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नवदुर्गा प्रार्थना मंत्र: माँ दुर्गा के 9 रूपों की आराधना का सबसे सरल मंत्र

नवदुर्गा प्रार्थना मंत्र: माँ दुर्गा के 9 रूपों की आराधना का सबसे सरल मंत्र

नवदुर्गा प्रार्थना मंत्र

नवदुर्गा प्रार्थना मंत्र: माँ दुर्गा के 9 रूपों की आराधना का सबसे सरल मंत्र

नवदुर्गा प्रार्थना मंत्र, मां दुर्गा के नौ रूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री) के पावन नामों के स्मरण का सबसे महत्वपूर्ण श्लोक है। नवरात्रि के दिनों में इस प्रार्थना मंत्र का जाप करने से साधक को सभी नौ देवियों की कृपा और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

जानते हैं प्रार्थना मंत्र और उसका पाठ:

नवदुर्गा प्रार्थना मंत्र हिंदी अर्थ सहित- दुर्गा मां के नौ स्वरूपों की आराधना
नवदुर्गा प्रार्थना मंत्र हिंदी अर्थ सहित- दुर्गा मां के नौ स्वरूपों की आराधना

नवदुर्गा प्रार्थना मंत्र:

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।

पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।

नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ।।

मंत्र का सरल हिंदी अर्थ:

भगवान ब्रह्मा द्वारा बताए गए इन नौ नामों— प्रथम शैलपुत्री, द्वितीय ब्रह्मचारिणी, तृतीय चंद्रघंटा, चतुर्थ कूष्माण्डा, पंचम स्कन्दमाता, षष्ठ कात्यायनी, सप्तम कालरात्रि, अष्टम महागौरी और नवम सिद्धिदात्री— को नवदुर्गा के रूप में प्रकीर्तिता (प्रसिद्ध) किया गया है।

नवरात्रि और देवी पूजन में मां दुर्गा के इन नौ रूपों का स्मरण करने मात्र से मनुष्य के सभी संकट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है।

दुर्गा माँ के 9 स्वरूपों की प्रार्थना का धार्मिक महत्व और लाभ

हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना का सबसे बड़ा और पवित्र अवसर माना जाता है। इन नौ दिनों में माता दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। पुराणों के अनुसार, मां दुर्गा के इन नौ रूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री) का स्मरण करने और उनके इस विशेष प्रार्थना मंत्र का जाप करने से जीवन की सभी बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।

मां दुर्गा के नौ रूपों के नाम और उनका संक्षिप्त परिचय

  1. माँ शैलपुत्री: यह मां दुर्गा का प्रथम रूप हैं, जो पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में अवतरित हुईं। इनकी उपासना से स्थिरता और साहस की प्राप्ति होती है।

  2. माँ ब्रह्मचारिणी: यह दूसरा रूप तपस्या और साधना का प्रतीक है। इनकी आराधना से छात्रों और साधकों को संयम व ऊर्जा मिलती है।

  3. माँ चन्द्रघण्टा: तीसरा रूप भक्तों को शांति, कल्याण और वीरता प्रदान करने वाला माना जाता है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है।

  4. माँ कूष्माण्डा: चौथा रूप अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली आदि शक्ति के रूप में पूजा जाता है।

  5. माँ स्कन्दमाता: पांचवां रूप भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) की माता का है, जो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं।

  6. माँ कात्यायनी: छठा रूप महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट होने वाली योद्धा देवी का है, जिनकी पूजा से विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।

  7. माँ कालरात्रि: सातवां रूप दुष्टों का संहार करने वाली और साधकों को भयमुक्त करने वाली महाशक्ति का है।

  8. माँ महागौरी: आठवां रूप परम पवित्र, श्वेत वर्णा और जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला माना गया है।

  9. माँ सिद्धिदात्री: नौवां और अंतिम रूप सभी प्रकार की अणिमा, महिमा आदि सिद्धियां प्रदान करने वाला है।

नवदुर्गा प्रार्थना श्लोक के प्रतिदिन जाप के नियम

  • सुबह स्नान करने के बाद माता के सामने शुद्ध घी का दीया जलाएं।

  • आसन पर बैठकर एकाग्रचित्त होकर नवदुर्गा प्रार्थना मंत्र का 11, 21,51 या 108 बार या अपनी श्रद्धा अनुसार जितना संभव हो सके जाप करें।

  • पूजन के अंत में माता की आरती करें और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।


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( डिस्कलेमरः इस पोस्ट को तैयार करने में पूरी सावधानी रखी गई है। फिर भी यदि कोई मानवीय भूल हो गई हो तो कृपया ध्यान आकृष्ट कराएं। आपके सुझावों को तुरंत शामिल करते हुए भूल सुधार की जाएगी। इस पोस्ट का उद्देश्य सिर्फ एक जानकारी देना है। इसका उद्देश्य कोई गलत जानकारी देना या अंधविश्वास फैलाना नहीं हैं। पोस्ट में बताएं किसी भी परामर्श पर अमल करने से पहले विषय के विशेषज्ञ से परामर्श लें।)

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