जानिये क्यों कोई काम छोटा नहीं होता : हनुमानजी के जीवन की अति प्रेरक कथा

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लंका विजय कर रामचंद्रजी अयोध्या लौटे तो उनके आने की खुशी में प्रजा पूरे अयोध्या में जगह-जगह समारोह कर रही थी. रामभक्त आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारियां ले रहे थे. किसी ने नगर को सजाने की जिम्मेदारी ली तो कोई साफ-सफाई और भोजन का प्रबंध देख रहा था.
सारे देवगण, ऋषि-मुनि, राजा आदि को भी निमंत्रण दिया गया था. इसलिए स्वागत और अतिथियों के ठहराने का की बड़ा प्रबंध था जिसकी जिम्मेदारी प्रमुख लोगों को दी गई थी. सारे रामभक्तों ने आपस में काम बांट लिए.
हनुमानजी वानरराज सुग्रीव द्वारा सौंपे कुछ कार्यों में फंसे थे. कार्य निपटाकर जब तक श्रीराम की सेवा में लौटे तब सारे कामों का बंटवारा हो चुका था. हनुमानजी भगवान राम के सामने पहुंचे और हाथ जोड़ कर खड़े हो गए. भगवान से उन्होंने अपने योग्य कार्य मांगा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.श्रीराम दुविधा में पड़ गए क्योंकि सारे महत्वपूर्ण काम पहले ही बांटे जा चुके थे. अब प्रभु के सामने एक ही विकल्प था कि वह या तो किसी को दी हुई जिम्मेदारी वापस लेकर हनुमानजी को दें, लेकिन इससे उस भक्त को बुरा लगता जिससे काम छीना जाता.
श्रीराम सोच में डूब गए. एकाएक श्रीराम को जम्हाई आई, तो उन्होंने चुटकी बजाकर सुस्ती भगाई. इस चुटकी के साथ ही श्रीराम को एक विचार आया.
भगवान ने बजरंग बली से कहा- आप मुझे जगाए रखने की जिम्मेदारी लीजिए. मैं जब भी जम्हाई लूं, आप चुटकी बजाकर मुझे जगा दीजिएगा.
हनुमानजी ने खुशी-खुशी यह जिम्मेदारी संभाल ली. तभी भगवान ने एक बार फिर जम्हाई ली और हनुमानजी ने तुरंत चुटकी बजा दी. इस तरह हनुमानजी को अपना कार्य अच्छी तरह समझ आ गया.
श्रीराम आराम करने के लिए अपने महल में चले गए. हनुमानजी ने दरवाजे पर बैठकर अपनी जिम्मेदारी संभाल ली. हनुमानजी को चिंता हुई कि कहीं ऐसा न हो कक्ष के अंदर प्रभु को जम्हाई आए और हनुमान को सुनाई न पड़े. इससे तो वह कर्तव्य से चूक जाएंगे.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.अब श्रीराम ने दिन-रात के लिए अलग-अलग तो कहा नहीं था इसलिए हनुमानजी जोर-जोर से चुटकी बजाने लगे. हनुमानजी ने लगातार चुटकियां बजानी शुरू कर दीं. उसी समय श्रीरामजी को भी हनुमान की भक्ति का विचार आया.
हनुमानजी का परिश्रम बेकार न जाए इसलिए प्रभु श्रीराम बार-बार जम्हाई लेने लगे. हनुमानजी के कानों तक जम्हाई की आवाज पहुंची तो वह संतुष्ट हुए कि उनकी सेवा में कोई कमी नहीं है.
इधर भक्तवत्सल प्रभु सोच रहे थे कि जब भक्त ने अपने आराम की चिंता त्याग दी है तो उन्हें भी भक्त के भाव का मान रखना होगा. भगवान और भक्त अपने-अपने फर्ज निभाने में लगे. श्रीराम जम्हाई पर जम्हाई लेते रहे और हनुमानजी लगातार चुटकियां बजाते रहे.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.जम्हाई और फिर चुटकी की आवाज गूंज रही थी. यह सिलसिला रातभर चलता रहा. देवी सीता चिंतित हुईं कि कहीं प्रभु को किसी बीमारी ने तो नहीं घेर लिया. प्रभु कुछ बोलते न थे बस जम्हाई पर जम्हाई लेते थे. सीताजी ने लक्ष्मण को भेजा राजवैद्य को बुलाने के लिए.
लक्ष्मणजी आए औऱ द्वार खुला. प्रभु ने जम्हाई लेनी बंद कर दी. जम्हाई बंद हुई तो हनुमानजी की चुटकी भी रूक गई. सभी लोग आश्चर्य में थे कि यह आखिर क्या हो रहा है. भगवान श्रीराम ने पूरी बात बताई. हनुमानजी की भक्ति की खूब प्रशंसा हुई.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.लक्ष्मणजी ने सुझाव दिया कि अगर आपने हनुमानजी से चुटकी बजाने का कार्य वापस नहीं लिया तो आपके साथ-साथ पूरी अयोध्या भी नहीं सो पाएगी. श्रीराम ने हनुमान जी से चुटकी बजाने का कठिन काम वापिस ले लिया और उन्हें स्वागत कार्य की जिम्मेदारी सौंपी.
जम्हाई लेने पर चुटकी बजाने की परंपरा शायद हनुमानजी इस रामभक्ति से ही प्रचलित हुई है.
संकलन व संपादनः राजन प्रकाश
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