हनुमानजी की पूजा कैसे करें- क्या स्त्रियों को करनी चाहिए हनुमानजी की पूजा?

हनुमानजी की पूजा कैसे करें- क्या स्त्रियों को करनी चाहिए हनुमानजी की पूजा?

lord hanuman

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चैत सुदी पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है. इसी दिन बजरंग बली का अवतार हुआ था. यह दिन हनुमानजी की विशेष पूजा आराधना का है. इसलिए आज हमको हनुमानजी की पूजा आराधना से जुड़ा एक ज्ञानवर्धक और उपयोगी पोस्ट देने का प्रयास करेंगे. यह पोस्ट आपके लिए हमेशा काम आएगी.

इस पोस्ट में हम आपको हनुमान जयंती को राशि अनुसार की जाने वाली विशेष पूजा के बारे में बताएंगे. स्त्रियों के लिए हनुमानजी की पूजा को लेकर बहुत से भ्रम हैं उनका निवारण करेंगे. हनुमानजी की दैनिक पूजा कैसे करनी चाहिए यह बताएंगे. किस प्रकार की बाधा मुक्ति के लिए कौन सा अनुष्ठान करना चाहिए और हनुमानजी की पूजा में क्या रखनी होती हैं सावधानियां.

आपके लिए यह पोस्ट हमेशा काम आएगी. आप प्रभु शरणम् एप्प डाउनलोड कर लें. वहां हनुमानजी पर विशेष सामग्री मिल जाएगी. एप्प का लिंक पोस्ट की शुरूआत में भी था और अंत में भी मिलेगा. शुरुआत करते हैं हनुमान जयंती पर राशि अनुसार विशेष पूजन से-

हनुमानजी संकटमोचक हैं. इनका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है परंतु शनि, सूर्य, मंगल और राहू ग्रह पर विशेष आधिपत्य रखते हैं.

ज्योतिशास्त्र के अनुसार आइए जानते हैं कि हनुमान जयंती को मनचाहे फल की आशा रखने वाले लोगों को राशि अनुसार क्या विशेष उपाय बताए जाते हैं.

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य, शनि व राहु के दोषों के निवारण हेतु हनुमान आराधना विशेष मानी जाती है. चैत्र मास की पूर्णिमा पर हस्त नक्षत्र मिलने पर हनुमान जयंती का आध्यात्मिक प्रभाव बढ़ जाता है. इस दिन विशेष रूप से की गई हनुमान साधना रोग, शोक व दुखों को मिटाकर विशिष्ट फल देती है.

शास्त्रानुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को एकादश रुद्रावतार हनुमान जी का जन्म हुआ था। पंचांग के अनुसार हनुमान जी का जन्म पुर्णिमा तिथि और हस्त नक्षत्र के संयोग में हुआ था।

मेष: हनुमंत कवच का पाठ करें तथा हनुमान जी पर बूंदी चढ़ाकर गरीब बच्चों में बाटें.

वृष: रामचरितमानस के सुंदर-काण्ड का पाठ करें तथा हनुमान जी पर मीठा रोट चढ़ाकर बंदरों को खिलाएं.

मिथुन: रामचरितमानस के अरण्य-काण्ड का पाठ करें तथा हनुमान जी पर पान चढ़ाकर गाय को खिलाएं.

कर्क: हनुमंत कवच का पाठ करें तथा हनुमानजी पर पीले फूल चढ़ाकर जलप्रवाह करें.

सिंह: रामचरितमानस के बाल-काण्ड पाठ करें तथा हनुमान जी पर गुड़ की रोटी चढ़ाकर भिखारी को खिलाएं.

कन्या: रामचरितमानस के लंका-काण्ड का पाठ करें तथा हनुमान मंदिर में शुद्ध घी के 6 दीपक जलाएं.

तुला: रामचरितमानस के बाल-काण्ड का पाठ करें तथा हनुमान जी पर खीर चढ़ाकर गरीब बच्चों में बाटें.

वृश्चिक: हनुमान अष्टक का पाठ करें तथा हनुमानजी पर गुड़ वाले चावल चढ़ाकर गाय को खिलाएं।.

धनु: रामचरितमानस के अयोध्या-काण्ड का पाठ करें तथा हनुमान जी पर शहद चढ़ाकर खुद प्रसाद रूप में खाएं.

