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परशुराम कथाः तप में रत राम को शिकारी ने सुनाई खरी-खोटी, माता के हत्यारे को नहीं देते शिवजी दर्शन. भाग-3

परशुराम कथाः तप में रत राम को शिकारी ने सुनाई खरी-खोटी, माता के हत्यारे को नहीं देते शिवजी दर्शन. भाग-3

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पिछली दो कथाओं में आपने पढ़ा कि पितामह भृगु के आदेश से राम शिवजी से समस्त शस्त्रों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए हिमवान पर्वत पर घोर तप करने लगे. उनके तप की चर्चा देवलोक तक होने लगी.

तभी एक व्याध राम के पास आया. उसने स्वयं को इस क्षेत्र का स्वामी बताया. विशालकाय व्याध ने कहा स्वयं इंद्र उसके क्षेत्र में अतिक्रमण का साहस नहीं जुटा पाते फिर राम ने ऐसा दुस्साहस क्यों किया. व्याध और राम के बीच तर्क होने लगा.

व्याध यानी शिकारी के कारण राम का तप बाधित हो रहा था पर यह जानने के लिए आखिर यह है कौन, कहीं तप भंग करने के लिए आया कोई असुर तो नहीं है, यह पता लगाने के लिए राम उस शिकारी की बात ध्यान से सुन रहे थे.

शिकारी ने अपने पराक्रम के बारे में बताकर राम से पूछा- आप क्यों आए हैं? यहां से कहीं और जाने का कोई इरादा है अथवा नहीं. ऐसा लगता है कि आप मेरे क्षेत्र में कोई सिद्धि प्राप्त करने की चेष्टा कर रहे हैं. आपको उसका अभिप्राय बताना होगा.

राम बात सुनकर एक क्षण हंसे. फिर सोचने लगे कि इसकी वाणी तथा स्पष्ट उच्चारण इसके शरीर और इसके कर्म के अनुसार नहीं है. यह वही है जो दिख रहा है अथवा कोई माया है. कुछ सोचने के बाद राम ने गंभीर वाणी में बोलना आरंभ किया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:mbo]
मैं ऋषि जमदग्नि का पुत्र भार्गव राम हूं. मैं अपने गुरु की आज्ञा से यहां तप करने आया हूं. मैं भगवान शिव की प्रसन्नता हेतु तपस्या कर रहा हूं. जब तक शिवजी मुझे यहां आकर अपने प्रत्यक्ष दर्शन नहीं देते, मैं कहीं नहीं जाने वाला.

हे व्याध! यदि यह आपका राज्य है तो मैं आपका अतिथि हूं. इस नाते मैं सम्माननीय हुआ. आपको तो अतिथि की रक्षा और आवभगत करनी चाहिए. फिर मैं तो तपस्वी हूं, आपका राज्य पवित्र कर रहा हूं. आप यदि मेरे आश्रम के निकट उपस्थित रहेंगे तो मेरे तप और नियम की हानि होगी.

आपको भी इससे पाप लगेगा. ऐसे में अच्छा होगा कि आप भी दूसरे लोकों में निर्द्वंद्व विचरण करें और इस स्थान पर मुझे तपस्या करने दें. यह आपके लिए भी श्रेयष्कर होगा कि आप कहीं और जाएं.

यह सुनकर व्याध की आंखें क्रोध से लाल हो गईं. क्रोध में भरकर उसने कहा- विप्रवर आप दूसरे के क्षेत्र में अतिक्रमण कर रहे हैं और उसी से कह रहे हैं कि वह आप से दूर रहे. मैंने किसी का क्या नुकसान किया है, क्या बुराई की है?हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:mbo]
मेरा वर्ण व्याध का है. उसी के अनुरूप शिकार का कार्य करता हूं. यदि मैं इतना बुरा हूं और मेरे समीप रहने से आपको इतना ही कष्ट है तो आपको मेरे निवास स्थान को छोड कर तत्काल कहीं चले जाना चाहिए.

आप मुनि हैं समस्त विश्व में जा सकते हैं पर मेरा यही शिकार क्षेत्र यही निवास है मैं कहां जाऊंगा. मैं क्यों बनाऊं दूरी, आप ही कहीं दूर चले जाइए. मैं तो यहां से कहीं नहीं जाने वाला, आप सोचें कि आपको क्या करना है.

व्याध की बात से राम को भी क्रोध हुआ. वह बोले- तुम जीवहत्या करते हो. तुमसे बड़ा पापी कोई नहीं. सभी जीवों को प्राण से प्रेम होता है और तुम उसका ही हरण करते हो. सभी जंतु तुम्हें धिक्कारते हैं. तत्काल यहां से चला जा. अब और रुके तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा.

व्याध बोला- आपकी बात से मुझे क्रोध तो आता है पर आप विप्र हैं इसलिए मैं चुप हूं. भगवान रुद्र को प्रसन्न करने का आपके प्रण पर मुझे हंसी आती है. इस साधारण सी तपस्या से आप शिवजी को प्रसन्न करेंगे. आपको कुछ ऐसा करना होगा जो किसी ने अब तक न किया हो.

सच तो यह है कि आपने जो अपनी माता का वध किया है उससे हर ओर आपकी निंदा हो रही है. उसी से बचने को आप यहां छिपे हैं. ब्रह्महत्या जैसे जघन्य पाप से मुक्ति के लिए तप कर रहे हैं. गुरुपत्नी से व्याभिचार और मां के द्रोही की तो कहीं से क्षमा नहीं है. आप मुझे हिंसक कह रहे हैं!हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:mbo]
व्याध तैश में बोलता रहा- हम अपने व्याध नियम धर्म के अनुसार उतने ही प्राणी मारते हैं जिससे हमारे कुटुंब का पेट भऱ जाए. उसके अतिरिक्त हिंसा नहीं करते. हमारे लिए यही वृत्ति विधाता ने तय की है. हम अपने कर्मों से नहीं डिगते. आप अपने कर्म देखिए.

अपने वृद्ध पिता को त्यागकर यहां पर हैं. जिस माता ने अपने स्तनों से दूध पिलाकर पाला उसका सिर काटकर आपने खून बहाया. उस पाप को धोने के लिए तप का स्वांग कर रहे हैं. मेरा मुंह न खुलवाएं. इतना ही कहूंगा कि इन सब कारणों से आपका यह तप निष्फल है.

मैं आपका आचरण भली भांति जानता हूं. आप अन्यत्र चले जाइए जहां आपके कार्यों को कोई जानता न हो. मेरे विचार से आप व्यर्थ ही शरीर को कष्ट दे रहे हैं. ऐसे पातकी पर शिव की कृपा होगी इसकी दूर दूर तक कोई आशा नहीं है.

शिकारी को राम के बारे में सबकुछ पता था. इस बात से राम हैरान थे. राम ने माता का वध क्यों और किसके आदेश पर किया था? यह प्रसंग कुछ ही देर में अगले पोस्ट में पढ़ें.
यह प्रसंग अगली पोस्ट में….
संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्
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