Advertisement728 × 90

महाशिवरात्रि पर्व की संपूर्ण पूजा विधि व व्रत कथा

महाशिवरात्रि पर्व की संपूर्ण पूजा विधि व व्रत कथा

lord-shiva-parvati-vivah-photos-1920x1080

इस पोस्ट को पढ़ने के बाद महाशिवरात्रि की पूजा से जुड़ी सारी जानकारियों से आप परिचित हो जाएंगे. आपको कहीं और भटकना नहीं पड़ेगा, यह हमारा दावा है. शिवरात्रि पूजा का महत्व बताने से पहले आपको एक जानकारी देने की अनुमति चाहते हैं.

आपने इस पेज को क्लिक किया इसका अर्थ है कि आपमें शिवजी के प्रति श्रद्धा है. आपको शिवजी से जुड़ी जानकारियों की ललक है, शिव महिमा को जानने-समझने की ललक है. उसे सुनकर आनंदित होते हैं.

शिवजी की विधिवत पूजा कैसे होती है, अभिषेक के नियम क्या हैं. प्रदोष कैसे करना चाहिए. शिवजी के किन मंत्रों से पूजा करने से प्राप्त होते हैं मनचाहे अभीष्ट. उन मंत्रों के जप की विधि क्या है? ये सारी जानकारी देने वाला एक एप्प है-महादेव शिव शंभू. इसमें आप संक्षिप्त और सरल रूप में शिवपुराण भी पढ़ सकते हैं. आप स्वयं आजमाकर देखें.

इस लाइन के नीचे एप्प का लिंक हैं. डाउनलोड करें- MAHADEV SHIV SHAMBHU APPS.

MAHADEV SHIV SHAMBHU एप्प डाउनलोड के लिए यह लिंक क्लिक करेंः
Android महादेव शिव शंभुऐसे करें महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का पूजन-

तीन रात्रियों को विशेष माना गया है- कालरात्रि, महारात्रि और महोरात्रि. दीपावली और होली की रात्रि को कालरात्रि, शिवरात्रि को महारात्रि तथा नवरात्र में अष्टमी की रात्रि को महोरात्रि कहा जाता है. प्रत्येक उत्सव का अपना विशेष महत्व है लेकिन ये तीन अवसर पूजा, अनुष्ठान एवं साधना के लिए प्रमुख माने जाते हैं.

फाल्गुन मास की कृष्णपक्ष की त्रयोदिशी तिथि को महाशिवरात्रि होती है. इसी दिन भगवान शिव-पार्वती विवाह बंधन में बंधे थे. यह रात्रि शिव और शक्ति के मिलन की रात्रि है. शिव पुरुष के प्रतीक हैं और पार्वती प्रकृति की.

पुरुष और प्रकृति के मिलन से ही सृष्टि की कल्पना है. इसलिए महाशिवरात्रि को पर्वों में विशेष माना गया है. यह ऐसा पर्व है जिस दिन सैव, शाक्त, वैष्णव, गांण्पत्य, सौर इन सबका भेद मिट जाता है. सभी पुरुष और प्रकृति के इस महामिलन के दिवस का उत्सव मनाते हैं.

महाशिवरात्रि को शिवलिंग की पूजा कैसे करें-

महारात्रि को स्वनिर्मित शिवलिंग के पूजन का विशेष महत्व शास्त्रों और धर्म ग्रंथों में वर्णित है. मंदिर के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व है. बहुत से लोग महाशिवरात्रि को स्वयं पार्थिव लिंग बनाकर उसकी पूजा करते हैं.

पार्थिव शिवलिंग बनाने और उसके पूजन की विधि जो शिवपुराण में कही गई है वह हमने महादेव शिव शंभू एप्प में बताई है. आप वहां से देख सकते हैं. जरूरी नहीं कि आप शिवलिंग बनाएं हीं.

मंदिर आदि में शिवलिंग की विधिवित पूजा का फल है क्योंकि महाशिवरात्रि के दिन शिवजी अपने अंशरूप में प्रत्येक शिवलिंग में समा जाते हैं.

महाशिवरात्रि को शिवजी की पूजा का सबसे उत्तम काल प्रदोष काला माना जाता है जब सूर्य चुके होते हैं परंतु उनकी थोड़ी सी लालिमा शेष रह जाती है.

अगले पेज पर जानिए मंत्र सहित पूजा की विधिप्रदोष काल में श्वेत वस्त्र धारण कर कुश के आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर बैठें.

