श्रीकृष्ण लीलाः कुम्हार ने श्रीकृष्ण भक्तों को कराया 84 करोड़ योनियों के बंधन से मुक्त

श्रीकृष्ण लीलाः कुम्हार ने श्रीकृष्ण भक्तों को कराया 84 करोड़ योनियों के बंधन से मुक्त

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जब भगवान श्रीकृष्ण का ब्रजभूमि में अवतार होना था तो देव, गंधर्वों आदि ने भी ब्रह्माजी से जिद करके ब्रज में विभिन्न रूपों में जन्म लिया था. बाल भगवान श्रीकृष्ण भक्तों के साथ चुहल कर लीलाएं करते रहे.

गोपियों संग लीला करते भगवान श्रीकृष्ण उनकी मटकी फोड़ते, उनके घरों से माखन चुराते. गोपियां श्रीकृष्ण का उलाहना लेकर रोज यशोदा मैय्या के पास जातीं. गोपियां जानती थीं कि वे जितनी शिकायत करेंगी कान्हा उतना ही उन्हें छेंडेंगे.

एक बार यशोदा माता श्रीकृष्ण के लिए आ रहे उलाहनो से तंग आ गईं और छड़ी लेकर श्रीकृष्ण की और दौड़ीं. माता को क्रोध में देखकर बालकृष्ण बचने के लिए भागने लगे.

भागते-भागते श्रीकृष्ण एक कुम्हार के पास पहुंचे. कुम्हार मिट्टी के घडे बनाने में व्यस्त था. कुम्हार ने श्रीकृष्ण को देखा तो बड़ा प्रसन्न हुआ क्योंकि कुम्हार इस बात से परिचित था कि श्रीकृष्ण भगवान हैं.

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