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सृष्टि की रचना से पहले ब्रह्मा ने अग्नि, वरुण, पवन आदि देवों की उत्पत्ति की. लेकिन यह तय नहीं हो पा रहा था कि ये देवगण निवास कहां करेंगे.
उन्होंने ब्रह्मा से कहा- परमपिता हम पंचभूत हैं. आप हमारे अंश से सृष्टि रचना के इच्छुक हैं. परंतु हम भूख-प्यास से पीड़ित हैं.पहले हमारे रहने का प्रबंध करें ताकि हम आहार ग्रहण कर सकें.
उनकी प्रार्थना पर ब्रह्मा ने एक गौ का शरीर बनाकर दिखाया और पूछा कि क्या इसमें निवास करेंगे? देवों ने कहा- यह शरीर तो उत्तम है किंतु हमारे उपयुक्त नहीं है. कुछ और प्रबंध करें.
फिर ब्रह्मा ने घोड़े का शरीर बनाया. देवों ने अश्व को अच्छी तरह देखकर कहा कि इससे भी उनका काम नहीं चलने वाला. परमपिता के सामने उलझन बढ़ती जा रही थी.
तब परमात्मा ने विचार करके मनुष्य का शरीर बनाया. देवताओं को यह शरीर भा गया. उन्होंने ब्रह्मा से कहा यह सुंदरतम रचना है और हम इसमें रहेंगे.
ब्रह्मा ने सभी देवों को कहा कि इस मनुष्य शरीर में अपने योग्य उत्तम स्थान देखकर प्रवेश कर जाओ.
अग्नि ने उदर यानी पेट में स्थान बनाया. वरुण ने रसना यानी जीभ में वायुदेव ने प्राणवायु के रूप में नाक में, आकाश ने शरीर के हर रिक्त भाग में डेरा जमाया.
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