क्यों हर घर में होना चाहिए हनुमान चालीसा; अगर आप पढ़ते हैं हनुमान चालीसा तो जानिए इसके लाभ,

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हनुमान चालीसा के ये छोटे-छोटे रामबाण उपाय
क्या आप पैसों की तंगी से परेशान हैं?
क्या आपको अपनी मेहनत का पूरा फल प्राप्त नहीं हो पाता है?
क्या आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है?
क्या आपको किसी की बुरी नजर सता रही है?
यदि किसी व्यक्ति को भूत-प्रेत आदि से संबंधित कोई परेशानी हो तो यहां हनुमान चालीसा का एक रामबाण उपाय बताया जा रहा है।
जिससे सभी प्रकार की परेशानियां समाप्त हो जाएंगी-
कलियुग में हनुमानजी की पूजा सभी कष्टों को बहुत ही जल्द दूर करने वाली मानी गई है.
जो भी भक्त बजरंग बली का ध्यान करता है उसकी सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं. जो भी भक्त नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करता है उसे रामदूत की कृपा प्राप्त होती है. इसके साथ ही जानिए एक ऐसा उपाय जो बहुत ही जल्द आपके दुख, रोग, पैसों की तंगी को दूर कर सकता है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.
हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए किसी भी मंगलवार या शनिवार के दिन या किसी भी विशेष शुभ मुहूर्त में या किसी भी विपत्ति के समय यहां बताया जा रहा उपाय किया जा सकता है।
ब्रह्म मुहूर्त में उठें और प्रात: काल के सभी दैनिक कार्यों से निवृत्त हो जाएं, स्नान आदि के बाद पवित्र हो जाएं.
इसके बाद किसी भी हनुमान मंदिर में जाएं और हनुमानजी के समक्ष धूप- अगरबत्ती, दीपक जलाएं, पुष्प हार, प्रसाद आदि अर्पित करें.
इसके बाद आसन बिछाकर बैठ जाएं और हनुमान चालीसा के 108 पाठ करें। ध्यान रहें हनुमान चालीसा के 108 पाठ लगातार, बिना रुके किए जाने चाहिए. इस साधना में समय अधिक लगता है अत: इस बात का विशेष ध्यान रखें.
यह पूजा शांति पूर्ण ढंग से की जानी चाहिए. किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न करें.
हनुमान चालीसा के पाठ की संख्या ध्यान रखने के लिए रुद्राक्ष की माला का उपायोग किया जा सकता है.
आप यह पूजा घर पर भी कर सकते हैं. किसी एकांत स्थान पर यह पूजा की जानी चाहिए. इसके लिए साफ-स्वच्छ स्थान का चयन करें.
जो भी भक्त ऐसा नियमित रूप से करता है वह सभी प्रकार के कष्टों और दुखों से मुक्त हो जाता है.
श्रीहनुमानजी की कृपा प्राप्ति के बाद व्यक्ति को भूत-प्रेत आदि का भी कोई भय नहीं रहता है. जीवन में कभी भी किसी भी बुरी नजर का प्रभाव आप पर नहीं पड़ेगा. घर परिवार में भी सभी परेशानियों से निजात मिलेगी.
श्रीहनुमानजी को मनाने और उनकी कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल और चमत्कारी उपाय है हनुमान चालीसा का पाठ। हनुमान चालीसा बहुत ही सरल और मन को शांति प्रदान करने वाली है।
जो लोग धन अभाव से ग्रस्त हैं या घर-परिवार में परेशानियां चल रही हैं या ऑफिस में बॉस और सहयोगियों से रिश्ते बिगड़े हुए हैं या समाज में सम्मान नहीं मिल रहा है या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हैं तो इन्हें दूर करने के लिए हनुमान चालीसा का ये उपाय श्रेष्ठ मार्ग है।
जो लोग मस्तिष्क से संबंधित कार्य में लगे रहते हैं और मानसिक तनाव का सामना करते हैं या जिनका दिमाग अन्य लोगों की अपेक्षा तेज नहीं चलता है तो रोज रात को सोने से पहले हनुमान चालीसा का जप करें। यदि आप पूरी हनुमान चालीसा का जप नहीं कर सकते हैं तो इन पंक्तियों का जप करें…
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरो पवन कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरेहू कलेश विकार।
इस पंक्ति में हनुमान से यही प्रार्थना की गई है कि हे प्रभु मैं खुद को बुद्धि हीन मानकर आपका ध्यान करता हूं। कृपा करें और मुझे शक्ति, बुद्धि, विद्या दीजिए। मेरे सभी कष्ट-क्लेश दूर कीजिए।हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.जिन लोगों को बुरे सपने आते हैं, नींद में डर जाते हैं उन्हें सोने से पहले इन पंक्तियों का जप करना चाहिए…
भूत-पिशाच निकट नहीं आवे। महाबीर जब नाम सुनावे।
इस पंक्ति के माध्यम से भक्त द्वारा हनुमान से भूत-पिशाच आदि के डर से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की जाती है। सोने से पहले जो भी व्यक्ति इस पंक्ति का जप करता है उसे न तो बुरे सपने आते हैं और न ही कोई भय सताता है।
यदि कोई व्यक्ति भयंकर बीमारी से ग्रस्त है तो उसे सोने से पहले इन पंक्ति का जप करना चाहिए…
नासे रोग हरे सब पीरा।
जो सुमिरे हनुमंत बलबीरा।।
इस पंक्ति से हम बजरंग बली से सभी प्रकार रोगों और पीड़ाओं से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। जो भी बीमार व्यक्ति इन पंक्तियों का जप करके सोता है। उसकी बीमारी जल्दी ठीक हो जाती है।
यदि कोई व्यक्ति सर्वगुण संपन्न बनना चाहता है और घर- परिवार, समाज में वर्चस्व बनाना चाहता है, सम्मान पाना चाहता है उसे सोने से पहले इस पंक्ति का जप करना चाहिए…
अष्ट-सिद्धि नवनिधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
इस पंक्ति के अनुसार हनुमान अष्ट सिद्धियां और नौ निधियों के दाता है। जो कि उन्हें माता सीता ने प्रदान की है। जिन लोगों के पास ये सिद्धियां और निधियां आ जाती हैं वे समाज में और घर-परिवार में मान सम्मान, प्रसिद्धि पाते हैं।
संपादनः राजन प्रकाश
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