श्री सत्यनारायण व्रत महात्म्यः राजा चंद्रचूड की कहानी
श्री सत्यनारायण व्रत महात्म्य: राजा चंद्रचूड़ की कथा एवं पूजा विधि
श्री सत्यनारायण व्रत महात्म्यः भविष्य पुराण की कथा
श्री सत्यनारायण व्रत का महात्म्य वर्णन से परे कहा गया है। इसके बारे में भविष्य पुराण की एक कथा आती है जो हम आपके लिए यहां नीचे लेकर आए हैं। आप श्री सत्यनारायण व्रत महात्म्य का आनंद लें।
यदि आपको श्री सत्यनारायण जी की पूरी व्रत कथा, सत्यनारायण व्रत कथा के पांचो अध्याय, व्रत की विधि, व्रत की तिथि, सावधानियां, घर में स्वयं पूजा कैसे करें, आरती आदि जानना हो तो उसका लिंक भी पोस्ट के नीचे दिया जा रहा है।
उस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको श्री सत्यनारायण जी के व्रत के संबंध में कोई संशय नहीं रह जाएगा। तो आइए श्री सत्यनारायण व्रत का महात्म्य सुनें जो भविष्य पुराण प्रतिसर्गपर्व, द्वितीय खंड तृतीय अध्याय में आती है।

श्री सत्यनारायण व्रत महात्म्य कथा
नैमिष्यारण्य में जमा ऋषियों ने सूतजी से भगवान सत्यनारायण की कथा का महात्म्य सुनाने का निवेदन रखा। ऋषियों ने कहा कि हे सूत जी, अब हमें परम उपकारी श्री सत्यनारायण व्रत कथा का महात्म्य सुनाकर अनुग्रहित करें। यह भी बताएं कि श्री सत्यनारायण जी की व्रत कथा सुनने का इतना बड़ा महात्म्य क्यों कहा गया है। यह सब सुनने की हमारी प्रबल इच्छा हो रही है।
ऋषियों के विनम्र अनुरोध पर सूत जी प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा कि श्री सत्यनारायण जी की व्रत कथा का महात्म्य वर्णन से परे है। आपको मैं राजा चंद्रचूड़ की कथा सुनाता हूँ जिसने भगवान सत्यनारायण को प्रसन्न करके सर्वस्व प्राप्त किया।
हे ऋषियों आप इस कथा को ध्यान से सुनें। राजा चंद्रचूड़ ने सत्यनारायण जी की प्रेरणा से शतानंद जी से इस व्रत की विधि जानी थी। शतानंद जी के बताए अनुसार उसने व्रत कथा की और उसका क्या फल हुआ, वह सब मैं आपसे कहता हूँ।
राजा चंद्रचूड़ और भविष्य पुराण की कथा
केदारखंड के मणिपुरक नगर में चन्द्रचूड नामक एक धार्मिक तथा प्रजा का बहुत ध्यान रखने वाले राजा रहते थे। वे अत्यंत शांत-स्वभाव, मृदुभाषी, धीर-प्रकृति तथा भगवान नारायण के परम भक्त थे।
उसी समय विंध्य देश में कुछ ऐसे लोग भी उत्पन्न हुए जो सनातन धर्म के विरोधी थे। विधर्मी बहुत उपद्रव मचाते थे। इस कारण राजा के साथ उनकी घोर शत्रुता हो गई। राजा चंद्रचूड़ का उन विधर्मियों से भयंकर युद्ध हुआ। युद्ध में चन्द्रचूड की विशाल चतुरंगिनी सेना नष्ट हुई। कूट-युद्ध में निपुण तथा छल-कपट से चालें चलने वाले धर्म विरोधियों की सेना की क्षति बहुत ही कम हुई।
युद्ध में म्लेच्छों से परास्त होकर राजा चन्द्रचूड अपना देश और घर परिवार छोड़कर अकेले ही वन में चले गये। इधर-उधर घूमते हुए वह काशीपुरी में पहुंचे। राजा ने देखा कि काशी तो द्वारका के समान ही भव्य एवं समृद्धिशाली है। उन्होंने यहां अलग ही चलन देखा। उन्होंने देखा कि घर-घर किसी देव की पूजा बड़े ही सजधज और तैयारियों के साथ होती है। चंद्रचूड़ वहां की समृद्धि देखकर विस्मित हुए।
