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आत्मविजयी ही विश्वविजेता होता है, राजर्षि नमि के तर्क से नतमस्तक हुए देवदूत- प्रेरक कथा

आत्मविजयी ही विश्वविजेता होता है, राजर्षि नमि के तर्क से नतमस्तक हुए देवदूत- प्रेरक कथा


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राजा नमि राजर्षि हो गए थे. उन्होंने विचार किया कि राजपाट का त्याग करके अब योग-साधना में लीन हो जाना चाहिए. उनकी यह इच्छा सुनकर एक देवदूत उनके पास आए.

देवदूत ने कहा- राजर्षि निमि अपने तप और उत्तम प्रजापालन के गुणों के कारण आपको राजर्षि होने का सम्मान मिला है. राजन! यह पदवी आपको आपके कर्तव्यों के उत्तम पालन के कारण प्राप्त हुआ. मुझे चिंता है कहीं आप कर्तव्य विमुख न हो जाएं.

नमि ने देवदूत से उसकी आशंका का कारण पूछा तो देवदूत बोले- राजा का दायित्व निभाते हुए आपको अपने साम्राज्य को सुरक्षित करना चाहिए. महल की सुरक्षा के लिए मजबूत दरवाजे, दीवारें, उत्तम शस्त्रागार, अमोघ अस्त्र प्राप्त करने चाहिए.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.राजर्षि नमि बोले- हे देवपुरुष मैंने एक सुरक्षित नगर बनाया है. उसके चारों ओर श्रद्धा, तप और संयम की दीवार बनाई है. रक्षा के लिए मन, वचन और काया की एकरूपता की खाई बनाई है.

अतः संसार के दोष, छल-कपट, काम, क्रोध, माया, मोह और लोभ भी मेरी बनाई खाइयों को लांघकर मेरी आत्मा में प्रवेश नहीं कर सकतीं. मेरा पराक्रम ही मेरा धनुष है. मैंने उस धनुष में धैर्य की मूठ लगाई है और सत्य की डोरी चढ़ाई है. भौतिक संग्राम से मेरा क्या सरोकार?

देवपुरूष ने फिर कहा- राजा का कर्तव्य है कि युद्ध करके अन्य राज्यों को अपने अधिकार में ले, अपने और अन्य राज्यों को सुरक्षित करें. यह कार्य पूर्ण करने के बाद आप सन्यासी बनें तो क्या उत्तम न हो!हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.नमि बोले- बलवान उसे माना जाता है जिसने मन पर विजय प्राप्त की हो. इसलिए दूसरों को वश में करने से बेहतर है अपने मन को वश में करना. साधु को शत्रु से लड़ने की जरूरत नहीं होती इस प्रकार तो मैं साधु बन ही चुका हूं.

मेरी बाहर की लड़ाई खत्म हो चुकी है. अब मुझे अपने मन के विकारों पर तत्काल विजय प्राप्त करने की आवश्यकता है जिनके कारण बाहरी शत्रु जन्म लेते हैं. आत्मविजेता ही विश्वविजेता होता है क्योंकि वह मन के भीतर के द्वंद्व को जीत लेता है.

देवदूत ने नमि को प्रणाम किया और बोले- हे राजर्षि आप उत्तम पथ पर हैं. इसमें ही आपका और आपकी प्रजा का भी कल्याण है. देवदूत अपने लोक को चले गए.

संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्

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