Advertisement728 × 90

गणेशजी द्वारा दिए इस ज्ञान में है जीवन की हर समस्या का निदान

गणेशजी द्वारा दिए इस ज्ञान में है जीवन की हर समस्या का निदान

wpid-hd-wallpapers-lord-ganesha-jpg

अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

गणेश जी ने सिंदूरासुर से युद्ध के बाद राजा वरेण्य को जो ज्ञान दिया उसे गणेश गीता कहते हैं. इस गीता में आप अपनी समस्याओं का केवल निदान ही नहीं ढूंढ सकते बल्कि इसके जरिये आप अपने भूत भविष्य का राज भी आसानी से जान सकते हैं. जल्द ही हम इसे आपके प्रभु शरणम् एप्प में देने का प्रयास करेंगे.

भगवान गणेश के एक परम भक्त थे वरेण्य. माहिष्मति जैसी सुंदर नगरी उनकी राजधानी थी. वरेण्य इतने धार्मिक थे, मानो धर्म ने ही उनके रूप में अवतार लिया हो.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.महाराज वरेण्य की पत्नी महारानी पुष्पिका भी उन्हीं की तरह बड़ी गुणवती और सदाचारिणी होने के साथ ही गणेश भक्त थीं. सच तो यह था कि पिछले जन्म में भी ये दोनों भगवान् गणेश के भक्त थे.

उस जन्म में पति-पत्नी ने लगातार बारह साल तक गणपति आराधना करके उनको प्रसन्न कर लिया तो भगवान् गणेश ने उन्हें वरदान दिया था कि अगले जन्म में मैं तुम्हारा पुत्र बनूंगा.

इधर इंद्र समेत सभी देवगण दैत्य सिंदूरासुर से बुरी तरह डरे हुये थे. गुरु बृहस्पति के कहने से सभी देवता भगवान गणेश के पास जाकर बोले- प्रभु संसार को संकट में डालने वाले सिंदूरासुर को आखिर किसने बनाया. उसने जीना मुहाल कर रखा है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.अब हम किसकी शरण में जाएँ? कौन हम सबकी रक्षा करेगा? आप ही भगवान् शिव के घर में अवतार लेकर इस दुष्ट बुद्धि असुर को मारिए. देवताओं और ऋषियों की विनती से प्रसन्न हो गणेशजी ने सिंदूरासुर के संहार के लिए अपनी हामी भर दी.

गजानन राजा वरेण्य और पुष्पिका को दिया वचन भूले न थे. उनकी योगमाया-शक्ति ने सब योजना पहले से ही बना ही रखी थी. महारानी गर्भवती थीं उचित समय पर गणेशभक्त महारानी पुष्पिका ने एक बालक को जन्म दिया.

प्रसव पीड़ा इतनी हुई कि वे बालक के पैदा होते समय वे बेहोश हो गई. उन्हें मूर्च्छित देख बालक को एक खतरनाक राक्षसी उठा ले गई. रास्ते में शिवगण नंदी ने उस राक्षसी को बालक को ले जाते देख लिया.

भगवान् गजानन के माता-पिता यानी गौरी-शंकर को अपने पुत्र के वरदान देने की जानकारी थी ही. अतः उन्होंने नंदी से कहा कि वे बाल गणेश को रानी पुष्पिका के पास वापस पहुंचवा दें.

शिवगण नंदी ने भगवान् बाल गजानन को फिर से रानी पुष्पिका के पास पहुँचा दिया. बेहोशी टूटी तो रानी पुष्पिका अपने बगल में अदभुत बालक देख चीख उठीं. उनका बेटा चार हाथ वाला था, सिर हाथी का और शरीर लाल था.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.डर के मारे रानी रोने लगीं. सब नौकर चाकर इकट्ठे हो गए. भगवान् की माया ने सब पर ऐसा पर्दा डाल दिया कि भगवान् गजानन को कोई पहचान ही न पाया. सब ने कहा-बालक तो बड़ा अशुभ जान पड़ता है.

राजा वरेण्य के पास भी तुरंत यह खबर पहुंच गई और वरेण्य भी माया के पर्दे से अछूते न रहे. अशुभ की आशंका से उस बालक को राजा ने शहर से बहुत दूर जंगल के भीतर फेंकवा दिया.

भगवान् गजानन की कृपाशक्ति ने महर्षि पराशर पर कृपा बरसायी. वे उधर से गुजरे और बाल गजानन का दर्शन कर, शरीर के शुभ चिन्हों से जान लिया कि यह शिशु महान है. वे बालक को अपने आश्रम में ले आए.

बालक को पत्नी वत्सला को सौंप दिया तो वे स्नेह के साथ शिशु के पालन में लग गई. पराशर के आश्रम की शोभा साक्षात् भगवान् के निवास करने से निराली हो गई. भगवान् गणेश अनेक प्रकार की बाल-लीलाएं करते हुए नौवें वर्ष में प्रवेश हुए.

