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प्रभु हो जाएं आयुष्मान, सिंदूर में सन गए हनुमानःमंगलवार को हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाने की कथा.

प्रभु हो जाएं आयुष्मान, सिंदूर में सन गए हनुमानःमंगलवार को हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाने की कथा.

Hanuma
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एक बार माता सीता स्नान करने के बाद शृंगार कर रही थीं. तभी बजरंग बली वहां आ पहुंचे.

हनुमानजी को माता ने अशोक वाटिका में अपने पुत्र का दर्जा दिया था इसलिए उनके लिए कहीं आने जाने पर रोक-टोक न थी.

माता ने सभी शृंगार के बाद अपनी मांग में सिंदूर लगाया. हनुमानजी ने देखा कि जब माता सिंदूर लगा रही थीं, उस समय उनके चेहरे की चमक जितनी अधिक थी उतनी किसी अन्य आभूषण पहनते समय नहीं थी.

हनुमानजी को आश्चर्य हुआ. आखिर इस रंगीन चूर्ण में ऐसा क्या है जो माता इसे धारण करते समय दिव्य रत्नों वाले आभूषणों से भी ज्यादा इतरा रही हैं.

उन्होंने यह प्रश्न माता से पूछ भी लिया. सीताजी हंसने लगीं. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या उत्तर दें.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

हनुमानजी की आदत थी अगर कुछ उनके दिमाग में खटक गया तो वह माता से एक के बाद एक प्रश्न तब तक पूछते रहते जब तक उनकी जिज्ञासा पूरी शांत न हो जाए.

सीताजी, पवनसुत के साथ ज्यादा प्रश्न-उत्तर करने के विचार में थी नहीं. सो उन्होंने टालने के लिए कह दिया कि सिंदूर इसलिए लगाती हूं क्योंकि इससे श्रीराम की आयु बढ़ती है.

हनुमानजी सोचने लगे कि संसार को चलाने वाले प्रभु की आयु इस रंगीन पदार्थ सिंदूर से बढ़ती है! लेकिन फिर ख्याल आया कि माता ने कहा है तो सही ही कहा होगा.

सिंदूर की इस महिमा पर वह माता से कई प्रश्न और पूछना चाहते थे लेकिन माता सीता तो वहां से जा चुकी थीं.

हनुमानजी ने सोचा कि अगर इस सिंदूर के लगाने से मेरे प्रभु की आयु बढ़ती है तो माता ने इतना चुटकी भर क्यों लगाया! कोई कमी तो है नहीं.

तरह-तरह के प्रश्न हनुमानजी के मन में आते रहे लेकिन आखिर पूछें भी तो किससे. कुछ समझ में न आया तो सारा सिंदूर अपने शरीर पर उडेलकर उसे अच्छे से मिला लिया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

सिंदूर से पुता हुआ शरीर लिए बजरंग बली भगवान श्रीराम के दर्शन करने सीधे उनकी राजसभा में पहुंच गए.

हनुमानजी को देखकर सभी सभासद हंसने लगे. स्वयं भगवान श्रीराम भी मुस्कुरा रहे थे. उन्होंने पूछा- हनुमानजी आपने सारे शरीर पर सिंदूर क्यों पोत रखा है?

हनुमानजी ने भोलेपन में कहा- प्रभु माता के सिर पर चुटकी भर सिंदूर रख लेने से यदि आपकी उम्र बढ़ती है. तो मैंने सोचा कि क्यों न इसे पूरे शरीर पर पोत लिया जाए ताकि आपकी आयु अत्यधिक बढ़ जाए.

प्रभुभक्ति से भरी हनुमानजी की इस वाणी को सुनकर सभी सभासद उनकी वंदना करने लगे.

श्रीराम ने कहा- आज मंगलवार है. जो भी हनुमानजी को आज सिंदूर और तेल लगाएगा उसे मेरी कृपा प्राप्त होगी और उसके सभी मनोरथ पूरे होंगे.

इसीलिए मनोकमना पूरी करने के लिए मंगलवार को हनुमानजी के शरीर सिंदूर में तेल मिलाकर उसका लेप किया जाता है.

संकलन व संपादन- प्रभु शरणम्

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