मकर: रामचरितमानस के किष्किन्धा-काण्ड का पाठ करें तथा हनुमान जी पर मसूर चढ़ाकर मछलियों को डालें.

कुंभ: रामचरितमानस के उत्तर-काण्ड का पाठ करें तथा हनुमान जी पर मीठी रोटियां चढ़ाकर भैसों को खिलाएं.

मीन: हनुमंत बाहुक का पाठ करें तथा हनुमान जी के मंदिर में लाल रंग की ध्वजा या पताका चढ़ाएं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.स्त्रियां कैसे करें हनुमानजी की पूजाः

हनुमानजी की आराधना से जुड़ा सबसे बड़ा प्रश्न है कि क्या स्त्रियों को हनुमद् आराधना करनी चाहिए? सबसे पहले तो यह समझना जरूरी है कि हनुमद् आराधना का अर्थ क्या है. हनुमान का एक अर्थ है अहंकार रहित.

हनुमानजी की कृपा सिर्फ आसुरी प्रवृति के इंसानों, भूत-प्रेतों, दूसरों का अनिष्ट चाहने वालों को नहीं मिलती. शेष सभी जन उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं. इसलिए स्त्रियों के लिए हनुमानजी की पूजा पर प्रतिबंध का प्रश्न ही नहीं. हां स्त्रियों को हनुमानजी की आराधना से जुड़ी कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

स्त्रियां कर सकती हैं हनुमानजी की पूजा-आराधना:-

हनुमानजी की उपासना के संदर्भ में एक आम भ्रम है महिलाएं उनकी पूजा नहीं कर सकतीं. यह सत्य नहीं है. महिलाओं के लिए हनुमानजी की साधारण पूजा वर्जित नहीं है. बस रजस्वला स्थिति में पूजा करना मना है. रजस्वला अवस्था में तो किसी भी तरह की पूजा वर्जित है.

हनुमानजी की साधना और विशेष पूजा की प्रक्रिया लंबे अवधि की होती है. कई साधनाएं 40 से ऊपर दिनों की हैं जिसे महिलाएं नहीं कर सकतीं हैं क्योंकि बीच में व्यवधान उत्पन्न हो जाते हैं.

इसलिए हनुमानजी की विशेष साधना केवल पुरुष ही कर पाते हैं. इसी बात को आधार बनाकर भ्रम फैलाया गया है. हनुमानजी को पिता सदृश विचारकर सामान्य पूजा स्त्रियों को जरूर करनी चाहिए. हनुमानजी भय और ऊपरी बाधाओं से मुक्ति दिलाते हैं.

स्त्रियों के लिए हनुमानजी को उपवस्त्र यानी लंगोट समर्पित करने की मनाही है. वे केवल जनेऊ चढ़ा सकती हैं. हनुमानजी को स्त्रियों द्वारा सिंदूर चढ़ाने से पूर्णरूप में मनाही की बात भी कहीं स्पष्ट नहीं मिलती, इस पर मिले-जुले विचार हैं.

हनुमानजी ने स्वयं माता सीता के हाथों से सिंदूर लेकर अपने शरीर पर लेप लिया था. शायद इस कारण अधिकांश मंदिरों में स्त्रियों को सिंदूर चढ़ाने से रोका जाता है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.कैसे करें हनुमानजी की दैनिक पूजाः

ज्योतिषशास्त्र के हिसाब से जिन राशियों के स्वामी मंगल और शनि हैं उन्हें हनुमानजी की पूजा विशेष रूप से करनी चाहिए. जो हनुमानजी को अपना इष्ट मानते हैं उन्हें रोजाना हनुमद् आराधना और पाठ करना चाहिए.

हनुमद आराधना के साथ एक सुमगता की बात यह है कि इसके लिए कोई बहुत विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं होती. विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए हनुमानजी के विशिष्ट मंत्र और पाठ हैं जिनके जप से सारी अभिलाषाएं पूर्ण होती हैं.

यदि हनुमान साधक किसी कारणवश किसी दिन विधिवत पूजा नहीं कर पाते तो भी उनके एक विशिष्ट मंत्र
“ऊं हं हनुमते नम:” की यदि एक माला जप लें तो भी पूजा पूर्ण हो जाती है.

