क्यों चूक जाते हैं तारक मंत्र भी कई बार, बड़े-बड़े मंत्र भी जाते हैं बेकार? आपको यह कथा पढ़नी चाहिए

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समुद्रतट पर एक व्यक्ति चिंतित बैठा था. इतने में उधर से विभीषण निकले. उन्होंने उस व्यक्ति से पूछाः क्यों भाई! तुम किस बात की चिंता में पड़े हो?
उस व्यक्ति ने कहा- मुझे समुद्र के उस पार जाना है परंतु मेरे पास समुद्र पार करने का कोई साधन नहीं हैं. मुझे इसी बात की चिंता हैं.
विभीषण ने कहा- अरे भाई, इसमें इतनी चिंता और इतना उदास होने की क्या बात हो गई? मैं तुम्हें सागर पार करने की अचूक युक्ति बताता हूं.
ऐसा कहकर विभीषण ने एक पत्ते पर एक नाम लिखा. उस पत्ते को विभीषण ने उस व्यक्ति की धोती के पल्लू से बाँधते हुए कहा- इसमें मैंने तारकमंत्र बांध दिया है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.तुम ईश्वर पर श्रद्धा रखकर बिना घबराये सागर के पानी पर चलते जाना. अवश्य पार लग जाओगे.
विभीषण के वचनों पर विश्वास रखकर वह व्यक्ति समुद्र की ओर आगे बढ़ने लगा. वह सागर के सीने पर नाचता-नाचता पानी पर चल रहा था.
जब वह समुद्र के बीच में आया तब उसके मन में उसके मन में तारकमंत्र जानने की जिज्ञासा हुई.
उसने सोचा आखिर विभीषण ने ऐसा कौन सा तारक मंत्र लिखकर बांधा हैं जिसकी शक्ति से मैं सागर के सीने पर नाच रहा हूं. इसे देखना चाहिए ताकि औरों को भी बताकर उनका कल्याण किया जा सके.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.उस व्यक्ति ने अपने पल्लू में बंधा पत्ता खोला और पढ़ा तो उस पर दो अक्षर में केवल राम नाम लिखा हुआ था.
राम नाम पढ़ते ही उसकी श्रद्धा तुरंत ही अश्रद्धा में बदल गयी. उसने अपने आप से कहा- अरे! यह कोई तारक मंत्र थोड़े ही है! यह तो सीधा सादा राम नाम है!
विभीषण ने तो इसे गुप्त तारक मंत्र बताकर बिना वजह कौतूहल पैदा किया था. मैं तो अपनी शक्ति से सागर को रौंद रहा हूं.
उस व्यक्ति के मन में इस प्रकार रामनाम के प्रति बड़ी अश्रद्धा उपजी जिसका नतीजा था कि वह डूबकर मर गया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.श्रद्धा और विश्वास के मार्ग में संदेह नहीं करना चाहिए. अविश्वास एवं अश्रद्धा से विकट परिस्थितियाँ बन जाती हैं. तारक मंत्र एक ही प्रभुनाम पर विश्वास रखकर सही मार्ग पर बढ़ते रहना. ईश्वर स्वयं सहारा देंगे.
मंत्र जप से शीर्ष तक पहुंचा साधक भी विवेक के अभाव में संदेह का शिकार होकर अपना पतन कर बैठता है जैसा उस व्यक्ति के साथ हुआ. इसलिए प्रभु शरणम् सर्वप्रियम्. प्रभु के शरण में रहिए.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.तुलसीदास जी कहते हैं– राम ब्रह्म परमारथ रूपा. यानी ब्रह्म ने ही परमार्थ के लिए राम रूप धारण किया था.
प्रभु शरणम् के मित्रों हमने यह एप्प इसीलिए बनाया है ताकि विश्वभर में फैले हिंदू, अपने धर्म और अपने वेद-पुराणों में छिपे अनंत ज्ञानवर्धक कथाओं से जुड़े रहें.
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