सर्वप्रथम गंगाजल, पंचामृत और गुलाब-जल से इन मंत्रों का उच्चारण करते हुए एक धार में स्नान कराएं-

‘ॐ भवम् देवम् तर्पयामि’,
ॐ सर्व देवम् तर्पयामि,
ॐ ईशान देवम् तर्पयामि,
ॐ पशुपति देवम् तर्पयामि,
ॐ रुद्र देवम् तर्पयामि,
ॐ उग्र देवम् तर्पयामि,
ॐ भीम देवम् तर्पयामि,
ॐ महान्तम् देवम् तर्पयामि!’

वस्त्रः

शिवजी का स्नान कराने के बाद ‘ॐ साम्ब सदा शिवाय नम:’ बोलते हुए वस्त्र दें.

तिलकः

‘ॐ नम: शिवाय कालाय नम:’ बोलते हुए केसर युक्त चन्दन का तिलक करें.

अक्षत-पुष्पः

‘ॐ नम: शिवाय कल विकरणाय नमो नम:’ से अक्षत और पुष्प अर्पित करें.

बेलपत्रः
तीन दल वाले पांच बेल-पत्र एक-एक मंत्र का उच्चारण कर शिवलिंग के ऊपर अर्पित करेः

‘ॐ आकाश तत्वम् पार्वती महेश्वराभ्याम् नम:

ॐ वायु तत्वम् सती महेश्वराभ्याम् नम:!

ॐ जल तत्वम् उमा महेश्वराभ्याम् नम:!

ॐ पृथ्वी तत्वम् प्रकृति तत्वाम् नम:!

ॐ अग्नि तत्वाम् महेश्वराभ्याम् नम:!

ॐ अग्नि तत्वाम् शक्ति महेश्वराभ्याम् नम:!’

धूपः

इसके बाद ‘ॐ नम: शिवाय भवोद्भवाय भूतद्मनाय नम:’ से धूप दिखाएं.

दीपः

‘ॐ नम: शिवाय मनोन्मनाय नम:! से दीप दिखाएं.

नैवैद्य-तांबुलः

‘ॐ नम: शिवाय!’ से नैवेद्य और जायफल चढ़ाएं. इसके बाद लौंग इलायची के साथ ताम्बूल यानी पान अर्पित करें.

पूजन के बाद शिव-शक्ति के स्वरूप का ध्यान करते हुए ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र की माला जाप कर एक माला शिव-गायत्री की भी जपें.

‘ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।’

मंत्र का जाप कर आरती और पुष्पांजलि अर्पित कर अनुष्ठान पूर्ण करना चाहिए.शिवरात्रि की रात्रि भजन कीर्तन के साथ सपरिवार रात्रि जागरण करने का विशेष महत्व है.

प्रदोष बेला में शिव तांडव स्तोत्र का पाठ या श्रवण भी करना चाहिए. शिवरूद्राष्टकम् व शिवसहस्त्रनाम का पाठ करते हुए महादेव-पार्वती का ध्यान करके इच्छित वरदान मांगना चाहिए. ये सारे मंत्र आपके महादेव शिव शंभु एप्प में हैं. महाशिवरात्रि के व्रत की कथा भी सुननी चाहिए. कथा इस प्रकार है-

भगवान शिव ने देवी पार्वती को महाशिवरात्रि के व्रत की कथा सुनाई थी. इस कथा को सुनें और परिवार के बड़े-बुजुर्गों को सुनाएं तो पुण्य होता है.

व्रत कथाः

वाराणसी के वन में गुरुद्रुह नामक एक भील रहता था. वह जंगली जानवरों का शिकार करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता था. एक बार शिवरात्रि के दिन वह शिकार करने वन में गया. उस दिन उसे दिनभर कोई शिकार नहीं मिला और रात भी हो गई.

तभी उसे वन में एक झील दिखा. उसने सोचा मैं यहीं पेड़ पर चढ़कर शिकार की राह देखता हूं. कोई न कोई प्राणी यहां पानी पीने आएगा. यह सोचकर वह पानी का पात्र भरकर बिल्ववृक्ष (बेल के पेड़) पर चढ़ गया.

उस वृक्ष के नीचे शिवलिंग स्थापित था.

थोड़ी देर बाद वहां एक हिरनी आई. गुरुद्रुह ने जैसे ही हिरनी को मारने के लिए धनुष पर तीर चढ़ाया तो बिल्ववृक्ष के पत्ते और जल शिवलिंग पर गिरे.

इस प्रकार रात के प्रथम प्रहर में अंजाने में ही उसके द्वारा शिवलिंग की पूजा हो गई.

तभी हिरनी ने उसे देख लिया. उसने शिकारी से पूछा कि तुम क्या चाहते हो.