भगवान् गजानन को देवताओं की प्रार्थना भी हमेशा याद रही. उन्हें याद था कि दैत्यराज सिंदूरासुर का उद्धार करके देवताओं एवं ऋषि-मुनियों उबारना है. अपने नौवें वर्ष में ही भगवान गणेश ने शौर्यरूप प्रकट किया.

अब तक सभी देवता सिंदूरासुर से बहुत त्रस्त हो चुके थे. उसका अत्याचार असहनीय हो चुका था. आखिरकार सिंदूरवाड़ में जाकर भगवान गणेश ने दैत्यराज सिंदूर को मार ही डाला.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.इंद्रा सहित सभी देवता फूले न समाए. उन्होंने गणेशजी के खूब गुण गाए. उधर यह सब लीला धरती पर ही हो रही थी, चहुं ओर चर्चा थी. सो राजा वरेण्य से भी अपने बालक गजानन की लीलाएँ छिपी न रही.

उन्हें अपने बालक का महर्षि पराशर द्वारा पालन-पोषण से लेकर सिंदूरासुर के उद्धार तक की सभी लीलाएँ पता चल गयी. वरेण्य खुश भी हुए पर उससे ज्यादा उनको पछतावा था. अनजाने में हुई अपनी गलती के बारे में सोच सोचकर दुख के सागर में डूब गये.

भगवान् गजानन की कृपा से अब उनकी बुद्धि से माया का पर्दा हट चुका था. उन्होंने जंगल में फिंकवाये अपने बालक को ही नहीं अब उसकी महिमा भी पहचान ली थी. वे भागते हुये भगवान् गजानन के पास पहुँचे.

गणेशजी के सामने पड़ते ही कहने लगे- प्रभु! मैं अज्ञानी आपकी कृपा को समझ न सका. आखिर मेरे जैसा अज्ञानी पुरुष आपके उस रूप को कैसे पहचान भी कैसे पाता. माया से मोहित हो मैंने अनर्थ कर डाला. मुझे क्षमा कर दें.

गजानन अपने पिता वरेण्य के वचन सुनकर प्रसन्न हुए और उन्होंने राजा वरेण्य को उनके पिछले जन्म के वरदान की याद दिलाया. फिर बोले, पिता जी मेरा यहां का काम समाप्त हुआ. अब आज्ञा दीजिये तो अपने धाम जाऊं.

गजानन गणेश के अपने धाम लौटने की बात सुन कर गणेश भक्त राजा वरेण्य व्याकुल हो उठे. आंखों में आंसू आ गये. वे गणेशजी से विनती करते हुए बोले- ‘आप जैसा चाहें पर इससे पहले! मेरा अज्ञान दूर कर मुझे मुक्ति मार्ग दिखा दें.’

राजा वरेण्य की प्रार्थना पर भगवान गणेश ने उन्हें मुक्ति और मोक्ष का रास्ता दिखाने वाला ज्ञान देना स्वीकार कर लिया. गणेश जी ने राजा वरेण्य को जो ज्ञान उपदेश दिया वही आज गणेश-गीता के नाम से प्रसिद्ध है.

हम पहले क्या थे और आगे हमारा क्या होगा? कौन नहीं जानना चाहता. गणेश गीता अपने चौथे अध्याय में वैध संन्यास योग के जरिये बताती है कि सिर्फ योग और प्राणायाम करके ही आप बिना किसी ज्योतिषी या पंडित के भूत और भविष्य आसानी से जान सकते हैं.

कल्पवृक्ष प्रलय काल में भी नष्ट नहीं होता, कल्पवृक्ष देवराज इंद्र के वहां फल फूल रहा है. लेकिन धरती पर कल्पवृक्ष का पता बताते हैं भगवान गणेश इसी गणेश गीता में. और यह भी कि अपने भीतर कैसे उगायें कल्पवृक्ष. इस अद्भुत गीता को अवश्य पढना चाहिये.

स्रोत : गणेश पुराण
संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्

आप सभी Maa Durga Laxmi Sharnam एप्पस जरूर डाउनलोड कर लें. माँ लक्ष्मी व माँ दुर्गा को समर्पित इस एप्प में दुर्लभ मन्त्र, चालीसा-स्तुति व कथाओं का संग्रह है. प्ले स्टोर से डाउनलोड कर लें या यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करें. विनती है कि कृपया एप्प की रेटिंग जरूर कर दें.

ये भी पढ़ें-
सुहागिनों के पर्व करवा चौथ की सरलतम शास्त्रीय विधि, व्रत कथा और पूजन-पारण का महूर्त
माता सीता ने क्या युद्ध में रावण के वंश के एक असुर का संहार भी किया था
जानिए विवाह का आठवां वचन क्या है?
पति को वश में रखने का द्रौपदी ने सत्यभामा को सिखाया तंत्र-मंत्र से ज़्यादा कारगर ये यंत्र-करवा चौथ स्पेशल

हम ऐसी कथाएँ देते रहते हैं. Facebook Page Like करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा: Please Like Prabhu Sharnam Facebook Page

धार्मिक चर्चा करने व भाग लेने के लिए कृपया प्रभु शरणम् Facebook Group Join करिए: Please Join Prabhu Sharnam Facebook Group

error: Content is protected !!