आपके साथ कोई दुर्घटना या अनहोनी हो गई क्या?

सेठ अब उससे आत्मीयता महसूस करने लगा था.

उसने अपना दुखड़ा सुनाना शुरू किया- काम बढ़ने से अब चलना-फिरना नहीं हो पाता. व्यापार के नफा-नुकसान का हिसाब रखने की सुध में खाने की सुध नहीं रहती.

काम बढ़ने से चिंता बहुत बढ़ गई और रक्तचाप ने धेर लिया. रक्तचाप के कारण हृदय कमजोर हो गया है. जब शरीर का नियम बिगड़ता है तो पेट की परेशानी आती ही है. इस तरह रोगों के चक्र में फंस गया हूं भाई.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

मछुआरा यह सुनकर दुखी था. उसने पूछा- बीमार होकर आप दवाई लेने क्यों निकले? आपके बच्चे आपकी दवाई नहीं लाते?

अमीर इतराया- पैसे कमाना इतना आसान नहीं. पूरे परिवार को व्यापार में लगा रखा है मैंने. वे ज्यादातर बाहर ही रहते हैं. ऐसे में तो मुझे ही जाना पड़ेगा न दवाइयों के लिए.

यह सुनकर मछुआरे ने गहरी सांस ली और फिर हंसने भी लगा.

मछली की बाल्टी उठाई और कहा- सेठजी मुझे और मछलियां पकड़ने की जरूरत नहीं. धन कम है मगर सुकून है, आडे वक्त में परिवार है. शरीर स्वस्थ है. जब चाहे काम करता हूं, जब चाहे आराम करता हूं.

जीवन में एक संतुलन मैने बना रखा है. मुझे लगता है कि आपको मछलियों का मोह छोड़ने की ज्यादा जरूरत है. मैं आपसे ज्यादा सुखी हूं.

धन जीवन में सुविधाएं ला सकता है लेकिन खुशियों का गारंटी वाला पैमाना धन नहीं हो सकता. जो धनी हैं उनके ऐश्वर्य तो दिखाई पड़ते हैं, लेकिन कभी उनकी परेशानियां जानें तो शायद मोह कम हो जाए.

खुशियों की गारंटी आत्मसंतोष में है. जो मेहनत से मिल रहा है उसे पर्याप्त समझना चाहिए. उसमें खुश होने का प्रयास करना चाहिए.

एक तरफ मछुआरा है जिसे खाने के लाले नहीं पड़े. जीवन से संतुष्ट भी है. अपने काम को, अपने परिवार को सबको समय दे पाता है. परिवार में मेल-जोल मिठास है.

दूसरी तरफ वह सेठ जिसके पास पैसा अपार तो है पर लालच भी उतना ही. उसे भी पता है कि उसके पास पर्याप्त धन है फिर भी बच्चों को अपने से दूर परदेस में भेज रखा है. आड़े वक्त में जो काम ही न आ पाए वह परिवार और धन किस काम का.

ईश्वर ने हमें संसार में बहुत से सकारात्मक और रचनाशील कार्य करने के लिए भेजा है. नोट छापने की मशीन बनने के लिए नहीं.

इस चक्कर में फंसने के बाद इंसान असली-नकली दोनों तरह के नोट छापने लग जाता है. फिर क्या हो सकता है, बताने की जरूरत नहीं.

बेशक आपके पास अफरात पैसा न हो पर क्या ऐसा संकट भी है कि जीवन चल तक नहीं पा रहा. अगर ऐसा हो तो शांति से सोचिए. आपने ख्वाहिशें इतनी बढ़ा लीं कि जीवन नहीं चल पा रहा वाली भावना आई है.

कोई गारंटी नहीं कि आमदनी बढ़ जाए तो सुखी हो जाएंगे. तब आपकी नई ख्वाहिशें आ खड़ी होंगी. फिर नए धन का लक्ष्य और फिर वही मानसिक कष्ट. तो सुख की गारंटी है- आत्मसंतोष. जो मिला उसके लिए ईश्वर को धन्यवाद करो. प्रभु से कहो इसे मत छीनना. इतना पर्याप्त है मेरे लिए.

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