क्या ज्योतिष से भाग्य सचमुच बदल सकता है?
क्या ज्योतिष से भाग्य बदल सकता है? एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर सभी खोजते हैं. इसके उत्तर की खोज अंततः निराशा या फिर प्राचीन ज्योतिष विज्ञान के प्रति अविश्वास की ओर ले जाती है. जी, मैंने ज्योतिष विज्ञान लिखा. ज्योतिष विज्ञान ही है. हर विज्ञान की एक सीमा होती है. उतनी सीमाओं के बीच ज्योतिष पूरा खरा है.
यह बात मैं ज्योतिषी नहीं होने के बावजूद कह रहा हूं. कारण, मेरे जीवन में बहुत कुछ ऐसा घटा है जिसका इशारा ज्योतिष विज्ञानियों ने पहले ही दे दिया था.
आप पोस्ट को अंत तक पढ़िएगा क्योंकि यह जानना जरूरी है कि ज्योतिषशास्त्र क्या सचमुच किस्मत बदल सकता है? यह कहां तक सत्य सिद्ध होता है और कहां के आगे ज्योतिष के नाम पर ठगा जा रहा है? यह सब जानेंगे पर इसे अच्छे से समझने के लिए पहले एक छोटी सी कथा जो इसी विषय पर प्रकाश डालती है.
एक बार एक राजा ने विद्वान ज्योतिषियों और ज्योतिष प्रेमियों की सभा बुलाकर प्रश्न किया कि मेरी जन्म पत्रिका के अनुसार मेरा राजा बनने का योग था. मैं राजा बना किन्तु उसी मुहूर्त में अनेक लोगों ने जन्म लिया होगा, जो राजा नहीं बन सके. ज्योतिषशास्त्र तो जन्म के समय स्थान, मुहूर्त, नक्षण आदि के आधार पर गणना करता है. फिर मेरे जैसे जन्म योग के साथ और भी लोग जन्मे होंगे वे राजा नहीं बने. ऐसा क्यों?
राजा ने प्रश्न ही ऐसा किया था कि सारे विद्वान सोचने के विवश हो गए. एक ही घड़ी मुहूर्त में जन्म लेने पर भी सबके भाग्य अलग अलग क्यों हैं इस प्रश्न का उत्तर किसी के पास था ही नहीं.
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राजा ने सबके उतरे चेहरे देखे. एक-एक करके सबको देखता रहा. सबके चेहरे पर एक से लक्षण- क्षमा का भाव.
अचानक एक वृद्ध खड़े हुए और बोले- महाराज ऐसा नहीं है कि आपके इस प्रश्न का उत्तर कोई नहीं दे सकता. एक महात्मा मैं जानता हूं वह इसका उत्तर अवश्य दे सकते हैं पर वे यहां से दूर वन में रहते हैं. आपको उत्तर चाहिए तो थोड़ा श्रम करना होगा.
राजा की जिज्ञासा बढ़ी. उसने तय किया कि अब तो वह इसका उत्तर जानकर रहेगा.पता पूछकर वह जंगल पहुंचा तो देखा एक महात्मा आग के ढेर के पास बैठे लकड़ी का जलता कोयला खाने में व्यस्त हैं. यह देखकर राजा थोड़ा सहम गया. हिम्मत जुटाकर राजा ने जैसे ही महात्मा जी से बात करने की कोशिश की वह ऊंचे स्वर में चिल्लाने लगे.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.
महात्मा ने चीखकर कहा- तेरे प्रश्न का उत्तर देने के लिए मेरे पास समय नहीं मैं भूख से पीड़ित हूं. तेरे प्रश्न का उत्तर यहां से कुछ आगे पहाड़ियों के बीच एक और महात्मा हैं, वही दे सकते हैं. जा जल्दी से वहां जा और उनके समक्ष अपनी जिज्ञासा रख. यहां से तत्काल भाग जा.
राजा साधु के व्यवहार से थोड़ा डर भी गया साथ ही उसकी जिज्ञासा और बढ़ गयी. ऐसा क्या है कि उसके प्रश्न का उत्तर इस सिद्ध के पास नहीं पर यह ये भी जानता है कि कौन बता सकता है.
वह उत्तर की खोज में चल पड़ा.