उन्हें विचार आया कि यदि इस समृद्धि का मूलमंत्र मिल जाए तो वह भी अपनी नगरी को ऐसा समृद्ध बनाने का प्रयास करेंगे। परंतु वह यह सोच कर निराश हो गए कि अभी तो उनके पास अपना राज्य भी नहीं है।
सत्यनारायण व्रत और पूजन की प्रेरणा
चंद्रचूड़ ने वरिष्ठ नागरिकों और विद्वान ब्राह्मणों से नगर की समृद्धि का मूलमंत्र पूछा तो सब ने कहा कि सत्यनारायण भगवान की ही यह कृपा है। यह सारा वैभव उनके व्रत और पूजन से ही है। उन्होंने शतानंद नामक ब्राह्मण की सत्यनारायण-पूजा की प्रसिद्धि भी सुनी। कुछ ने तो यहां तक कहा कि इस व्रतोपवास तथा पूजन के अनुसरण से मनुष्य न मात्र शील व धर्म से समृद्ध हो जाता है, अपनी हारी लड़ाई तक जीत जाता है।
चन्द्रचूड भगवान सत्यनारायण की पूजा करने वाले शतानंद के पास गये और उनके चरणों पर गिर कर उनसे सत्यनारायण-पूजा की विधि पूछी तथा अपना राज पाट गंवाने की कथा भी बतलायी।
श्री सत्यनारायण व्रत कथा और पूजा – संपूर्ण विधि, सामग्री, नियम और महात्म्य
चंद्रचूड़ ने कहा- हे ब्रह्मन! लक्ष्मीपति भगवान जनार्दन जिस व्रत से प्रसन्न होते है, पाप के नाश करने वाले उस व्रत को बतलाकर आप मेरा उद्धार करें।
शतानंद ने कहा– राजन! लक्ष्मी पति भगवान को प्रसन्न करने वाला सत्यनारायण नामक एक श्रेष्ठ व्रत हैं, जो समस्त दुःख-शोक इत्यादि को नष्ट करने वाला, धन-धान्य को बढ़ाने वाला, सौभाग्य और सन्तति को देने वाला तथा सर्वत्र विजय-दिलाने वाला है।
सत्यनारायण भगवान की पूजा की विधि
शतानंद जी ने राजा को पूजन की विधि बताते हुए कहा:
-
जिस किसी भी दिन प्रदोषकाल में इनके पूजन आदि का आयोजन करना चाहिये।
-
केले के तनों से बने खम्भों पर एक-एक मंडप की रचना कर उसमें पाँच कलशों की स्थापना करनी चाहिए और पांच ध्वजाएं भी लगानी चाहिए।
-
व्रती मंडप के मध्य में ब्राह्मणों द्वारा एक सुंदर सी वेदिका की रचना करवाए।
-
उसके ऊपर सोने से जड़ा शिलारूप भगवान शालिग्राम को स्थापित कर भक्तिपूर्वक चन्दन, पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए। भगवान् का ध्यान करते हुए भूमि पर सोकर सात रात बिताएं।
राजा चंद्रचूड़ को पुनः राज्य प्राप्ति

यह सुनकर राजा चन्द्रचूड ने काशी में ही बिना कोई समय गंवाए भगवान् सत्यनारायण की शीघ्र ही पूजा की। इस पूजा से प्रसन्न होकर रात्रि में भगवान ने राजा को एक उत्तम तलवार प्रदान की।
शत्रुओं को नष्ट करने वाली तलवार प्राप्त कर राजा, ब्राह्मण श्रेष्ठ सदानंद को प्रणाम कर अपने नगर को चले। चंद्रचूड़ जब अपने नगर वापस आए तो वहां विधर्मियों का राज था। राजा चंद्रचूड़ ने उन विधर्मियों के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया और छ: हजार विधर्मी दस्युओं को मारकर उनसे अपार धन प्राप्त किया। साथ ही नर्मदा के मनोहर तट पर पुन: भगवान श्रीहरि की पूजा की।
