जानिए बुद्धि, लज्जा, हिम्मत और तंदुरुस्ती को भगाकर क्रोध, लोभ, भय और रोग मानव शरीर में कैसे घुस आते हैं?
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एक आदमी जंगल से गुजर रहा था. उसे चार स्त्रियां मिलीं. चारों बहुत गणुवान और संस्कारी परिवार की नजर आती थीं.
उस आदमी ने पहली स्त्री से पूछा- बहन तुम्हारा नाम क्या है? स्त्री ने कहा- मेरा नाम “बुद्धि” है.
उस आदमी ने पूछा- तुम कहां रहती हो? बुद्धि ने उत्तर दिया कि वह मनुष्य के मस्तिष्क में निवास करती है.
फिर आदमी ने दूसरी स्त्री से पूछा- बहन तुम्हारा क्या नाम है? स्त्री ने कहा- “लज्जा.” आदमी ने उससे भी पूछा- तुम कहां रहती हो?
लज्जा ने उत्तर दिया कि वह आंख में रहती है. फिर आदमी ने तीसरी स्त्री से पूछा- तुम्हारा क्या नाम है?
उसने अपना नाम “हिम्मत” बताया. आदमी ने हिम्मत से भी उसका निवास स्थान पूछा. हिम्मत ने बताया- मैं मनुष्य के दिल में रहती हूं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.अब आदमी ने चौथी स्त्री से भी वही प्रश्न किया- तुम्हारा नाम क्या हैं? उसने अपना नाम “तंदुरूस्ती” बताया.
आदमी ने तंदुरुस्ती के निवास स्थान के बारे में पूछा. तंदुरुस्ती ने बताया कि वह मनुष्य के पेट में रहती है.
चारों से बात विचार के बाद वह आदमी आगे बढ़ा. थोड़ा आगे जाने पर उसे उसी वन में उसे चार पुरूष खड़े मिले.
चारों का रूप और स्वभाव ऐसा था जिसे देखकर मन को शोक होता था. वह आदमी उन्हें देखकर ठिठका लेकिन फिर हिम्मत करके उनके पास पहुंचा.
उसने पहले पुरूष से पूछा- भाई तुम्हारा नाम क्या है? उसने उग्र स्वर में उत्तर दिया-मेरा नाम “क्रोध” है.
तुम कहां रहते हो?- आदमी ने पूछ लिया. क्रोध ने कहा कि वह मनुष्य के दिमाग में रहता है.
तब उस आदमी ने कहा- लेकिन मुझे “बुद्धि” मिली थी. उसने कहा कि दिमाग में तो वह रहती है, फिर तुम कैसे रहते हो?
क्रोध ने बताया- जब मैं दिमाग में रहना शुरू कर देता हूं तो बुद्धि वहां से विदा हो जाती हैं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.फिर उसने दूसरे पुरूष से पूछा- तुम्हारा नाम क्या है? उसने बताया- मेरा नाम “लोभ” है. आदमी ने लोभ से भी उसका निवास स्थान पूछा.
लोभ ने कहा- मैं मनुष्य के आंख में रहता हूं. आदमी फिर विचार करने लगा. उसने कहा- आंख में तो “लज्जा” रहती है, तुम कैसे रहते हो?
लोभ ने कुटिलता भरे स्वार में कहा- जब मैं आंख में रहने आ जाता हूं तो लज्जा वहां से प्रस्थान कर जाती हैं.
अब तीसरे की बारी थी. उस आदमी ने तीसरे पुरुष से पूछा- तुम्हारा नाम क्या है? जबाब मिला- “भय”. आदमी ने पूछा- “भय” तुम कहा रहते हो?
भय ने बताया- मैं दिल में रहता हूं. वह आदमी फिर से परेशान हो गया. उसने कहा- भाई भय, दिल में तो हिम्मत रहती हैं फिर तुम वहां कैसे रहते हो?
भय ने जवाब दिया- जब मैं दिल में रहने आता हूं तो हिम्मत वहां से नौ दो ग्यारह हो जाती हैं.
वह अब परेशान हो चुका था. उसने चौथे से भी पूछ ही लिया- भाई तुम्हारा नाम क्या है? चौथे ने बताया- मेरा नाम “रोग” है और मैं मनुष्य के पेट में रहता हूं.
उस आदमी ने कहा- पेट में तुम कैसे रहते हो, वहां तो “तंदुरूस्ती” रहती हैं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.रोग ने कहा- तुम्हारी बात ठीक है लेकिन जब मैं आ जाता हूं तो तंदरूस्ती वहां से रवाना हो जाती हैं.
अब उस आदमी का धैर्य जवाब देने लगा था. क्रोध, लोभ, भय और रोग उसके बहुत पास आ गए. वे बड़े प्रसन्न दिख रहे थे. उन्हें पास देखकर वह बेचैन होने लगा.
उस आदमी ने चारों से कहा- मैं परेशान हो गया हूं. मुझे अकेला रहने दो. यहां से चले जाओ. चारों ने कहा- अभी तक तुम्हारे शरीर में हम प्रवेश नहीं कर पा रहे थे.
अब हमारा समय शुरू होने वाला है. जैसे ही तुम परेशान होकर उग्र होगे, क्रोध समा जाएगा. फिर लज्जा, हिम्मत और तंदुरुस्ती को भगाकर हम सभी प्रवेश कर जाएंगे.
हममें एक औऱ खास बात है, हम यदि मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाएं तो जल्दी बाहर भी नहीं निकलते. तुम सावधान हो जाओ.
कितना सच है यह. हमारी थोड़ी सी असावधानी, सदगुणों को बाहर कर अवगुणों को प्रवेश करा देती हैं.
संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली
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