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भागवत कथाः यदु के वंश में हुए पराक्रमी सहस्त्रबाहु कार्तवीर्य अर्जुन की कथा

भागवत कथाः यदु के वंश में हुए पराक्रमी सहस्त्रबाहु कार्तवीर्य अर्जुन की कथा

bhagwat shree hari
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परीक्षित के पूछने पर शुकदेवजी ने भागवत कथा आगे बढ़ाते हुए ययाति के बड़े पुत्र यदु के वंश का वर्णन आरंभ किया. शुकदेवजी बोले- यदु का वंश परम पवित्र है. इस वंश की कथा सुनने से पाप नष्ट होते हैं. स्वयं श्रीकृष्ण ने इस वंश में जन्म लिया.

यदु के चार पुत्र थे- सहस्त्रजित, क्रोष्टा, नल और रिपु. सहस्त्रजित ने अपने कुल की वृद्धि की और उसमें हैहय हए. हैहय बड़े प्रतापी थे. इस कारण आगे चलकर यह कुल हैहयवंश के नाम से भी जाना गया.

इसी कुल में कृतवीर्य हुए. कृतवीर्य के पुत्र का नाम था अर्जुन. वह परम प्रतापी था पृथ्वी के सातों द्वीपों पर उसने एकछत्र राज्य कायम किया. समस्त भूमंडल उसके अधीन था.

उसने श्रीहरि के अंशावतार दत्तात्रेयजी से योगविद्या, अणिमा और लघिमा जैसी दुर्लभ सिद्धियां प्राप्त की थीं. संसार का कोई भी सम्राट यज्ञ, दान, तपस्या, योग, शास्त्र और पराक्रम में अर्जुन की बराबरी नहीं कर सकता था.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.उसे वरदान था कि युद्धभूमि में उसकी एक हजार भुजाएं हो जाती थीं जिनसे वह युद्ध करता तो सामने खड़ी अनंत सेना भी डरकर भाग जाती थी. इसलिए उसे सहस्त्रबाहु और सह्सत्रार्जुन का नाम भी मिला.

सहस्त्रबाहु ने 85 हजार वर्ष तक छह इंद्रियों से अक्षय विषयों का भोग किया. उसके कई हजार वीर पुत्र हुए. उसके पुत्रों ने परशुरामजी के पिता जमदग्नि का वध कर दिया. क्रोधित होकर परशुराम ने उसके वंश का नाश किया.

उसके सिर्फ चार पुत्र जयध्वज, शूरसेन, मधु और उर्जित ही बचे. जयध्वज के पुत्र का नाम था तालजंघ. तालजंघ के 100 पुत्र हुए जो तालजंघ क्षत्रिय कहलाए. महर्षि और्वि की शक्ति से राजा सगर ने तालजंघ क्षत्रियों का संहार किया था.

मधु के भी 100 पुत्र थे. उनमें सबसे बड़े और पराक्रमी थे वृष्णि. यदु, मधु और वृष्णि के नाम से ही यह वंश यादव, माधव और वार्ष्णेय नाम से प्रसिद्ध हुआ.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.मैंने सहस्त्रार्जुन के बाद इस वंश का थोड़ा विस्तृत जिक्र इसलिए किया क्योंकि इन राजाओं से वंश को नाम मिले. इसी कुल में भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया.

सहस्त्रबाहु भी श्रीहरि के अंशावतार का शिष्य था. उसने रावण को पराजित कर अपने कारागार में बंद रखा था. पुलस्त्य सहस्त्रबाहु से याचना कर रावण को छुड़ा ले गए थे. परशुराम और सहस्त्रबाहु की कथा लंबी है.

मैं सहस्त्रबाहु की कथाएं अलग से कई कड़ियों में विस्तार से सुनाउंगा. चूंकि अधिकमास श्रीकृष्ण का प्रिय मास है. इसलिए मैं कथा को थोड़ा संक्षेपित करते कल से श्रीकृष्ण अवतार का प्रसंग आरंभ करूंगा.

संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्

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