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शनि जयंती विशेषः शनिदेव की पूजा से जुड़ी सारी शंका का निदान

शनि जयंती विशेषः शनिदेव की पूजा से जुड़ी सारी शंका का निदान

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पौराणिक कथाएँ, व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र, गीता ज्ञान-अमृत, श्रीराम शलाका प्रश्नावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ने के हमारा लोकप्रिय ऐप्प “प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प” डाउनलोड करें.
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इस लाइन के नीचे हमारे फेसबुक पेज का लिंक है उसे क्लिक करके लाइक कर लें.ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है. इस दिन शनिदेव का जन्म माता जाता है. ‘स्कन्द पुराण’ की एक कथा के अनुसार सूर्य देव का विवाह संज्ञा से हुआ था. सूर्यदेव को संज्ञा से तीन संतानों की प्राप्ति हुई थी- यम, यमुना और मनु.

संज्ञा शनि देव के तेज को अधिक समय तक नहीं सहन कर पायी इसलिए उसने अपनी छाया को सूर्य देव के पास छोड़ दिया और वहां से चली गईं. कुछ समय बाद सूर्य देव से छाया को एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिन्हें शनिदेव के नाम से जाना गया.

शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ मास की अमावस्या को हुआ था. शनिदेव के जन्म और उनकी महिमा की विविध कथाएं कल दिनभर प्रभु शरणम् पर प्रकाशित की जाएंगी.

शनि देव ग्रह देवताओं के मध्य न्यायाधीश हैं. कर्मों का फैसला करने वासे. शनिदेव अन्य ग्रहों की तुलना मे धीमे चलते हैं इसलिए इन्हें शनैश्चर भी कहा जाता है. ज्योतिष में शनिदेव वायु तत्व और पश्चिम दिशा का स्वामी माना जाता है.

शनि जयंती के दिन पूरे विधि-विधान से शनि देव का पूजन किया जाता है. शनि देव की पूजा करते समय विशेष ध्यान देना अनिवार्य होता है. माना जाता है कि यदि शनि देव क्रोधित हो जाते हैं तो घर की सुख-शांति भंग हो जाती है.

शनि जयंती के दिन पूजा-पाठ करके काला कपड़ा या दाल तथा लोहे की वस्तु दान करने से शनि देव सभी कष्टों को दूर कर देते हैं. शनि देव को प्रसन्न करने के लिए तिल, उड़द, मूंगफली का तेल, काली मिर्च, आचार, लौंग, काले नमक आदि का प्रयोग करना चाहिए.

शनि जयंती पर कैसे करें शनिदेव का पूजन?

शास्त्रों के अनुसार शनि जयंती पर उनकी पूजा-आराधना और अनुष्ठान करने से शनिदेव विशिष्ट फल प्रदान करते हैं.

शनि जयंती के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर नवग्रहों को नमस्कार करते हुए शनिदेव की लोहे की मूर्ति स्थापित करें और उसे सरसों या तिल के तेल से स्नान कराएं तथा षोड्शोपचार पूजन करें.

शनि मंत्र का उच्चारण करें-ॐ शं शनिश्चराय नम: (षोडशोपचार पूजन की विधि प्रभु शरणम् एप्प के दैनिक पूजन सेक्शन में देखें.डाउनलोड कर लें एप्प. लिंक ऊपर है.)

इसके बाद पूजा सामग्री सहित शनिदेव से संबंधित वस्तुओं का दान करें. इस प्रकार पूजन के बाद दिन भर निराहार रहें व मंत्र का जप करें.

शनिदेव की कृपा एवं शांति प्राप्ति हेतु तिल, उड़द, कालीमिर्च, मूंगफली का तेल, आचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग करना चाहिए, शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हनुमानजी की भी पूजा करनी चाहिए.

किस राशि के लोगों को रखना है विशेष ध्यान. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

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आज के दिन सभी राशि के जातकों को मंदिर में जाकर शनि महाराज का तैलाभिषेक करना चाहिए, शिवजी की पूजा करनी चाहिए लेकिन मेष, सिंह, तुला, वृश्चिक और धनु राशि वालों के लिए विशेष रूप से पूजाकी आवश्यकता है.

मेष व सिंह राशि पर अभी शनि की ढैय्या चल रही है. धनु, तुला और वृश्चिक पर शनि की साढ़ेसाती है. तुला पर साढ़ेसाती का अंतिम ढैय्या है तो वृश्चिक राशि के लिए द्वितीय ढैय्या जबकि धनु राशि पर पहला ढैय्या है.

