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भागवत कथाः योगमाया की कंस को चेतावनी, भयभीत कंस ने वसुदेव-देवकी से मांगी क्षमा

भागवत कथाः योगमाया की कंस को चेतावनी, भयभीत कंस ने वसुदेव-देवकी से मांगी क्षमा

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वसुदेवजी बालरूपी भगवान श्रीकृष्ण को एक टोकरी में रखकर गोकुल के लिए चले. उधर प्रभु के आदेश पर योगमाया ने नंदबाबा की पत्नी यशोदा के गर्भ से जन्म ले लिया था.

योगमाया ने सबकी निद्रा ही हर ली ताकि किसी को इस बात का पता न चल सके कि वसुदेवजी शिशुओं की अदला-बदली करने आए हैं. वसुदेवजी जब श्रीकृष्ण को लेकर चले तो खूब बारिश हो रही थी. यमुना का जल उफन आया था.

शेषजी भी गुप्त रूप से पीछे-पीछे छत्र बनाए चलने लगे. यमुना को तो श्रीकृष्ण के पांव पखारने थे. जैसे ही प्रभु के पैरों का स्पर्श मिला, यमुना का जल स्थिर हो गया. उसने वैसी ही राह दे दी जैसे भगवान श्रीराम को समुद्र ने दिया था.

वसुदेव ने श्रीकृष्ण को यशोदाजी के बगल में लिटा दिया और स्वयं उनकी कन्या को लेकर कारागार में वापस चले आए. कारागार के फाटक स्वतः बंद हो गए. कन्या को देवकी के बगल में लिटाकर वसुदेव ने पैरों की बेड़ियां डाल लीं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.योगमाया ने रोना शुरू किया. अचेत रक्षक जागे और कंस को सूचना दी. आठवीं संतान के बारे में सोचकर कंस को नींद ही न पड़ती थी. वह भागकर आया और कन्या को झपट लिया.

देवकी ने विनती की- भैया तुमने सभी पुत्र मार डाले. यह तो कन्या है. इससे क्या भय? इसे तो मुझे प्रदान कर दो. स्त्री का वध करने का पाप अपने सर पर मत लो.

कंस नहीं माना. उसने नवजात कन्या के पैर पकड़कर उसे चट्टान पर दे मारा. परंतु वह साधारण कन्या तो थी नहीं. कंस के हाथों से छूटकर हवा में उड़ीं और अपने वास्तविक रूप में आ गईं.

आठ भुजाओं में आठ भयंकर आयुध लिए प्रकट हुईं. उन्होंने क्रोध में आंखे लाल करके कंस को कहा- मुझे मारने की चेष्टा तुमने की. अरे मूर्ख! तेरा संहार करने वाला जन्म ले चुका है. तू निर्दोष बालकों की हत्या से बाज आ जा. यब बताकर देवी अंतर्धान हो गईं.

देवी की बात सुनकर कंस को आश्चर्य और भय भी हुआ. अपनी बहन के निरपराध नवजता शिशुओं के वध के दोष का भय उसे सता रहा था. उसने वसुदेव-देवकी के चरण पकड़ लिए और क्षमा मांगने लगा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.कंस बोला- मैं निपराध बालकों की हत्या की. मैं आपका अपराधी हूं. देवताओं ने मेरे साथ साथ छल किया. उन्होंने बताया कि आपका आठवां पुत्र मेरा वध करेगा लेकिन आठवीं संतान तो पुत्री हुई. मेरे अपराधों को क्षमा कर दो.

वसुदेव-देवकी ने उसे क्षमा कर दिया. उसने दोनों को बंदीगृह से मुक्त किया और स्वागत के साथ महल में ले गया. उसने वसुदेव-देवकी के रहने के लिए अलग से एक महल दिया. दोनों ने इसे स्वीकार कर लिया.

प्रातःकाल कंस ने अपने मंत्रियों को योगमाया की सारी बात बताई. मंत्रियों ने कहा- देवताओं को छल का दंड मिलना चाहिए. नगर में दस दिन तक के सभी बच्चों की हत्या कर देनी चाहिए. सभी यज्ञ हवन पर प्रतिबंध करा दीजिए.

देवता बड़े डरपोक हैं. आप इंद्र को परास्त कर चुके हैं. शिव और विष्णु आपके भय से कहीं छुपे रहते हैं. वेद, ब्राह्मण, गौ तथा यज्ञ में विष्णु का वास है. अतः इनका समूल नाश कर देना चाहिए ताकि आप पर मंडराता संकट मिट जाए.

मंत्रियों की सलाह पर कंस ने अपने सेना में मौजूद राक्षसों को संहार में लगा दिया. वे वेष बदलकर विनाश करने लगे. ब्राह्मण, गौ और साधु संतों का नाश करने लगे. कंस के अत्याचारों से जनता पीड़ित हो गई.

गोकुल में कंस का अत्याचार ज्यों-ज्यों बढ़ता गया भगवान ने विभिन्न प्रकार की लीलाओं से कंस के दुष्ट सेवकों का संहार आरंभ कर दिया.आगे श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का प्रसंग आरंभ करुंगा.

संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्

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