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काम हमारा तो दिमाग भी हमारा, वरना हो जाएगी मकड़ी जैसी हालत- जीवन में काम आने वाली उपयोगी कथा

काम हमारा तो दिमाग भी हमारा, वरना हो जाएगी मकड़ी जैसी हालत- जीवन में काम आने वाली उपयोगी कथा

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एक मकड़ी थी. उसने सोचा क्यों न एक ऐसा शानदार जाला बुना जाए जिसमें खूब कीड़े, मक्खियाँ फसें. उनको खाकर वह मजे का जीवन बिताए.

मकड़ी ने कमरे का एक कोना पसंद किया. वहां जाला बुनना शुरू किया. थोड़ी देर बाद आधा जाला बनकर तैयार हो गया. मकड़ी काफी खुश थी. तभी उसने देखा कि एक बिल्ली उसे देखकर हंस रही है.

मकड़ी को गुस्सा आ गया उसने बिल्ली से पूछा- हँस क्यो रही हो? बिल्ली बोली- हंसू नहीं तो क्या करूं. यहाँ मक्खियाँ नही तो हैं नहीं, जगह साफ सुथरी है. यहाँ कौन आयेगा तेरे जाले में जिसे तू खाएगी.

यह बात मकड़ी के दिमाग में जम गई. उसने इतनी अच्छी सलाह देने के लिए बिल्ली को धन्यवाद दिया और जाला अधूरा छोड़कर दूसरी जगह तलाश करने लगी.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.उसने इस बार एक खिड़की पसंद की और उसमें जाला बुनना शुरू किया. कुछ देर तक वह जाला बुनती रही. आधा जाला बन चुका कि तभी एक चिड़िया आयी.

मकड़ी का मजाक उड़ाते चिड़िया बोली- अरे मकड़ी , तू भी कितनी बेवकूफ है. यहां खिड़की पर तेज हवा चलती है, जाला ही उड़ जाएगा. फिर कसेंगे कीड़े इसमें.

मकड़ी को चिड़िया की बात ठीक लगीँ. उसने वह जाला भी अधूरा छोड़ने का मन बना लिया और नया जगह तलाशने लगी.

काफी बीत चुका था. अब उसे भूख भी लगने लगी थी. उसे एक आलमारी का खुला दरवाजा दिखा और उसने उसमें जाला बुनना शुरू किया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.जाला अभी थोड़ा सा ही बुना था कि उसे एक काक्रोच नजर आया. काक्रोच जाले को अचरज भरी नजरों से देख रहा था. मकड़ी ने पूछा- इस तरह क्यों देख रहे हो?

काक्रोच बोला- अरे यहां कहां जाला बुनने चली आयी. ये तो बेकार आलमारी है. अभी यह यहां पड़ी है कुछ दिनों बाद इसे बेच दिया जायेगा फिर तुम्हारी सारी मेहनत बेकार चली जायेगी.

मकड़ी को बात जंची उसने वहां से हट जाना ही बेहतर समझा. बार-बार प्रयास करने से वह काफी थक चुकी थी. उसमें जाला बुनने की ताकत ही नहीं बची थी.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.भूख की वजह से वह परेशान थी. उसे पछतावा हो रहा थी कि अगर कुछ दिनों पहले ही जाला बुन लेती तो अच्छा रहता. अफसोस में वह बैठी रही.

जब मकड़ी निराश हो गई तो उसने पास से गुजर रही चींटी से मदद मांगी.

चींटी बोली- मैं बहुत देर से तुम्हें देख रही थी. तुम बार-बार अपना काम शुरू करती हो और दूसरों के कहने पर उसे अधूरा छोड़ देती हो. जो लोग ऐसा करते हैं, उनकी तो यही हालत होती है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.चींटी ने ऐसा कहकर अपने रास्ते चल पड़ी. मकड़ी सोचने लगी कि अगर उसने जो पहला जाला आधा बनाया था उसे पूरा कर देती तो अभी उसमें बैठी आराम कर रही होती और कुछ न कुछ खाने को भी फंस ही जाता.

अपने रास्ते चली गई और मकड़ी पछताती हुई निढाल पड़ी रही. साथियों, हमारी ज़िन्दगी में भी कुछ ऐसा ही होता है. हम कुछ काम शुरू करते हैं. शुरू -शुरू में तो हम उसके लिए उत्साहित रहते हैं पर दूसरे के कमेंट से उत्साह कम हो जाता है.

हम अपना काम बीच मे ही छोड़ देते हैं बाद में पछताते हैं. अपनी सफलता हमें खुद लिखनी है. रास्ता हमारा है. किसी बिल्ली, चिड़िया या काक्रोच को अपनी मेहनत पर पानी न फेरने दें.

संकलन व संपादनः राजन प्रकाश
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