शिकारी पूरे दिन भूखा-प्यासा व्रत में रह गया था. अंजाने में उससे शिवजी की बेल पत्रों और जल के साथ आराधना हो गई थी इसलिए उसमें पशु-पक्षुओं की बोली समझने की शक्ति आ गई.शिकारी ने कहा- मैं मनुष्य की बोली में बात करती हिरणी को पहली बार देख रहा हूं. अवश्य ही तुम कोई असाधारण जीव हो. मैं व्याघ्र हूं. मुझे परिवार को पालने के लिए शिकार के अतिरिक्त कोई कार्य नहीं पता. इसलिए मैं तुम्हें मारकर अपना और अपने परिवार का पेट भरूंगा.

हिरणी ने कहा- मैं स्वर्ग की अप्सरा हूं जो शापित होने के कारण हिरणी बन गई हूं. मैं अभी प्रसूता हूं. शीघ्र ही बच्चे को जन्म देने वाली हूं. मुझे मारकर तुम एक साथ दो प्राणियों की हत्या कर दोगे जो उचित नहीं. अपने बच्चे को जन्म देकर मैं तुम्हारे सामने प्रस्तुत हो जाउंगी.

आज तुम किसी और शिकार से पेट भर लो. अभी यहां पर एक और हिरणी आएगी जो हृष्ट-पुष्ट है तुम उसका शिकार करके आज अपने परिवार का पेट पालो.

शिकारी ने कहा- मैं तुम्हारी बात का भरोसा कैसे करूं.

इस प्रश्न के उत्तर में हिरणी बनी अप्सरा ने शिकारी को उपदेश देकर संतुष्ट किया तो शिकारी ने उसे जाने दिया.

थोड़ी देर बाद रात्रि के दूसरे प्रहर में उस हिरनी की बहन उसे खोजते हुए झील के पास आ गई. शिकारी ने उसे देखकर पुन: अपने धनुष पर तीर चढ़ाया.

हिरणी ने कहा- शिकारी मुझे मत मारो. मैं तो पहले से भी भूखी-प्यासी होने के कारण कमजोर हूं. मेरे शरीर में उतना मांस नहीं जिससे तुम्हारे पूरे परिवार का भोजन हो सके.

फिर भी तुम यदि चाहते हो तो मैं तुम्हारा शिकार बनने के लिए तैयार हूं. मुझे आज की मोहलत दे दो ताकि मैं अपने बच्चों को सुरक्षित स्थान पर छोड़कर आ जाउं.

हिरणी ने शिकारी को कहा कि यदि वह अपना वचन रखने के लिए लौटकर नहीं आती तो वह उस पाप की भागी हो जो युद्ध को छोड़कर भाग आए किसी महारथी की होती है.

शिकारी ने उसे जाने दिया और निराशा में बेल के पत्ते तोड़कर नीचे फेंकने लगा. उसके साथ जल भी गिराया.इस तरह रात के दूसरे प्रहर में उससे शिव की पूजा हो गई. इसी तरह एक और हिरणी रात्रि के तीसरे प्रहर में जल पीने आई.

शिकारी ने उसे मारने का प्रयत्न किया तो हिरणी ने कहा- यदि तुम मुझे मेरी हत्या का कोई उचित कारण बता सको तो मैं तुम्हारा शिकार बनने के लिए प्रस्तुत हूं.

शिकारी ने सारा हाल बताया कि वह और उसके बच्चे सुबह से भूखे हैं. पेट भरने के लिए उन्हें मांस चाहिए.

हिरणी ने कहा- परिवार के पालने के तुम्हारे बात से मैं संतुष्ट हूं और मैं तुम्हारा शिकार बनने को तैयार हूं किंतु जैसे तुम अपने बच्चों के लिए चिंतित हो उसी तरह मुझे भी अपने बच्चों की चिंता है.

मुझे रात भर का समय दे दो. मैं बच्चों को उनके पिता के भरोसे करके वापस आ जाऊंगी.

शिकारी दो शिकार गंवा चुका था इसलिए तैयार नहीं हो रहा था. उसने हिरणी के साथ चर्चा शुरू की.

वह हिरणी के उत्तर से बड़ा संतुष्ट हुआ. महादेव की कृपा से उसका मन भी निर्मल हो गया था इसलिए उसे तर्कसंगत बातें उचित लगीं.

हिरणी ने वापस लौटने का वचन दिया तो शिकारी ने उसे भी छोड़ दिया. उसने थोड़ा जल पीया और कुछ जल नीचे गिरा दिया.

फिर हताशा में बेल के पत्ते तोड़कर फेंकने लगा जो शिवलिंग पर गिरे. इस तरह तीसरे प्रहर में भी अंजाने में उससे शिवलिंग पूजा हो गई.रात का चौथा प्रहर आरंभ हो चुका था.