राजा प्रत्येक मास की पूर्णिमा को भक्तिपूर्वक विधि-विधान से भगवान सत्यनारायण की पूजा करने लगे। उस व्रत के प्रभाव से वह लाखों ग्रामों के अधिपति हो गये और साठ वर्ष तक राज्य करते हुए अन्त में उन्होंने विष्णुलोक को प्राप्त किया।
(स्रोत: भविष्य पुराण प्रतिसर्गपर्व, द्वितीय खंड तृतीय अध्याय)
(संकलन व संपादन: राजन प्रकाश)
( डिस्कलेमरः यह पोस्ट पुराणों में वर्णित कथाओं के आधार पर तैयार की गई है। इस पोस्ट का उद्देश्य सिर्फ एक जानकारी देना है। इसका उद्देश्य कोई गलत जानकारी देना या अंधविश्वास फैलाना नहीं हैं। पोस्ट में बताएं किसी भी परामर्श पर अमल करने से पहले विषय के विशेषज्ञ से परामर्श लें।)
यह भी पढ़ेंः
श्रीविष्णु को बार-बार क्यों लेना पड़ा है मानव अवतार, हर अवतार में क्यों सहते हैं विरह वेदना
महादेव और विष्णु जी में क्या भेद की अनुमति है?
हर तरह के भय से मुक्तकर आत्मविश्वास बढ़ाता है श्रीविष्णु कवचः बृहस्पतिवार को विशेष फलदायी
प्रभु शरणम् के बारे में दो शब्दः
सनातन धर्म के गूढ़ रहस्य, हिंदूग्रथों की महिमा कथाओं ,उन कथाओं के पीछे के ज्ञान-विज्ञान से हर हिंदू को परिचित कराने के लिए प्रभु शरणम् मिशन कृतसंकल्प है. देव डराते नहीं. धर्म डरने की चीज नहीं हृदय से ग्रहण करने के लिए है. तकनीक से सहारे सनातन धर्म के ज्ञान के देश-विदेश के हर कोने में प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से प्रभु शरणम् मिशन की शुरुआत की गई थी. इससे देश-दुनिया के कई लाख लोग जुड़े और लाभ उठा रहे हैं. आप स्वयं परखकर देखें. आइए साथ-साथ चलें; प्रभु शरणम्!
वेद-पुराण-ज्योतिष-रामायण-हिंदू व्रत कैलेंडेर-सभी व्रतों की कथाएं-व्रतों की विधियां-रामशलाका प्रश्नावली-राशिफल-कुंडली-मंत्रों का संसार. क्या नहीं है यहां! सब फ्री भी है. एक बार देखें जरूर… प्ले स्टोर में टाइप करें Prabhu Sharnam और डाउनलोड कर लें.
प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर 9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से SAVE कर लें। फिर SEND लिखकर हमें उस नंबर पर whatsapp कर दें। जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना whatsapp से मिलने लगेगी।
गृह क्लेश, मानसिक पीड़ा और कर्ज मुक्ति के उपाय जो बताए गए हैं, यदि यह पोस्ट पसंद आई हो तो प्रभु शरणं के फेसबुक पेज से जुड़ाएं। वहां हम ऐसे पोस्ट देते रहते हैं।
इस लाइऩ के नीचे फेसबुक पेज का लिंक है. इसे लाइक कर लें ताकि आपको पोस्ट मिलती रहे. लिंक-
https://www.facebook.com/share/1CJXhLfxzt/
धार्मिक चर्चा में भाग लेने के लिए हमारा फेसबुक ग्रुप ज्वाइ करें. प्रभु शरणं फेसबुक ग्रुप का लिंक
https://www.facebook.com/groups/prabhusharnam