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श्री मारुति कवचम्

श्री मारुति कवचम्

॥ श्री मारुति कवचम् ॥

श्री मारुति कवचम का पाठः

हनुमान जी का प्रभावी मंत्र श्री मारुति कवचम का पाठ संकट का नाश करने वाला और सुख शांति प्रदान करने वाला है।

श्री मारुति कवचम्- पाठ और विधि
श्री मारुति कवचम्- पाठ और विधि

श्री मारुति कवचम् मंत्रः

॥ श्रीगणेशाय नमः ॥

ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते
प्रलयकालानलप्रभाप्रज्वलनाय ।
प्रतापवज्रदेहाय ।
अञ्जनीगर्भसम्भूताय ।
प्रकटविक्रमवीरदैत्यदानवयक्षरक्षोगणग्रहबन्धनाय ।
भूतग्रहबन्धनाय ।
प्रेतग्रहबन्धनाय ।
पिशाचग्रहबन्धनाय ।
शाकिनीडाकिनीग्रहबन्धनाय ।
काकिनीकामिनीग्रहबन्धनाय ।
ब्रह्मग्रहबन्धनाय ।
ब्रह्मराक्षसग्रहबन्धनाय ।
चोरग्रहबन्धनाय ।
मारीग्रहबन्धनाय ।
एहि एहि । आगच्छ आगच्छ ।
आवेशय आवेशय ।
मम हृदये प्रवेशय प्रवेशय ।
स्फुर स्फुर । प्रस्फुर प्रस्फुर ।
सत्यं कथय ।
व्याघ्रमुखबन्धन ।
सर्पमुखबन्धन ।
राजमुखबन्धन ।
नारीमुखबन्धन ।
सभामुखबन्धन ।
शत्रुमुखबन्धन ।
सर्वमुखबन्धन ।
लङ्काप्रासादभञ्जन ।
अमुकं मे वशमानय ।
क्लीं क्लीं क्लीं ह्रीं श्रीं श्रीं राजानं वशमानय ।
श्रीं ह्रीं क्लीं स्त्रियः आकर्षय आकर्षय ।
शत्रून् मर्दय मर्दय ।
मारय मारय ।
चूर्णय चूर्णय ।
खे खे ।
श्रीरामचन्द्राज्ञया मम कार्यसिद्धिं कुरु कुरु ।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः फट् स्वाहा ॥

विचित्रवीर हनूमन् मम सर्वशत्रून्
भस्मी कुरु कुरु ।
हन हन हुं फट् स्वाहा ॥

एकादशशतवारं जपित्वा
सर्वशत्रून् वशमानयति
नान्यथा इति ॥

॥ इति श्री मारुति कवचम् सम्पूर्णम् ॥

 

श्री मारुति कवचम् का महत्व और लाभ

श्री मारुति कवचम् का महत्व: हिन्दू धर्म में संकटमोचन हनुमान जी की उपासना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्री मारुति कवचम् का पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, असीम साहस और शारीरिक बल की प्राप्ति होती है। यह कवच व्यक्ति के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनाता है, जो नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर, शत्रुओं के भय और आकस्मिक संकटों से रक्षा करता है। नियमित रूप से इस शक्तिशाली कवच का पाठ करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।


श्री मारुति कवचम्  पाठ करने की विधि और नियम

हनुमान जी के इस मंत्र का पाठ करने की विधि बहुत सरल है। फिर भी इसका पूरा ध्यान रखते हुए पाठ आरंभ करना चाहिए-

श्री मारुति कवचम् पाठ की विधि:

  • शुद्धता: प्रातःकाल स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  • स्थान: घर के पूजा स्थल पर हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें।

  • संकल्प: पूजन के दौरान हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल, और लाल फूल अर्पित करें।

  • नियम: इस कवच का पाठ पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ करें। विशेष सिद्धि या संकट निवारण के लिए इसे अनुष्ठान के रूप में भी पढ़ा जाता है।

 

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