परशुराम कथा- राम को हुए महादेव के दर्शन, शिवकृपा से राम से बन गए परशुरामः भाग-5

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पिछली कथा से आगे…
शिकारी के मुंह से इस खरी-खरी सुनकर राम को बहुत अचरज हुआ. एक नीच कर्म करने वाला व्याध आखिर मां की हत्या से लेकर अब तक की गयी तपस्या के बारे में कैसे जानता है. राम ने आश्चर्य से भरकर शिकारी से पूछा- आपका वास्तविक परिचय क्या है?
आप इंद्र, यम, अग्नि, वरुण, कुबेर, ब्रह्मा, सोम अथवा गुरु हैं. पर मुझे जाने क्यों ऐसा लगता है कि आप भगवान शिव ही हैं जो मेरी परीक्षा लेने आये हैं. आपकी वाणी से भी लगता है कि आप शिकारी तो नहीं हो सकते. मैं आपको प्रणाम करता हूं. कृपया वास्तविक रूप में दर्शन दें.
इतना कह कर राम तत्काल पद्मासन लगा कर ध्यान मुद्रा में बैठ गये. शीघ्र ही उन्होंने अपनी सारी इंद्रियों को नियंत्रित किया और हृदय को मन में स्थित कर जो आंखें खोली तो सामने साक्षात भगवान शिव को पाया.
दिल में हर्ष के भाव ऐसे भरे कि आँख से खुशी के आंसू टपक पड़े, वे चरणों में गिर पड़े. साष्टांग प्रणाम के बाद गदगद कंठ से बोले- देवेश्वर आप मुझे अपनी शरण में लीजिये. मैं आप को पहचान नहीं पाया, मेरी गलतियों को क्षमा कर दीजिये.
भगवान शिव बोले- मैं आपकी तपस्या से प्रसन्न हूं. आप मेरे प्रिय हैं. आपकी कामना जानता हूं. पर आप अभी इन अस्त्रों के धारण करने योग्य नहीं हैं. ये अति रौद्र अस्त्र हैं. आपको इससे भी कठोर तप तथा धरती के सभी प्रमुख तीर्थों में स्नान कर शरीर को पवित्र करने की आवश्यकता है. उसके बाद इन अस्त्रों को प्राप्त कीजिए.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:mbo]
यह कहकर शिवजी अंतर्धान हो गये. राम ने पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करते हुये सभी तीर्थों में स्नान ही नहीं किया वरन उपवास, जप, तप, होम एवं देवालयों में दर्शन इत्यादि भी किया. पूरी तरह से पवित्र होकर वहीं लौट आए जहां शिवजी के दर्शन हुए थे.
राम ने पुनः कठोर तप कर भगवान शिव व माता पार्वती को प्रसन्न किया. यह वह समय था जब असुरों ने देवताओं को भीषण युद्ध में बुरी तरह हरा दिया और उनका सब वैभव लूट लिया था. सारे देवता हाथ जोड़ कर भगवान शंकर के पास पहुंचे.
देवताओं ने भगवान शिव की स्तुति की और कहा- हम आपकी शरण में हैं. असुरों के अत्याचार से मुक्ति दिलाएं. भगवान शंकर बोले- हिमवान पर्वत पर एक मुनिपुत्र तपस्या कर रहा है. आप वहां जायें और उसे लेकर आएं.
शिवजी का आदेश पाकर महोदर नामक देव राम के पास भेजे गये. वे हवा से भी तेज चले और शीघ्र ही हिमवान पर्वत पहुंचे जहां राम तपस्या कर रहे थे. उन्होंने राम से कहा- हे तपस्वी आपको भगवान शिव याद कर रहे हैं. उन्होंने आपको बुलाया है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:mbo]
राम महोदर के साथ भगवान शिव के दर्शन को चले. महोदर ने उन्हें क्षण भर में शिवजी के समक्ष ला खड़ा किया. राम ने शिवजी के चरणों में साष्टांग दंड़वत करते हुए आशीर्वाद मांगा.
भगवान शिव ने उन्हें उठाया और बोले- राम ये सारे देव दैत्यों के सताए हुए हैं. दानवों ने इन्हें देवलोक से निकाल बाहर किया है. आप सभी दैत्यों का अंतकर इनकी समस्या का समाधान करें. मैं मानता हूं कि आप यह करने में समर्थ हैं.
राम ने कहा- हे महादेव आप सर्वज्ञ हैं, आपसे क्या छिपा. पर जिन दानवों से इंद्र समेत सारे देवता नहीं जीत सके उनका अंत मैं कैसे करूंगा. न तो मैं अस्त्र का विशेषज्ञ हूं न युद्ध कौशल का जानकार. मैं शस्त्रविहीन और अकेला भी हूं.
भगवान शिव ने कहा- मेरे प्रसाद से आप सभी शत्रुओं का हनन करने में समर्थ होंगे. इतना कहकर भगवान शिव ने तत्काल उन्हें कालाग्नि के समान शैव तेज प्रदान कर दिया.
भगवान ने कहा- आप युद्ध करें. मेरे प्रभाव से आपमें कौशल स्वतः विकसित हो जाएगा. आप बिना सीखे ही हर तरह के अस्त्र-शस्त्र चलाने में और युद्ध कौशल में निपुण हो जाएंगे. जाओ दैत्यों का हनन करो.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:mbo]
मेरा यह एक अस्त्र ही आपको सभी दैत्यों को मार गिराने में सक्षम बना देगा. यह कहते हुये भगावन शिवशंकर ने सभी आयुधों, अस्त्रों शस्त्रों के अभिभावक रूपी परशु (फरसा) उन्हें सौंप दिया.
परशु को धारण कर राम परशुराम हो गए. देवों ने उनकी स्तुति की. फिर परशुराम भगवान शम्भू को प्रणामकर सूर्य की किरणों के समान चमकदार दिव्य परशु को लेकर दैत्यों के साथ युद्ध को निकल पड़े. असुरों के साथ उनका भयानक युद्ध हुआ.
परशु के प्रहार से परशुराम ने असुरों का नाश कर दिया. उनके पराक्रम के आगे दैत्य नहीं ठहरे. जो जीवित बचे वे भाग गए. देवताओं को उनका देवलोक फिर से प्राप्त हो गया था. उन्होंने परशुराम की स्तुति की.
भगवान शिव के दिए काम को पूरा करने के बाद परशुराम ने शिवजी का ध्यान किया और उन्हें प्रणाम किया. मन में उनकी पूजन की प्रतिज्ञा और कंधे पर दिव्य परशु के धरे परशुराम बनने अपने आश्रम को लौट आए. पितामह भृगु का वचन भी पूरा हुआ था.
समस्त युद्धकौशल के ज्ञाता परशुराम ने फिर क्या किया. यह प्रसंग कल के पोस्ट में.
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