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शिव के तेज से उत्पन्न बालक को ब्रह्मा ने नाम दिया जलंधर, जलंधर हुआ असुरराज- कार्तिक माहात्मय, दसवां अध्याय

शिव के तेज से उत्पन्न बालक को ब्रह्मा ने नाम दिया जलंधर, जलंधर हुआ असुरराज- कार्तिक माहात्मय, दसवां अध्याय

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राजा पृथु ने कहा- हे देवर्षि जब शिवजी ने अपने माथे का तेज क्षीर सागर में डाल दिया तब क्या हुआ? नारदजी ने बताना शुरू किया. शिवजी के तेज ने सागर में बालक का रूप धारण कर लिया. वह शीघ्र ही बड़ा भी हो गया और गंगासागर से संगम पर रोने लगा.

उसका रूदन इतना भयंकर था जैसे प्रलंयाकारी मेघ बिना रूके भीषण गर्जना कर रहे हों. उससे पृथ्वीवासी व्याकुल होने लगे. लोकपालों को भी चिंता होने लगी. शिवजी के अंश के रूदन से ब्रह्मांड व्याकुल था. सभी देवता और ऋषिगण ब्रह्माजी के शरण में पहुंचे और इसका कारण पूछा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.देवताओं के साथ स्वयं ब्रह्माजी उस बालक के पास पहुंचे. ब्रह्माजी को आया देख समुद्र भी आए. उन्होंने बालक को उठाकर ब्रह्माजी की गोद में दे दिया. ब्रह्माजी ने पूछा- हे सागर यह बताओ कि यह बालक किसका है?

समुद्र ने कहा- हे परमपिता यह तो मुझे नहीं पता. गंगासागर के तट पर यह अचानक प्रकट हुआ है. आप इस बालक का जाति-कर्म आदि संस्कार करें और इसका जातक फल बताइए. वह बालक ब्रह्माजी के गले में बार-बार हाथ डालकर उनके साथ खेलने लगा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.ब्रह्माजी आनंदित हो रहे थे कि तभी उसने उनका गला जोर से पकड़ लिया. उन्हें पीड़ा हुई और नेत्रों से जल निकल आए. ब्रह्माजी ने पूरा जोर लगाकर बालकर को अपने से छुड़ाया और बोले- तुम्हारे पुत्र के कारण आंखों से जल निकला है इसलिए इसका नाम जलंधर होगा.

यह जन्म के साथ ही तरूण हो गया. इससे यह सभी शास्त्रों का ज्ञाता, महापराक्रमी, महावीर और बल में भगवान विष्णु तक को परास्त कर सकने वाला होगा. यह किसी से नहीं हारेगा. शिवजी के अतिरिक्त कोई इसे रोक नहीं पाएगा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.जहां से उत्पन्न हुआ है वहीं वापस चला जाएगा. इसकी पत्नी बड़ी पतिव्रता, सौभाग्यशाली, सर्वांगसुंदरी, मृदुभाषिणी तथा गुणों की सागर होगी. नारदजी बोले- हे राजन! इसके बाद ब्रह्माजी ने शुक्राचार्य को बुलाकर उस बालक का राज्याभिषेक कराया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.सागर ने उस बालक को अपनी संतान माना और उसका पालन किया. असुरराज कालनेमि की पुत्री वृंदा के साथ उसका विवाह कराया और फिर शुक्राचार्य के संरक्षण में जलंधर दैत्यों का राजा बना. दसवां अध्याय समाप्त, कथा जारी रहेगी.

संकलन व संपादनः राजन प्रकाश

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