हिरणी को खोजता वहां एक हिरन आ पहुंचा. शिकारी ने उसे मारने के लिए तीर चढ़ाया और कहा तीन हिरणियों को छोड़ने के बाद आखिरकार देव की प्रेरणा से तुम मिल ही गए हो. तुम्हें मारकर मैं अपने परिवार का पेट भरूंगा.

हिरण ने कहा- हे व्याघ्र वे तीनों मेरी पत्नियां हैं. मेरे भरोसे तुम्हारे पास वापस आने की प्रतीज्ञा कर चुकी हैं. वे अपने वचन की पक्की हैं. तम्हारे पास अवश्य आएंगी.

मेरा धर्म है कि मैं उनके वचन की रक्षा करने में सहायक बनूं. तुम मुझे भी समय दे दो ताकि मैं परिवार के लिए उचित प्रबंध कर लूं फिर तुम्हारे पास आ जाउंगा.

अंजाने में ही महादेव की पूजा से उसका मन निर्मल हो गया था. हिरण के वचनबद्धता पर उसके संदेह नहीं रहा.

शिकारी ने हिरण को जाने दिया. किंतु यदि इस बार भी वही सब हुआ और चौथे प्रहर में भी शिवलिंग की पूजा हो गई.

तीनों हिरनी व हिरन आपस में मिले और अपनी शिकार को की गई प्रतिज्ञा के कारण सुबह शिकारी के पास आ गए.

सबको एक साथ देखकर शिकारी खुश हुआ.उसने कहा- यह बड़े आश्चर्य की बात है कि पशु अपने वचन का इस प्रकार पालन कर रहे हैं. अपने अपना और परिवार का पेट भरने के लिए अनगिनत निरीह जानवरों की हत्या की है किंतु आप जैसे पवित्र जीवों की हत्या करते मेरे हाथ कांपते हैं.

गुरुद्रुह द्वारा दिन भर भूखा-प्यासा रहते चारों प्रहर अंजाने में ही सही लेकिन शिव की पूजा होने से शिवरात्रि का व्रत पूर्ण हो गया.

व्रत के प्रभाव से उसके पाप तत्काल भी समाप्त हो गए. आकाश से सभी देवता शिकारी और मृगों के बीच की चर्चा सुनकर प्रसन्न थे.

तभी शिवलिंग से भगवान शंकर प्रकट हुए. महादेव ने उन्हें आशीर्वाद दिया औऱ मोक्ष प्रदान किया.

इस प्रकार अंजाने में किए गए शिवरात्रि व्रत से भगवान शंकर ने शिकारी को मोक्ष प्रदान कर दिया. महादेव के दर्शन से हिरण परिवार भी मोक्ष को प्राप्त हुए.

महाशिवरात्रि की इस महान कथा को सुनने और किसी अन्य व्यक्ति को सुनाने से शिवजी की कृपा प्राप्त होती है.

क्या आपको यह जानकारी पसंद आई?

ऐसी अनगिनत कथाओं का एक संसार है जहां आप धार्मिक-आध्यात्मिक कथाएं, जीवन को बदलने वाली प्रेरक कथाएं, रामायण-गीता, ज्योतिष और सभी प्रमुख मंत्रों को पढ़ सकते हैं उन मंत्रों के क्या लाभ हैं, उसके बारे में जान सकते हैं.

किसी और के कहने पर विश्वास करने से अच्छा एक बार स्वयं आजमाकर देख लिया जाए. इस लाइन के नीचे प्रभु शरणम् एप्प का लिंक है. उसे क्लिक करके एप्प को देखें फिर निर्णय़ करें. ये एक धार्मिक प्रयास है. एक बार तो इसे देखना ही चाहिए.

पौराणिक कथाएँ, व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र, गीता ज्ञान-अमृत, श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ने के हमारा लोकप्रिय ऐप्प “प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प” डाउनलोड करें.

Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करेंये भी पढ़ें-

शिवपुराणः पार्थिव शिवलिंग प्रतिष्ठा, शिवलिंग पर चढ़े प्रसाद का विधान

शिवपुराणः किन पुष्पों से करें शिवपूजा, कैसे करें अभिषेक

आपके घर में शिवजी की मूर्ति है, तो आपको इसे जरूर पढ़ना चाहिए .

शिवपुराणः भस्म, त्रिपुंड और रूद्राक्ष पर क्या कहता है शिवपुराण? इन मंत्रों से घारण करें रूद्राक्ष

हमारे अस्तित्व के लिए जरूरी है महाशिवरात्रि की पूजा

error: Content is protected !!