भागवत कथाः देवगुरू बृहस्पति ने बेटे कच को भेजा असुरगुरू शुक्राचार्य से शिक्षा लेने, शुक्रपुत्री देवयानी के कच से प्रेम व शाप का प्रसंग

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मित्रों, दो दिनों से मैं राजा ययाति और देवयानी की कथा सुना रहा हूं. उसमें कई बार कच और देवयानी के प्रेम का संदर्भ और कच तथा देवयानी को एक दूसरे को दिए गए शाप का संदर्भ आया.
कई लोगों ने आग्रह किया कि उन्हें इसकी पृष्ठभूमि बताई जाए. पिछली कथा में मैंने वादा किया था कि ययाति को शुक्राचार्य के मिले शाप और शापमुक्ति का प्रसंग सुनाउंगा परंतु उस प्रसंग पर जाने से पहले पृष्ठभूमि टटोल लेते हैं. आज मैं आपको कच-देवयानी की कथा सुनाता हूं.
देवताओं और असुरों के युद्ध में असुर भारी इसलिए पड़ रहे थे क्योंकि उनमें प्राण-शक्ति अधिक थी. इसके अलावा शिवजी मे मिली मृत संजीवनी विद्या के बल पर शुक्राचार्य मृत असुरों को फिर से जिंदा कर देते थे.
हालांकि देवता अमर थे, बुद्धि में असुरों से श्रेष्ठ थे लेकिन यदि मोटी बुद्धि और खल स्वभाव का जीव मरे ही नहीं तो सज्जनों को बहुत सताता है. यही हाल असुरों का था.
देवताओं की सहायता करने आने वाले मनुष्य अमर नहीं थे. मृत संजीवनी का ज्ञान नहीं होने से वह युद्ध में मारे गए मानवों को फिर से जीवित नहीं कर पाते थे. इससे देवता चिंतित थे.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.देवों के गुरु बृहस्पति और शुक्राचार्य में पुराना बैर था. शुक्राचार्य से यह विद्या सीखनी भी जरूरी थी इसलिए बृहस्पति ने अपने बेटे कच को कहा कि वह भक्ति तथा सेवा से शुक्राचार्य को प्रसन्नकर संजीवन-मंत्र सीख ले.
कच अद्भुत सुंदर और ब्रह्मचारी था. शुक्राचार्य ने उसे शत्रुपुत्र समझकर बहुत दुत्कारा पर वह गुरुभक्ति पर अडिग रहा. शुक्राचार्य द्रवित हो गए. उसे अपना शिष्य बना लिया और अपने आश्रम में रहने की अनुमित दे दी.
शुक्राचार्य की एख रूपवती पुत्री थी देवयानी. देवयानी कच की सुंदरता पर रीझ गई और उससे प्रेम करने लगी. कच इस प्रेम से अंजान था.
असुरों को जब भनक लगी कि देवताओं के गुरु का पुत्र असुरों के आचार्य के पास अध्ययन के लिए आया है तो उन्हें आशंका हुई कि कहीं शुक्राचार्य वह विद्या कच को न बता दें जिसके बल पर असुर विजयी होते हैं.
असुरों ने कच के वध का फैसला किया. पर वे आचार्य से डरते थे, इसलिए उन्होंने गोपनीय रूप से कच की हत्य करने की सोची. आखिरकार असुरों ने एक दिन कच को मार भी डाला.
देवयानी को कच की हत्या का पता चल गया. उसने पिता से जिद किया कि मृत संजीवनी विद्या का प्रयोग करके वह कच को पुनः जीवित कर दें. शुक्राचार्य ने देवयानी की बात मान ली.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.असुरों ने कई बार कच के प्राण लिए पर देवयानी बार-बार अपने पिता से जिद करके कच को जीवित करा लेती थी. बार-बार विफल रहने से असुर परेशान हो गए.
असुरों ने इस समस्या से छुटकारे के लिए बुद्धि लगाई. उन्होंने कच को मारकर उसे भोजन के रूप में शुक्राचार्य को खिला दिया. देवयानी को इसकी सूचना हो गई.
अब कच शुक्राचार्य के शरीर के भीतर पहुंच गया था. शुक्राचार्य भी बार-बार उसे जीवित करके परेशान थे. वह जानते थे कि कच मृत संजीवनी विद्या सीखने के लिए इतने बार प्राण पर खेल रहा है.
पुत्री के प्रेम और शिष्य के हठ को देख शुक्राचार्य को कच पर दया आ गई. उन्होंने कच को संजीवनी विद्या सीखा दी. कच विद्या प्रयोगकर जीवित हुआ और शुक्राचार्य का पेट चीरकर निकला.
शिक्षा पूरीकर कच ने गुरु से विदाई ली. कच देवयानी से भी मिलने गया. देवयानी कच से विछोह की बात सोचकर व्याकुल हो गई. उसने आखिरकार विदाई के समय कच के प्रति अपना प्रेम प्रकट कर दिया.
ब्रह्मचारी कच ने कहा- आप गुरुकन्या हैं. अतः मेरे लिए धर्म-बहन हुईं. देवयानी को बड़ा गुस्सा आया. उसने कहा कि कच को जीवन उसके कारण मिला है. इसलिए उसके जीवन पर उसका अधिकार है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.कच ने हर प्रकार से देवयानी को समझाने की कोशिश की. अपने प्राणों की बाज़ी लगाने का उद्देश्य भी बताया. धर्मसंगत बातों से उसने देवयानी को बहुत समझाया लेकिन देवयानी हर हाल में कच को हासिल करना चाहती थी.
देवयानी ने कच को कहा कि यदि वह उससे विवाह नहीं करता तो वह उसकी विद्या के निष्फल होने का शाप दे देगी. कच फिर भी अपनी बात से पीछे नहीं हटा. देवयानी ने शाप दे दिया.
क्रोधित कच ने भी देवयानी को शाप दिया कि प्रेम में पागल होकर वह अनैतिक कार्य को उतारू है. इसलिए उसे कोई ब्राह्मण अपनी पत्नीरूप में स्वीकार नहीं करेगा. अपने पति के अनैतिक कार्यों से देवयानी का वैवाहिक जीवन कष्टमय होगा.
शापित कच इंद्र के लोक अमरावती पहुंचा और उसने वह विद्या दूसरे को सिखा दी. इस तरह कच स्वयं तो विद्या का प्रयोग नहीं कर सका लेकिन देवताओं का मनोरथ सफल हुआ.
कच के शाप के कारण ही देवयानी का विवाह किसी ब्राह्मण कुल में नहीं हुआ बल्कि क्षत्रिय राजा ययाति से हुआ. कच के शाप का दूसरा अंश था कि देवयानी का विवाह चरित्रहीन व्यक्ति से होगा.
देवयानी का प्रेम जीवन बहुत विवादित रहा. कल पढ़िए देवयानी के प्रेम और उस कारण शुक्राचार्य की व्यथा की कथाएं.
संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्
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