आपका आत्मविश्वास किसी कारण हिला है तो इसे एक बार पढ़ें.
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इस लाइन के नीचे हमारे फेसबुक पेज का लिंक है उसे क्लिक करके लाइक कर लें.क्या मेरी कोई उपयोगिता है? मुझे लगता है कि शायद मैं धरती पर बोझ हूं. भगवान ने मुझे धरती पर भेजा ही क्यों? मेरा कहीं कोई सम्मान नहीं है. मैं जिंदा क्यों हूं?
रोज ऐसे प्रश्न लोग मुझसे पूछ रहे हैं. उन्हें अपने तरीके से समझाकर उनका हौसला बढ़ाने का प्रयास कर रहा हूं लेकिन अकेले मेरे करने से नहीं होगा. आइए सभी मिलकर यह दायित्व उठाएं क्योंकि हम सभी के आसपास ऐसे लोग हैं जिनका आत्मविश्वास डोल गया है.
हमारा थोड़ा सा नैतिक सहारा उन्हें मिल जाए तो वे फिर से खड़े हो सकते हैं. जिसका मन दुखी है उसे प्रवचन से शांति नहीं मिलती. पर उपदेश कुशल बहुतेरे. इसलिए कोई प्रवचन नहीं करना चाहता, छोटी सी बात कहना चाहता हूं.
हर व्यक्ति की अपनी उपयोगिता है. अपने रूप, गुण, कद-काठी, सामर्थ्य आदि को लेकर हीनभावना मन में न लाएं. यदि आप स्वयं ही अपनी कद्र नहीं करेंगे तो संसार क्यों करेगा? कभी देखा है किसी दुकानदार को अपने सामान की बुराई करते?
ईश्वर हमारे पूर्वजन्म के किसी कर्म के लिए दंडित करने को हमें कोई ऐब दे देते हैं. जैसे जो व्यक्ति हकलाने वालों का उपहास करता है उसे अगले जन्म में गूंगा होना पड़ता है. जो विकलांग को दुखी करता है वह अगले जन्म में अपंग होता है.
जो हमारे साथ बुरा हो रहा है वह हमारे पूर्वजन्मों के कर्म का दंड है परंतु प्रभु की दया असीमित है. तमाम दंड के बीच वह हमें सुधरने और अपना जीवन सुखी करने के लिए कोई न कोई कारण दे ही जाते हैं.
तो यह अच्छा नहीं होगा कि स्वयं को हीन समझने और ईश्वर को कोसने में समय गंवाने के स्थान पर अपने अंदर का दैवीय गुण तलाशकर उसे उभारा जाए, जो कमी रह गई उसकी पूर्ति कर ली जाए.
अपनी नीयत और अपने कर्म ठीक रखिए, बाकी ईश्वर पर छोड़ दीजिए. आपको एक छोटी सी कहानी सुनाता हूं.
एक बड़े तालाब से लगा एक बागीचा था. बागीचा इंतने सुंदर फूलों से भरा था कि लोग दूर-दूर से देखने आते और खुश होकर खूब तारीफ करते.
गुलाब का एक पत्ता रोज लोगों को आते-जाते और गुलाब के फूलों की तारीफ करते देखता. उसे लगता कि हो सकता है शायद ऐसा भी एक दिन आए जब कोई उसकी भी तारीफ करे.
बहुत दिन बीत गए लेकिन किसी ने उसकी तारीफ नहीं की. पत्ता खुद को काफी हीन महसूस करने लगा. उसके मन में तरह-तरह के विचार आने लगे.सभी गुलाब और अन्य फूलों की तारीफ करते नहीं थकते, पर मुझे कोई देखता तक नहीं.
शायद मेरा जीवन किसी काम का नहीं. कहां ये खूबसूरत फूल और कहाँ मैं… ऐसे विचारों में डूबा पत्ता काफी उदास रहने लगा.
दिन यूंही बीत रहे थे कि एक दिन जंगल में आंधी आई. बागीचे के पेड़-पौधे तहस-नहस होने लगे.
देखते-देखते सभी फूल ज़मीन पर गिर कर निढाल हो गए. पत्ता भी अपनी शाखा से टूट गया और उड़ते-उड़ते तालाब में जा गिरा.
पत्ते ने देखा कि उससे कुछ ही दूर पर कहीं से एक चींटी हवा के झोंको की वजह से तालाब में आ गिरी थी और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी.
चींटी प्रयास करते-करते काफी थक चुकी थी और उसे अपना अंत नजर आ रहा था.
तभी पत्ते ने उसे आवाज़ दी- घबराओ नहीं. मैं तुम्हारी मदद कर देता हूं. पत्ते ने चींटी को अपने ऊपर बैठा लिया. आंधी रुकते-रुकते पत्ता तालाब के एक छोर पर पहुंच गया.
चींटी जान बचने और किनारे पर पहुंचकर खुश हो गयी और बोली- आपने आज मेरी जान बचा कर बहुत बड़ा उपकार किया है. सचमुच आप महान हैं. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!यह सुनकर पत्ता भावुक हो गया. उसे तो जीवनभर यही लगता था कि वह किसी योग्य है ही नहीं. उसका अस्तित्व ही निरर्थक है. आज चींटी के कारण उसे पता चला कि उसकी भी उपयोगिता है.
पत्ते ने कहा- धन्यवाद तो मुझे करना चाहिए क्योंकि तुम्हारी वजह से आज पहली बार मेरा सामना मेरी काबिलियत से हुआ जिससे मैं आज तक अंजान था.
आज पहली बार मैंने अपने जीवन का मकसद और अपनी ताकत को पहचाना है. गुलाब तो आंधी में बिखर गया किंतु मैं तो आंधी में भी किसी के काम आ गया. बहन मैंने तो अपना सारा जीवन कुढ़ने में और ईश्वर को कोसने में ही नष्ट कर दिया.
काश, मुझे किसी ने समझाया होता कि मैं भी उपयोगी हूं तो मैं अपना जीवन आनंद के साथ जी लेता.
ईश्वर ने हम सब में कुछ न कुछ अलग गुण दिया है. कई बार हम खुद अपनी काबिलियत से अनजान होते हैं और कोसते रहते हैं. किसी एक काम में असफल होने का मतलब हमेशा के लिए अयोग्य होना नही है.
खुद की काबिलियत को पहचान कर आप फिर से एक नई शुरूआत करने के लिए हर दिन स्वयं को तैयार रखना चाहिए. कई बार अचानक जो रास्ते खुलते हैं वे आपके जीवन की दिशा बदल देते हैं.
इसलिए स्वयं को दीन-हीन असहाय मानकर और ईश्वर को कोसने में समय नष्ट करने से अच्छा है कि अपने अंदर छिपे उस गुण को तलाशकर उसे उभारना जो ईश्वर ने हमारी कमी की भरपाई के लिए डाला है.
यदि आप किसी का नैतिक बल बढ़ाने के लिए, उसकी काउंसलिंग के लिए कोई सहायता चाहते हैं तो मेरे व्हॉटसएप्प नंबर पर संपर्क कर सकते हैं. प्रभु शरणम् एप्प में मेरा नंबर आपको मिल जाएगा.
किसी के आत्मबल को बढ़ाने का कार्य बड़े पुण्य का कार्य है. आपको यह पोस्ट कैसी लगी. ऐसे अनेकों प्रेरक प्रसंग आपको प्रभु शरणम् में मिल जाएंगे. मैं उसका लिंक दे रहा हूं. आप उससे डाउनलोड कर सकते हैं.
– राजन प्रकाश
संस्थापक, प्रभु शरणम्
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