किन मंत्रों या स्तुतियों से करें हनुमानजी की पूजाः

श्रीरामरक्षा स्तोत्र या श्रीरामस्तुति पाठ कर लें अथवा निम्न मंत्र पढ़ेः

यत्र यत्र रघुनाथ कीर्तनं तत्र तत्र कृत मस्तककांजलिम्।
वाष्प वारि परिपूर्णलोचनं मारूति नमत राक्षसान्तकम्।।

यदि यह स्तुति भी स्मरण न हों तो “ऊं राम रामाय नमः” का ही जप कर लें.

हनुमानजी का कोई विशेष अनुष्ठान मंगलवार और शनिवार को आरंभ करें तो सबसे उत्तम फलदायी होगा. यदि किसी कारण से कोई भी पूजा नहीं कर पाते तो पावित्रीकरण मंत्र के स्मरण से पवित्र होने के बाद हनुमान चालीसा का ही पाठ कर लें तो भी हनुमानजी की कृपा प्राप्त होती है.

पवित्रीकरण मंत्रः
ऊँ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा |
यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं सः बाह्याभ्यन्तरः शुचिः||

इस मंत्र को पूजा स्थल तथा स्वयं पर तीन बार जल छिडकते हुए बोलना चाहिए और शुद्धि की कल्पना कर, आसन की शुद्धि करने के पश्चात पूर्व या उत्तर दिशा में मुख कर बैठना चाहिए.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.भूत-प्रेत बाधा से बचने के लिए करनी चाहिए हनुमद आराधना

जिन्हें भूत-प्रेत से बहुत भय होता है यदि वे रात को सोने से पहले “ऊं हं हनुमते नमः” मंत्र की एक माला प्रतिदिन जपें तो कुछ ही दिनों में एक ऐसा कवच तैयार हो जाता है जो उन्हें भूत-प्रेत के भय से मुक्त रखता है. इसका जप करने से पहले पवित्र होकर स्वच्छ कपड़े पहन लेने चाहिए. लाल उनी आसन या कुशासन पर बैठकर ध्यान करना श्रेष्ठ होता है. यदि कुछ न हो तो लाल रंग की कोई साफ चादर ही बिछा लें.

हनुमद आराधना में शाबर मंत्रः

यदि आप किसी पीड़ा से परेशान हैं तो ऐसे में हनुमानजी के साबर मंत्र शीघ्र समाधान या राहत देने वाले होते हैं. परंतु इसकी साधना बहुत सोच-विचारकर ही करनी चाहिए.

शाबर मंत्र की साधना में कई सावधानियां जरूरी हैं. इस मंत्र का प्रयोग वही लोग करें जिनका खान-पान शुद्धता और वे अन्य बुराईयों से दूर हों अन्यथा लेने के देने पड़ जाते हैं. हर बाधा के लिए अलग साबर मंत्र बताए गए हैं जो किसी हनुमान साधक के परामर्श से ही करनी चाहिए. इधर-उधर से सुनकर किसी शाबर मंत्र की साधना कभी भी आरंभ न करें.

रोग-व्याधि, भय से पीड़ा में हनुमान उपासनाः

एकाग्रचित होकर 21 दिन तक विधि-विधान से “बजरंग बाण” का पाठ करने से शत्रुओं के भय और रोग-व्याधि में बहुत आराम मिलता है. यदि आप निर्दोष और निरपराध हैं तो इस साधना से शत्रुओं को दंड मिलता है किंतु यदि आपने बजरंग बाण की साधना किसी ऐसे अभीष्ट फल की प्राप्ति के लिए की हो जो अनुचित है, तो ध्यान रखें हनुमानजी दंडित कर सकते हैं. लाभ के स्थान पर हानि हो सकती है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.हिंसक प्रवृति और बंधन दोष से राहत के लिएः

यदि परिवार में किसी के हिंसक प्रवृति से आप परेशान हैं तो हनुमानजी से उसकी बुद्धि सुधारने की प्रार्थना करें. यदि किसी अपराध के कारण बंधन दोष यानी जेल जाना पड़ गया है तो दोषी व्यक्ति अगर 108 बार “हनुमान चालीसा” का पाठ करके यह संकल्प ले कि वह स्वयं को बुरे कार्यों से मुक्त रखकर हनुमानजी की शरण में रहेगा तो वह दोबारा बंधन दोष से मुक्त हो जाता है.