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पहाड़ी मार्ग पारकर बड़ी कठिनाइयों से राजा दूसरे महात्मा के पास पहुंचा किन्तु महात्मा को देखकर राजा हक्का बक्का रह गया. दृश्य ही कुछ ऐसा था. वे महात्मा अपना ही मांस चिमटे से नोच-नोचकर खा रहे थे.
राजा का भय इस साधु को देखकर पहले से भी ज्यादा हो गया. वह कुछ कह ही नहीं पाया लेकिन साधु को सब पता था.
राजा को देखते ही वह साधु उस पर चिल्लाने लगे.राजा को डपटते हुए साधु ने चीखकर कहा- मैं भूख से बेचैन हूं मेरे पास समय नहीं. तू मुझे परेशान करने आ गया. भाग जा यहां से. आगे पहाड़ियों के पार आदिवासियों का एक गांव है. वहां एक बालक जन्म लेने वाला है जो कुछ ही देर तक जिन्दा रहेगा. सूर्योदय से पूर्व वहां पहुंचो. वही बालक तेरे प्रश्न का उत्तर का दे सकता है. चल यहां से जल्दी से रफूचक्कर हो ले.
राजा भयभीत था.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.
वह सोच रहा था, मेरे प्रश्न को उत्तर तो कोई देता नहीं सब आगे टाल देते हैं आखिर ऐसा क्या पूछ लिया है मैंने. कोई ये नहीं कहता कि उत्तर नहीं है. दिखने में सारे सिद्ध लगते हैं और कहते हैं कि इसका उत्तर भी है पर यहां नहीं अगले के पास है. अच्छे फेर में फंस गया हूं.
पर ज्योतिष की सच्चाई परखने की उत्सुकता प्रबल थी तो मन पीछे लौटने न देता था. उसने सोचा कि यहां तक पहुंच चुका हूं तो आदिवासियोंं के पास भी जाकर देखता हूं क्या होता है.
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राजा किसी तरह सुबह होने तक उस गांव में पहुंचा. उस दंपति के घर पहुंचकर सारी बात कही और शीघ्रता से बच्चा लाने को कहा. बालक को राजा के सम्मुख उपस्थित पेश किया गया.
राजा को देखते ही नवजात बालक जोर से हंसा. नवजात बालक के इस प्रकार अट्टहास करने से सभी अचंभित थे.
तभी एक और अचरज की बात हुई.वह बालक तो बोलने भी लगा- राजन्! मेरे पास भी समय नहीं है किन्तु अपना उत्तर सुनो लो. तुम, मैं और वे दोनों महात्मा जिनसे पूछकर यहां तक पहुंचे हो, पूर्वजन्म में हम चारों राजकुमार और सगे भाई थे.
एक बार शिकार खेलते-खेलते हम जंगल में भटक गए. तीन दिन तक भूखे प्यासे भटकते रहे. अचानक हम चारों को आटे की एक पोटली मिली. जैसे-तैसे हमने चार रोटी सेंकी.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.हम अपने-अपने हिस्से की बाटी लेकर खाने बैठे ही थे कि भूख-प्यास से तड़पते हुए एक महात्मा आ गये.
अंगार खाने वाले भइया से महात्मा ने कहा- बेटा मैं दस दिन से भूखा हूं. अपनी रोटी में से मुझे भी कुछ दे दो जिससे मेरा भी जीवन बच जाय. उस रोटी को खाकर इस घोर जंगल से पार निकलने की मुझमें भी कुछ सामर्थ्य आ जायेगा.
गूगल ने प्रभु शरणम् को 4.7 की रेटिंग दी है. आज तक ऐसी रेटिंग किसी हिंदू धार्मिक ऐप्प को नहीं मिली है.कुछ तो बात होगी कि गूगल इसे देता है ऐसी शानदार रेटिंग.
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इतना सुनते ही भइया गुस्से से भड़क उठे और बोले- तुम्हें दे दूंगा तो मैं क्या आग खाऊंगा? चलो भागो यहां से.
वे महात्माजी फिर मांस खाने वाले भइया के निकट आये उनसे भी अपनी बात कही किन्तु उन भइया ने भी महात्मा से गुस्से में आकर कहा- बड़ी मुश्किल से प्राप्त ये रोटी अगर तुम्हें दे दूंगा तो मैं क्या अपना मांस नोचकर खाऊंगा? यहां से तत्काल भागो.
भूख से लाचार वह महात्मा मेरे पास भी आए.
