क्या संभव है बिना मृत्यु के पुनर्जन्म!

क्या संभव है बिना मृत्यु के पुनर्जन्म!

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जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना whatsapp से मिलने लगेगी। इस लाइऩ के नीचे फेसबुकपेज का लिंक है. इसे लाइक कर लें ताकि आपको पोस्ट मिलती रहे.एक चोर ने राजा के महल में चोरी की. सिपाही उसके पदचिह्नों का पीछा करते नगर से बाहर एक गांव तक आ गए. चोर के पदचिह्न देखते वे गाँव में वहां तक पहुंचे जहां एक संत सत्संग कर रहे थे.

सिपाहियों को संदेह हुआ चोर इसी सत्संग में छुपकर बैठा होगा. सिपाही सत्संग खत्म होने इंतजार करने लगे. संत कह रहे थे- जो मनुष्य सच्चे हृदय से भगवान की शरण चला जाता है, भगवान उसके सम्पूर्ण पापों को माफ कर देते हैं.

गीता में भगवान ने कहा हैः सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः।।

सम्पूर्ण धर्मों को अर्थात सम्पूर्ण कर्तव्यकर्मों को मुझमें त्यागकर तू केवल एक मुझ सर्वशक्तिमान सर्वाधार परमेश्वर की ही शरण में आ जा. मैं तुझे सम्पूर्ण पापों से मुक्त कर दूँगा, तू शोक मत कर.

वाल्मीकि रामायण में आता है- सकृदेव प्रपन्नाय तवास्मीति च याचते। अभयं सर्वभूतेभ्यो ददाम्येतद् व्रतं मम।।
अर्थात जो एक बार भी मेरी शरण में आकर कह दे कि मैं तुम्हारा हूं, मेरी रक्षा करो उसे मैं सम्पूर्ण अभय देता हूँ.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.
संत ने आगे कहा- जो भगवान का हो गया, उसका मानों दूसरा जन्म हो गया. अब वह पापी नहीं रहा, साधु हो गया. जो भजन करता है उसको साधु ही मानना चाहिए. कारण कि उसने निश्चय कर लिया है कि परमेश्वर के भजन के समान अन्य कुछ भी नहीं है.

चोर वहीं बैठा सब सुन रहा था. उस पर बातों का बड़ा असर हुआ.

उसने दृढ़ निश्चय कर लिया कि मैं अभी से भगवान की शरण लेता हूं. अब कभी चोरी नहीं करूंगा. मैं भगवान का हो गया.

सत्संग के बाद लोग निकलने लगे. सिपाहियों ने चोर को पहचान लिया और उसको पकड़ के राजा के सामने पेश किया. राजा ने चोर से पूछा- इस महल में तुम्हीं ने चोरी की है न? सच-सच बताओ, तुमने चुराया धन कहाँ रखा है?

चोर ने दृढ़तापूर्वक कहा- महाराज! इस जन्म में मैंने कोई चोरी नहीं की.

सिपाही बोला-महाराज! यह झूठ बोलता है. हम इसके पदचिह्नों को पहचानते हैं. इसके पदचिह्न चोर के पदचिह्नों से मिलते हैं, इससे सिद्ध होता है कि चोरी इसी ने की है.

राजा ने चोर की परीक्षा लेने की आज्ञा दी, जिससे पता चले कि वह झूठा है या सच्चा.

चोर के हाथ पर पीपल के ढाई पत्ते रखकर उसको कच्चे सूत से बाँध दिया गया. फिर उसके ऊपर लाल तपता लोहा रखा परंतु उसका हाथ जलना तो दूर रहा, सूत और पत्ते भी नहीं जले.

लोहा नीचे जमीन पर रखा तो वह जगह काली हो गयी.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.
राजा ने सोचा कि ‘वास्तव में यह निर्दोष है. अब राजा सिपाहियों पर बहुत नाराज हुआ कि तुम लोगों ने एक निर्दोष पुरुष पर चोरी का आरोप लगाया है. तुम लोगों को दण्ड दिया जायेगा.

यह सुनकर चोर बोला- नहीं महाराज! आप इनको दण्ड न दें. इनका कोई दोष नहीं है. चोरी मैंने ही की थी.

राजा ने सोचा कि ‘यह साधुपुरुष है, इसलिए सिपाहियों को दण्ड से बचाने के लिए चोरी का दोष अपने सिर पर ले रहा है.

राजा बोला-तुम इन पर दया करके इनको बचाने के लिए ऐसा कह रहे हो पर मैं इन्हें दण्ड अवश्य दूँगा. चोर बोला- महाराज ! मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ, चोरी मैंने ही की थी.

अगर आपको विश्वास न हो तो अपने आदमियों को मेरे पास भेजो. मैंने चोरी का धन जंगल में जहाँ छिपा रखा है, वहाँ से लाकर दिखा दूँगा. राजा ने अपने आदमियों को चोर के साथ भेजा.

चोर उनको वहाँ ले गया जहाँ उसने धन छिपा रखा था और वहाँ से धन लाकर राजा के सामने रख दिया. यह देखकर राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ.

राजा बोला- अगर तुमने ही चोरी की थी तो परीक्षा करने पर तुम्हारा हाथ क्यों नहीं जला? तुमने चोरी का धन भी लाकर दे दिया, यह बात हमारी समझ में नहीं आ रही है. ठीक-ठीक बताओ, बात क्या है?

चोर बोला- महाराज ! मैंने चोरी का धन छिपाया और एक सत्संग में जा बैठा. वहां मैंने सुना- जो भगवान की शरण लेकर पुनः पाप न करने का निश्चय कर लेता है उसको भगवान सब पापों से मुक्त कर देते हैं. उसका नया जन्म हो जाता है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.यह सुनकर मैंने निश्चय कर लिया कि अब मैं कभी चोरी नहीं करूँगा. इसीलिए तब से मेरा नया जन्म हो गया. इस जन्म में मैंने कोई चोरी नहीं की. इसलिए मेरा हाथ नहीं जला. मैंने जो चोरी की थी, वह तो पिछले जन्म में की थी.

कैसा दिव्य प्रभाव है सत्संग का! कुछ क्षण के सत्संग ने चोर का जीवन ही पलट दिया. उसे सही समझ देकर पुण्यात्मा, धर्मात्मा बना दिया. सत्संग पापी से पापी व्यक्ति को भी पुण्यात्मा बना देता है.

जीवन में सत्संग नहीं होगा तो आदमी कुसंग जरूर करेगा. कुसंगी व्यक्ति कुकर्म कर अपने को पतन के गर्त में गिरा देता है लेकिन सत्संग व्यक्ति को तार देता है महान बना देता है. अच्छे गुरू का संग और सत्संग में.

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इस लाइन के नीचे प्रभु शरणम् एप्प का लिंक है. ये एक धार्मिक प्रयास है. एक बार तो इसे देखना ही चाहिए.

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