ध्यान रहे हनुमानजी तभी तक रक्षा करते हैं जब तक आपकी भावना पवित्र है. यदि उस व्यक्ति ने दोबारा उन्हीं कार्यों में लिप्तता बढ़ाई तो बंधन दोष कई गुना बढ़ जाता है और उसे फिर उसकी मुक्ति आसानी से संभव नहीं होती.

रामबाण है द्वादश नाम जपः

हनुमानजी ने अपने प्रभु श्रीराम के वे कार्य सिद्ध किए जो असंभव जैसे ही थे. प्रभु पर जब भी संकट आए चाहे माता सीता की खोज हो या संजीवनी बूटी का आवश्यकता, हनुमानजी ने ऐसे कठिन कार्य सिद्ध किए. श्रीराम ने उन्हें आशीर्वाद दिया है कि अगर हनुमानजी का स्मरण करके कठिन कार्य किया जाए तो वह सरल हो जाएगा.

यदि आप लगातार किसी कार्य को करने में असमर्थ हो रहे हैं और वह कार्य ऐसा है जिसमें कोई बुरी भावना नहीं और जिससे दूसरों का कल्याण हो सकता है तो आपको हनुमानजी के द्वादश(बारह) नाम जप करके उसे आरंभ करना चाहिए. एक माला जप लें.

मंगलवार को इसका जप अवश्य करना चाहिए.आप दिन में जब भी मौका लगे जितना संभव हो इन नामों का जप करें. हनुमानजी की भक्ति में एक खास बात यह भी है कि उनकी पूजा के लिए विशेष प्रयोजन की जरूरत नहीं होती. आप सफर में हो या विश्राम कर रहे हों-प्रभु के 12 नामों का पाठ मन में या उच्च स्वर में पाठ करे.

हनुमानजी की भक्ति निष्काम है इसलिए उन्हें प्रसन्न करने से सभी देवताओं की कृपा मिल जाती है. हनुमानजी प्रसन्न होते हैं उनके 12 नामों के जप से क्योंकि उन नामों में हनुमानजी के आराध्यों के नाम हैं.

1. हनुमान
2. अंजनीसुत
3. वायुपुत्र
4. महाबल
5. रामेष्ट
6. फाल्गुण सखा
7. पिंगाक्ष
8. अमित विक्रम
9. उदधिक्रमण
10. सीता शोक विनाशन
11. लक्ष्मण प्राणदाता
12. दशग्रीव दर्पहा

नाम जप के लाभः

– नित्य नियम से नाम लेने से इष्ट की प्राप्ति होती है.
– दोपहर में नाम लेनेवाला धनवान होता है.
– दोपहर से संध्या के बीच नाम लेने से पारिवारिक सुखों की प्राप्ति होती है.
– रात को सोते समय नाम लेने शत्रुओं पर जीत मिलती है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.हनुमद आराधना में रखी जाने वाली कुछ सामान्य सावधानियां-

– हनुमानजी की साधना अवधि में और व्रत में संयम रखें. उपासना अवधि में ब्रह्मचर्य का पालन होना चाहिए.
– हनुमानजी को चढ़ाया जाने वाला प्रसाद शुद्ध होना चाहिए. उसमें घी का प्रयोग सबसे उत्तम बताया गया है.
– हनुमानजी की पूजा में यदि दीपक जला रहे हैं तो घी के दीपक की ही प्रयोग करें.
– हनुमानजी को लाल फूल प्रिय हैं. अत: उन्हें लाल फूल विशेष रूप से चढ़ाएं.
– हनुमानजी की मूर्ति को जल व पंचामृत से स्नान कराने के बाद सिंदूर में तिल का तेल मिलाकर उसका लेप करना चाहिए. इससे हनुमानजी प्रसन्न होते हैं.
– हनुमान साधना हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुंह करके ही शुरू करना चाहिए.
– स्त्रियां हनुमानजी को वस्त्र न अर्पित करें. वे ज्यादा से ज्यादा जनेऊ उन्हें अर्पित कर सकती हैं.
– हनुमानजी को चमेली का तेल भी चढ़ाया जाता है.
– हनुमानजी की पूजा आरंभ करने से पूर्व श्रीरामजी की स्तुति जरूर कर लें.

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