मुझसे भी बाटी मांगी तथा दया करने को कहा किन्तु मैंने भी भूख में धैर्य खोकर कह दिया कि चलो आगे बढ़ो मैं क्या भूखा मरुँ?
बालक बोला- अंतिम आशा लिए वह महात्मा आपके पास आए. आपसे भी दया की याचना की सुनते ही आपने उनकी दशा पर दया करते हुये ख़ुशी से अपनी बाटी में से आधी बाटी आदर सहित उन महात्मा को दे दी.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.बाटी पाकर महात्मा बड़े खुश हुए और जाते हुए बोले- तुम्हारा भविष्य तुम्हारे कर्म और व्यवहार से फलेगा.
इतनी कथा सुनाकर उस बालक ने कहा- हे राजन! उसी पूर्वजन्म के कर्म के आधार पर हम सब अपना-अपना कर्मफल भोग रहे हैं. धरती पर एक समय में अनेकों फूल खिलते हैं किन्तु सबके फल रूप, गुण, आकार-प्रकार, स्वाद में भिन्न होते हैं. सब कर्मों का खेल है.
इतना कहकर वह बालक मर गया.
राजा अपने महल में पहुंचा और माना कि ज्योतिष शास्त्र, कर्तव्य शास्त्र और व्यवहार शास्त्र है. ज्योतिष शास्त्र पर शंका करना व्यर्थ है.
यह अटल सत्य है कि एक ही मुहूर्त में अनेकों प्राणियों का जन्म होता है किंतु उनकी किस्मत अलग-अलग होती है. इसे ही तो प्रारब्ध कहते हैं. हम वही पाते हैं जो हमने किया होता है. हमारे कर्म हमारे साथ चलते हैं. जो बीज हमने बोया है उसकी फसल काटनी ही होगी.
ज्योतिष आपका भाग्य बदल ही नहीं सकता. फिर क्या करता है ज्योतिष? इसकी क्या उपयोगिता है?
ज्योतिष आपके कर्मों का क्या परिणाम होने वाला है बस इसका संकेत भर देता है. आपको समय रहते आगाह कर सकता है कि अमुक तरह की चिंता आपको घेर सकती है. यह सुखद बात आपके जीवन में हो इसकी संभावना बन सकती है.
यदि आपके पूर्व के कर्मों के अनुसार आपको कोई दंड मिलना तय है तो ज्योतिषशास्त्र उससे थोड़ी राहत कैसे मिले इसकी राह बता सकता है, आपके कर्मों का फल बदल नहीं सकता.
इसे और सरलता से ऐसे समझें.
जैसे यदि आज चोट लगने से किसी की टांग टूटनी हो तो संभव है कि टांग टूटने के स्थान पर सिर्फ मोच आकर रह जाए. चोट तो लगेगी ही बस उसकी तीव्रता आराधना-प्रार्थना से कुछ कम हो जाए.यदि ग्रहों के योग ऐसा संकेत कर रहे हों कि आपके किसी निकटजन के साथ आज झगड़े की प्रबल संभावना है. यह झगड़ा ऐसा होगा कि सदा के लिए बैर ही हो जाएगी तो ज्योतिष आपको आगाह कर देगा. आप अपनी वाणी, अपने आवेश पर कंट्रोल रखके उसकी तीव्रता कम कर सकते हैं.
यदि आप ज्योतिषशास्त्र से इतनी ही अपेक्षा रखें तो यकीन मानिए यह सचमुच काम करता है. विद्वान ज्योतिषी इतनी भविष्यवाणी करने में पूर्णतः समर्थ हैं. अयोग्य ज्योतिषी जिन्हें इस शास्त्र का पूरा ज्ञान नहीं है वे आपको भरमाएंगे. विद्वानों को तो खोजना होगा.
आशा है आपको यह कथा पसंद आई होगी. आपको कुछ काम की बात भी समझ आई होगी. ऐसी कथाओं का बहुत सुंदर संसार है प्रभु शरणम् ऐप्प. आप स्वयं जांच लें.
वेद-पुराण-ज्योतिष-रामायण-हिंदू व्रत कैलेंडेर-सभी व्रतों की कथाएं-व्रतों की विधियां-रामशलाका प्रश्नावली-राशिफल-कुंडली-मंत्रों का संसार. क्या नहीं है यहां! एक बार देखिए तो सही…
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