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किस कारण भगवान श्रीराम ने नर नहीं, वानर सेना के साथ की थी लंका पर चढ़ाई?

किस कारण भगवान श्रीराम ने नर नहीं, वानर सेना के साथ की थी लंका पर चढ़ाई?

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रावण ने पूजा-आराधना करके भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया था. घोर तप शिवजी से उसने ऐसे-ऐसे वरदान प्राप्त किए थे जो देवों, गन्धर्वों और ॠषियों के लिए भी संभव नहीं थे.

महादेव से मिले वरदानों के कारण रावण में अतुलित शक्ति आ गई थी. भगवान शिव की कृपा से प्राप्त शक्तियों के दम पर उसने तीनों लोकों को वश में कर लिया था. इससे देवता बड़े चिंतित थे.

एक बार रावण कैलाश पर्वत पर महादेव के दर्शन करने आया. वहां मुख्य द्वार पर शिव के प्रिय गण नन्दी पहरे पर तैनात थे.

नंदी का मुख वानर जैसा था. रावण ने नंदी के सामने अपनी वीरता का बखान किया फिर नंदी का उपहास करते हुए उसने नंदी से पूछा कि आपका मुख वानर जैसा क्यों है?

नंदी ने शिवभक्त रावण की बात का बुरा न मानते हुए कहा- भैया! जैसे आप शिवजी के उपासक हो, उसी तरह मैं भी हूं. मैंने महादेव से ऐसा ही रूप मांगा है.

नंदी ने बताया- महादेव प्रसन्न होकर मुझे अपना रूप दे रहे थे, लेकिन मैंने उनसे वानर का मुख मांगा. प्रभु ने मेरी इच्छा रखकर यह स्वरूप दिया है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.अहंकारी रावण बोला- मैंने तप से महादेव को प्रसन्न कर दस शीश मांगे परंतु तुम्हें न जाने क्या सूझा जो वानर का मुख मांग लिया? प्रातःकाल वानर के मुख का दर्शन तो अपशकुन होता है. तुम्हारी मूर्खता पर हंसी आती है.

रावण द्वारा बार-बार किए गए अपमान से नंदी क्रोधित हो गए. उन्होंने रावण को शाप देते हुए कहा- जिस वानर का तुम उपहास कर रहे हो, वे वानर ही तुम्हारी मृत्यु के कारण बनेंगे.

अपने दस सिरों पर घमंड करने वाले दसानन जब कोई तपस्वी मानव, वानरों को आगे करके तुम्हारे साथ युद्ध करेगा, तब तुम्हारी मृत्यु निश्चित होगी.

रावण से पीड़ित देवताओं ने श्रीहरि विष्णु को बताया कि शिव के परम भक्त रावण को शिवजी के प्रधान सेवक ने शाप दे दिया है. अब इसे पूर्ण करने का मार्ग बताइए.

भगवान श्रीविष्णु ने कहा- रावण के पापों का घड़ा भर चुका है. उसके वध करने के लिए मैं स्वयं मानव रूप में अवतार लेने वाला हूं.

आप सभी देवतागण वानर के रूप में पृथ्वी पर अवतार लीजिए. इस तरह विभिन्न देवता श्रीहरि के आदेश पर उनका कार्य सिद्ध करने के लिए वानर रूप में अवतार लेने लगे.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.इन्द्र के अंश से बाली हुए तो सूर्य के अंश से बाली के भाई सुग्रीव पैदा हुए. स्वयं ब्रह्मा ने अपने अंश से रीक्षराज जाम्वन्त को पैदा किया और धरती पर भेजा.

श्रीराम का कार्य सफल करने के लिए स्वयं महादेव ने ग्यारहवें रुद्र के रूप में हनुमान का अवतार लिया. अन्य देवता भी वानर रूप में आए और सुग्रीव की सेना में शामिल हुए.

इसी सेना के बल पर श्रीराम ने रावण का संहार किया और नंदी का शाप पूर्ण हुआ. रावण जैसे ज्ञानी द्वारा किसी के मुख का उपहास करना उसके अंत का कारण बना. इस कथा में एक संदेश भी है. किसी भी जीव के रूप का उपहास नहीं करना स्वयं के लिए संकट को निमंत्रण देना है.
(लोमश ऋषि द्वारा वर्णित स्कंद पुराण एवं बाल्मीकि रामायण की कथा)

संकलन व संपादनः राजन प्रकाश

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