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वे बिलाव पर हंस भी रहे थे. जाल के पास ही खेल रहे एक चूहे को उल्लू और नेवले भी दिखे. चूहे के लिए वे दोनों भी ताकतवर शत्रु थे. उसे अपने प्राण बचाने की चिंता हुई.

चूहे ने सोचा कि जैसे संकट में पड़े विद्वान नीतिशास्त्रों के प्रयोग से छूटते हैं वैसे मुझे भी प्राण रक्षा का उपाय करना चाहिए. नीति के ज्ञाता चूहे ने बिलाव के साथ मैत्री प्रस्ताव का निर्णय किया.

उसने विचार किया कि बिलाव बेशक उसका भी शत्रु है किंतु विपत्ति में पड़े एक बलशाली शत्रु की मित्रता अन्य शत्रुओं के लिए भय पैदा करने वाली होगी. वह जाल में घुस गया और बिलाव को सांत्वना देने लगा.

भैया बिलाव मैं तुम्हारी दशा देखकर दुखी हूं. तुम्हारी प्राण रक्षा करना चाहता हूं. यदि तुम मेरे साथ हिंसा नहीं करने का वचन दो तो मैं जाल को काटकर तुम्हें मुक्त कर सकता हूं. इस प्रकार हमारी मैत्री स्थाई हो जाएगी.

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