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ब्रह्माजी के वरदान के कवच में छुपा असुर, भगवती ने दुर्गा स्वरूप धरकर किया संहारः मां दुर्गा अवतार की कथा

ब्रह्माजी के वरदान के कवच में छुपा असुर, भगवती ने दुर्गा स्वरूप धरकर किया संहारः मां दुर्गा अवतार की कथा

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प्रह्लाद के वंश में दुर्गम नामक एक भयानक, क्रूर और पराक्रमी दैत्य हुआ. नाम के अनुरूप बलशाली दुर्गम जब अट्टाहास करता तो उसके शरीर से प्रचंड अग्नि निकलती थी.

उसे देवताओं की शक्ति से बड़ी ईर्ष्या थी. वह देवताओं की सेना को पराजित करने के लिए तरह-तरह के यत्न करता परंतु सफल नहीं हुआ. दुर्गम को पता चला कि देवता वेदों के कारण अपराजेय हो गए हैं.

देवताओं को वैदिक विधियों से होने वाली आराधना से अतुल्य बल मिल जाता है. दुर्गम समझ गया कि वेदों के कारण देवों की शक्ति क्षीण नहीं होती. तो यदि वेदों को लुप्त या समाप्त कर दिया जाए तो देवता शक्तिहीन होकर पराजित हो जाएंगे.

अतः दुर्गम ने सोचा कि क्यों न वेदों को ही समाप्त कर दिया जाए. इस विचार से दुर्गम हिमालय पर चला गया और ब्रह्माजी को प्रसन्न करने के लिए उसने कठोर तप आरम्भ कर दिया.

हजारों साल की दुर्गम के घोर तप के तेज से देवता भी संतप्त हो उठे. तीनों लोकों में हाहाकार मच गया. अंततः ब्रह्माजी दुर्गम के सामने प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा.दुर्गम ने मांगा- पितामह! यदि आप प्रसन्न हैं तो मुझे सभी वेद प्रदान कर दीजिए. सभी वेदों पर मेरा अधिकार हो जाए. वेदों के साथ ही मुझे ऐसा बल प्रदान कीजिए जिससे देवता, मनुष्य, गंधर्व, यक्ष, नाग, कोई भी मुझे पराजित न कर सके.

ब्रह्माजी ने दुर्गम को इच्छित वर दे दिया. वरदान का प्रभाव ऐसा हुआ कि ऋषि-मुनि वेदों का ज्ञान भूल गए. स्नान, संध्या, हवन, श्राद्ध, यज्ञ जप आदि वैदिक क्रियाएं बंद हो गईं.

सारी पृथ्वी पर हाहाकार मच गया. सारे जगत में अफरा-तफरी मच गई. वर्षा बंद हो गई, चारों ओर अकाल पड़ गया. देवताओं को यज्ञ का भाग मिलना बंद हो गया.

वे शक्तिहीन होकर दैत्यों से पराजित हो गए. अपने प्राण बचाने के लिए असुरों से छिपते हुए वनों में भटकने लगे. ऋषियों ने संकट से मुक्ति के लिए भगवती जगदम्बा की उपासना शुरू की.

भगवती प्रसन्न होकर प्रकट हुईं और दुर्गम से वेदों को छीनकर ऋषियों को दिलाने का आश्वासन दिया. फिर भगवती देवताओं की सेना लेकर दुर्गम का वध करने चल पड़ीं.दुर्गम को जब यह समाचार मिला तो उसने भी अपनी विशाल सेना के साथ देवी का सामना किया. देवों की सेना और असुर सेना में भयंकर युद्ध आरम्भ हो गया. परंतु दुर्गम तो ब्रह्माजी के वरदान की छाया में था.

दुर्गम को देवताओं की सेना किसी भी प्रकार से पराजित नहीं कर पा रही थी. तब भगवती ने अपने अंश से कालिका, तारिणी, बगला, मातंगी, छिन्नमस्तिका, तुलजा, कामाक्षी, भैरवी आदि अनेक देवियों को प्रकट किया और उनके साथ दुर्गम से युद्ध करने लगीं.

अंत में माता जगदम्बा ने सभी अस्त्र-शस्त्रों से युक्त होकर दुर्गम के साथ भीषण संग्राम शुरू किया. माता के अंश से प्रकट हुई देवियां अजन्मा थीं. वह तो उनकी शक्तियों का समूह थीं इसलिए वे ब्रह्माजी के वरदान कवच को भेद सकती थीं.

अंततः भगवती ने दुर्गम का वध कर दिया. माता ने देवताओं को दुर्गम के भय से मुक्ति दिलाई थी इसलिए देवों ने भगवती की दुर्गा नाम से स्तुति करते हुए पुष्पवर्षा की. दुर्गम का वध करने के कारण भगवती के शक्तिस्वरूप का नाम दुर्गा पड़ा.

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