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शिव का कृष्णदर्शन अवतारः मनुपुत्र नभग की परीक्षा ली महादेव के कृष्णदर्शन अवतार ने और नभग को धन व ज्ञान से किया परिपूर्ण

शिव का कृष्णदर्शन अवतारः मनुपुत्र नभग की परीक्षा ली महादेव के कृष्णदर्शन अवतार ने और नभग को धन व ज्ञान से किया परिपूर्ण

shankar bhagwan
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श्राद्धदेव मनु के सबसे छोटे पुत्र का नाम था नभग. मनुपुत्र नभग को स्वयं भगवान शिव ने दीक्षा प्रदान की थी. नभग का अध्य्यन आदि में ही ध्यान ज्यादा रहा.

शिक्षा पूरी करके जब नभग घर लौटे तो पता चला कि इच्छवाकु आदि भाइयों ने पिता के राज्य का आपस में बंटवारा कर लिया है. वे अपना-अपना भाग लेकर राजकाज में लग गए हैं.

नभग ने भाइयों से कहा कि मेरे लिए आपने तय किया है. मेरा भाग तय किए बिना यह बंटवारा धर्मविरुद्ध होगा. भाइयों ने कहा कि जब संपत्ति का बंटवारा हो रहा था, तब हम तुम्हारा भाग निकालना भूल गए थे.

सोच-विचारकर नभग के भाई बोले- अब हम पिताजी को ही तुम्हारे हिस्से में देते हैं. नभग को आश्चर्य हुआ. उन्होंने पिता को सारी बात बताई तो वह बोले- तुम्हारे भाइयों ने तुम्हें ठगने के लिए यह बात कही है.

नभग पिता को ही अपने हिस्से की संपत्ति मानकर उनकी सेवा करने लगे. आय का स्रोत न होने से समय कष्टमय बीत रहा था. एक दिन मनु ने कहा- इस समय अंगिरस गोत्र के ब्राह्मण बड़ा यज्ञ कर रहे हैं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.परंतु प्रत्येक छठे दिन उनसे उच्चारण में एक भूल हो जाती है. तुम वहां जाओ और उन ब्राह्मणों को विश्वदेव के वे दो सूक्त बता दो जिसमें चूक हो रही है. यज्ञ समाप्त होने पर जब वे ब्राह्मण स्वर्ग जाने लगेंगो तो यज्ञ का बचा हुआ सारा धन तुम्हें दे देंगे.

पिता के आदेश से नभग यज्ञ में पहुंचे और सूक्त बताकर यज्ञ को निर्विघ्न संपन्न करा दिया. यज्ञ के बाद ब्राह्मणों ने बचा हुआ सारा धन नभग को सौंप दिया. नभग यज्ञशेष धन को इकत्रित करने लगे.

भगवान शिव ने कृष्णदर्शन का रूप धरा और वहां प्रकट होकर कहा- नभग यह धन क्यों उठा रहे हो, यह तो मेरा धन है. नभग ने कहा- ऋषियों ने यज्ञशेष मुझे दिया है, तुम कैसे रोक सकते हो?

कृष्णदर्शन ने कहा- यज्ञशेष किसका है यह निर्णय मैं तुम्हारे पिता पर छोड़ता हूं. उनके पास जाकर पूछो और वह जो निर्णय दें उसे ठीक-ठीक आकर मुझे बताओ. उनका निर्णय मुझे स्वीकार है.

नभग पिता के पाए गए और कृष्णदर्शन की बात कही. मनु बोले- वह तो साक्षात भगवान शिव हैं. यूं तो संसार की सारी संपत्ति उनकी ही है लेकिन यज्ञशेष पर केवल भगवान रूद्र का अधिकार है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.वह तुम पर कोई विशेष कृपा करने के निमित्त पधारे हैं. उनकी स्तुति करके उन्हें प्रसन्न करो और अपराध के लिए क्षमा मांग लो. नभग यज्ञस्थल पर गए और महादेव की स्तुति की.
हे प्रभु, समस्त संसार आपका है. फिर यज्ञशेष क्या वस्तु है. यह आपका ही है और मेरे पिताजी ने यह सब आपको समर्पित करने का आदेश दिया है. मैंने भूलवश आपके साथ उद्दंडता की, उसके लिए क्षमा करें.

कृष्णदर्शन रूप में भगवान शिव प्रसन्न हुए और नभग से बोले- दरिद्रता में भी तुम्हारे पिता के धर्म के अनुकूल निर्णय से मैं प्रसन्न हूं. मैं तुम्हें सनातन ब्रह्मतत्व के उपदेश के साथ-साथ इस यज्ञ का पूरा धन प्रदान करता हूं.

संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्

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