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शिवलिंग पूजा विधि: शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही तरीका और नियम

शिवलिंग पूजा विधि: शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही तरीका और नियम

महादेव की कृपा पाने के लिए शिवलिंग पूजा विधि का ज्ञान होना आवश्यक है। बहुत से भक्त भक्ति में शिवलिंग पर जल तो चढ़ाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग क्या है और कैसे बना?

आज के इस लेख में हम जानेंगे शिवलिंग की उत्पत्ति, शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही तरीका, चंदन लगाने के नियम और वो सभी बातें जो आपको एक शिव भक्त के रूप में जाननी चाहिए।

इस पोस्ट में आप जानेंगे:

  • शिवलिंग क्या है और शिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई?

  • शिवलिंग कितने प्रकार के होते हैं?

  • शिवलिंग की प्रतिष्ठा कैसे करनी चाहिए?

  • शिवलिंग का आकार-प्रकार कैसा होना चाहिए? 

  • शिवलिंग पूजा विधि: जल चढ़ाने का सही तरीका

  • शिवलिंग पर कौन सा चंदन लगाना चाहिए और क्यों?

  • शिवलिंग को कौन छू सकता है? (महत्वपूर्ण नियम)

  • शिवलिंग का टूटना शुभ है या अशुभ?

शिव पुराण में प्रसंग आता है कि नैमिषारण्य में ऋषियों ने सूत जी से शिवलिंग और शिवलिंग की पूजा के संदर्भ में समस्त ज्ञान देने को कहा। ऋषियों के अनुरोध पर सूतजी ने उन्हें वह सब बताना शुरू किया जो उन्हें उनके गुरुदेव भगवान वेद व्यास जी ने बताया था। प्रभु शरणं के प्रेमियों के लिए हम विस्तृत शिवलिंग पूजा विधि को यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं।

1. शिवलिंग क्या है और शिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई?

शिवपुराण के अनुसार, शिवलिंग केवल एक पत्थर नहीं, बल्कि निराकार ब्रह्म का प्रतीक है। सृष्टि की उत्पत्ति के समय ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। तब एक विशाल अग्नि स्तंभ प्रकट हुआ। इसका न आदि था न अंत। यह स्वयं शिव का स्वरूप था। इसे ही शिवलिंग कहा गया। शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग को सृष्टि का आधार और निराकार शिव का प्रकाश पुंज माना गया है।

2. शिवलिंग के प्रकार: चल और अचल शिवलिंग

शिव पुराण में मुख्य रूप से दो प्रकार के शिवलिंग बताए गए हैं:

अचल शिवलिंग

वे शिवलिंग हैं जो मंदिर में प्रतिष्ठित होते हैं। इनकी प्रतिस्थापना और प्राण प्रतिष्ठा विधि बहुत विषद है, इसलिए हम यहाँ घर में होने वाली पूजा पर ध्यान देंगे।

चल शिवलिंग

चल शिवलिंग वे हैं जो घरों में स्थापित होते हैं। इनमें पार्थिव शिवलिंग, बाणलिंग या रत्नजड़ित शिवलिंग प्रमुख हैं। घर के लिए छोटे पार्थिव शिवलिंग या नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा सर्वोत्तम मानी गई है।

3. पार्थिव शिवलिंग पूजन की महिमा

सूत जी ने शिवलिंग पूजा विधि में पार्थिव शिवलिंग की पूजा को सर्वश्रेष्ठ बताया है। बाणासुर ने नर्मदा तट पर प्रतिदिन एक करोड़ पार्थिव शिवलिंग की स्थापना करके पूजन किया था, जिससे शिवजी उसके वश में हो गए थे। इसी के चलते बाणलिंग की भी विशेष महिमा है।

4. पार्थिव शिवलिंग पूजा विधि (विस्तृत विधि और मंत्र)

पार्थिव शिवलिंग के निर्माण और पूजन में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

  • निर्माण: उत्तम नदी की मिट्टी लें और दूध से शोधन करें।

  • आह्वान: गणेश, विष्णु, सूर्य और माता पार्वती का आह्वान करें।

  • परिमाण: शिवलिंग की लंबाई 22 अंगुल से अधिक नहीं होनी चाहिए।

  • पूजा: अग्निहोत्र के साथ षोडषोपचार विधि का पालन करें।

5. शिवलिंग पूजा विधि: जल चढ़ाने का सही तरीका

शिवलिंग पर जल अर्पण करना भक्ति का आधार है। इसे करने का सही तरीका यह है:

  • दिशा: शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय अपना मुख उत्तर दिशा की ओर रखें।

  • पात्र: तांबे या पीतल के पात्र का उपयोग करें।

  • धारा: जल की धारा अत्यंत धीमी और निरंतर होनी चाहिए।

  • मंत्र: जल चढ़ाते समय मन ही मन “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते रहें।

  • सावधानी: शिवलिंग की जलाधारी को लांघना नहीं चाहिए। जल के साथ ही बिल्वपत्र भी श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।

6. शिवलिंग पूजन विधि: षोडषोपचार एवं मंत्र

पूजा के समय “मानो महान्तम्” मंत्र से शिवजी का आह्वान करें। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से पूजन करें:

  • पाद्य: “ऊँ नमोsस्तु नीलग्रीवाय” मंत्र से।

  • अर्घ्य: रूद्र गायत्री मंत्र (ॐ तत्पुरुषाय विद्महे…) से।

  • आचमनीय: महामृत्युंजय मंत्र से।

  • स्नान: “पयः पृथ्वियां पयो अंतरिक्षे” मंत्र से।

  • वस्त्र: “नमो घृष्णवे” मंत्र का उच्चारण करें।

  • धूप-दीप: “ऊँ कपर्दिने नमः” और “नमः आशवे” का प्रयोग करें।

पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना अवश्य करें: “अज्ञानाद्यदि वा ज्ञानात् जपं पूजादिकं मया। कृतं तदस्तु सफलं कृपया तव शंकर।।”

7. शिवलिंग पूजा के महत्वपूर्ण नियम

शिवलिंग पर कौन सा चंदन लगाएं?

शिवलिंग पर हमेशा सफेद चंदन लगाना चाहिए। यह शीतलता का प्रतीक है और महादेव को अत्यंत प्रिय है।

शिवलिंग को कौन छू सकता है?

शुद्ध और पवित्र मन से पूजा करने वाला कोई भी भक्त शिवलिंग को स्पर्श कर सकता है। केवल रजस्वला स्त्री (मासिक धर्म के दौरान) को स्पर्श से बचना चाहिए।

शिवलिंग का टूटना शुभ है या अशुभ?

घर में रखा शिवलिंग यदि खंडित हो जाए, तो इसे विसर्जित कर देना चाहिए और नया शिवलिंग स्थापित करना चाहिए। खंडित शिवलिंग की पूजा फलदायी नहीं होती।

8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • क्या स्त्रियाँ शिवलिंग पूजा कर सकती हैं? हाँ, शिव पुराण के अनुसार हर वर्ण की महिलाओं को शिव पूजा का समान अधिकार है।

  • क्या शिवलिंग का प्रसाद ग्रहण करना चाहिए? शिवलिंग से स्पर्श होने के बाद प्रसाद परम पवित्र और हर प्रकार से ग्रहण योग्य हो जाता है।


(संकलन व संपादन: राजन प्रकाश)

(विस्तृत जानकारी के लिए किसी वेदपाठी विद्वान से परामर्श अवश्य लें।)


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