यदि कार्तिक स्नान में नहीं रखते इन बातों का ध्यान तो व्यर्थ जाएगा स्नान: कार्तिक माहत्म्य छठा अध्याय

यदि कार्तिक स्नान में नहीं रखते इन बातों का ध्यान तो व्यर्थ जाएगा स्नान: कार्तिक माहत्म्य छठा अध्याय

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पिछली कथा से आगे…
नारदजी बोले- दो घड़ी रात बाकी रह जाए तभी उठकर तिल, कुशा, अक्षत, फूल, धूप आदि लेकर पवित्र होकर किसी नदी, तालाब, कुआं आदि जलाशय के किनारे जाएं. मनुष्य द्वारा बनाई नहरों एवं देवों द्वारा बताई नदियों में स्नान का दस गुणा फल है. तीर्थ में उसका भी दुगुना.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.भगवान विष्णु का स्मरण करके स्नान का संकल्प कर तीर्थ एवं देवता आदि को क्रम से अर्ध्य दें और कहें- हे हृषिकेश इस मेरे अर्ध्य को ग्रहण करिए आपको नमस्कार है. बैकुठ में, प्रयाग में अथवा बद्रिकाश्रम जहां मुनि वेद एवं यज्ञों सहित जहां तीन प्रकार से विष्णु ने पदस्थापित किया है वहां सभी देवता मेरी रक्षा करें. हे कृष्ण कार्तिक मास में दिए मेरे अर्ध्य को ग्रहण करिए.

भागीरथी, विष्णु, शिव, सूर्य, आदि को नमस्कार करके जल में प्रवेश करें और नाभि तक जल में समाकर विधिपूर्वक स्नान करें. गृहस्थ आंवले चूर्ण और तिल मलकर स्नान करें.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.विधवा स्त्री और संन्यासी तुलसी की जड़ की मिट्टी मलकर स्नान करें. परंतु सप्तमी, द्वादशी और त्रयोदशी को आंवला और तिल न लगाएं. स्नान का मंत्र पढें- जिन प्रभु ने देवताओं के कल्याण के निमित्त रूप धारण किया था, वह प्रभु कृपा करके मुझे पवित्र करें.

विष्णु की आज्ञा से इंद्र सहित सब देवता कार्तिक के व्रत रखने वालों की रक्षा करें. व्रती मनुष्य इस प्रकार स्नान करके हाथ में पवित्री धारण कर देव, ऋषि और पितरों का तर्पण करें. कार्तिक मास में तर्पण में जितने तिल होते हैं उतने वर्ष पितर स्वर्ग में वास करते हैं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.उसके बाद जल से निकलकर पवित्र वस्त्र धारण कर प्रातःकाल के कार्यों का संपादन करके श्रीहरि का पूजन कीर्तन करें. तीर्थ औऱ देवताओं का स्मरण करके भक्तिपूर्वक गंध पुष्प और फलों से अर्घ्य दें. वेदपाठी ब्राह्मणों का पूजन करें.

फिर हरिप्रिया तुलसीजी की परिक्रमा करें, पूजन करें और प्रार्थना करें- देवताओं ने प्रथम तुम्हें बनाया, मुनियों ने पूजा इसलिए हे तुलसी आप हमारे पापों का हरण करें. भक्तिपूर्वक ऊपर कही विधियों का पालन करने वाला नारायण की सालोक्यता प्राप्त करता है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.रोग और पापों का नाश करने वाला, उत्तम बुद्धि, पुत्र, धन और मुक्ति प्रदान करने वाला विष्णु भगवान को प्रिय कार्तिक जैसा दूसरा कोई व्रत नहीं है. छठा अध्याय पूर्ण. कथा जारी रहेगी…

संकलन व संपादन- राजन प्रकाश
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