इन पांचों राशि वालों को इस दिन पूजा से शनि पीड़ा से पूरे साल राहत मिलेगी.

किन्हें विशेष रूप से करनी चाहिए शनि जयंती पर शनिदेव की पूजा.

-जिनकी कुंडली में शनि दोष हो.

-शनि नीच होकर बैठे हों. शनि शत्रुघर में हों, किसी पापग्रह के साथ बैठे हों.

-ढैय्या या साढेसाती के प्रभाव में हों.

-शनि का मारकेश हो.

ऐसे लोगों को शनि के कारण पीड़ा भोगना पड़ता है. उन्हें शनिदेव को प्रसन्न करने के विशेष उपाय करने चाहिए.

शनि दोष व्यक्ति को निर्धन, आलसी, दुःखी, नशीले पदार्थों का सेवन करने वाला, अल्पायु निराशावादी, जुआरी, कान का रोगी, कब्ज का रोगी, जोड़ों के दर्द से पीड़ित, वहमी, उदासीन, नास्तिक, बेईमान, तिरस्कृत, कपटी, अधार्मिक, व्यापार में हानि सहने वाला तथा मुकदमे व चुनावों में पराजित होने वाला बनाता है.

अगले पेज पर पढ़ें किसे पीड़ा देते हैं और किसे बख्श देते हैं. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.सबको पीड़ा नहीं देते शनिः

हर व्यक्ति के जीवन में शनि की साढ़े साती का सामन्यतः तीन बार आगमन होता है.

शनि अनिष्टकारक, अशुभ और दुःख प्रदाता ही हैं ऐसा नहीं कहा जा सकता. शनि संतुलन एवं न्याय के ग्रह हैं.

सूर्य पुत्र शनि अपने पिता सूर्य से अत्यधिक दूरी के कारण प्रकाशहीन हैं इसलिए इन्हें अंधकारमय, विद्याहीन, भावहीन, उत्साह हीन, नीच, निर्दयी, अभावग्रस्त माना जाता है.

पर शनि ग्रहों के बीच दंडाधिकारी हैं. मजिस्ट्रेट तो बिना किसी लाग-लपेट के ही फैसले देगा. विशेष परिस्थितियों में शनि अर्थ, धर्म, कर्म और न्याय का प्रतीक हैं. इसके अलावा शनि ही सुख-संपत्ति, वैभव और मोक्ष भी देते हैं.

इसलिए जब आप शनि के प्रभाव में हों तो आप बुरी आदतों का त्याग कर दें. सोभ, छल, धोखा, बेईमानी से एकदम दूरी बना लें अन्यथा शनि बहुत पीडित करते हैं. यथासंभव आध्यात्म का मार्ग लें. बेइमानी से बचें. जिस शनि से आप डर रहे हैं वह आपके लिए लाभ के राह खोल देंगे.

शनि की शांति के सरल उपाय अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.शनि पीड़ा की शांति के उपायः

सबसे पहले मैं आपको बताता हूं ऐसे उपायों के बारे में जिसे आपको स्वयं करना है तभी लाभ है. उपाय कठिन नहीं है, इसलिए सरलता से किया जा सकता है. इऩमें से जितने संभव हों उतने उपाय कर लें.

हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, दशरथ कृत शनिस्तोत्र का यथासंभव स्वयं पाठ करना चाहिए.

अपाहिजों, बीमारों की सेवा करनी चाहिए. गरीबों को काला कंबल दान करना चाहिए.

अपने से बड़ों के प्रति आदर का भाव रखना चाहिए. माता-पिता की सेवा करें.

मांस-मदिरा के सेवन से बचें और यथासंभव सत्य ही बोलें.

सरसों के तेल का छाया पात्र में दान. एक बड़े कटोरे में सरसों का तेल लें. उसमें पांच का सिक्का डालकर अपनी छाया देखें. फिर वह तेल किसी को दान कर दें.

शनिवार को काले उड़द पीसकर उसके आटे की गोलियां या किसी भी आटे की गोलियां बनाकर मछलियों को खिलाना चाहिए.

चीटिंयों के लिए शनिवार को चीनी मिश्रित आटा खाने के लिए एकांत में रख देना चाहिए.

शनिवार की शाम पीपल के पेड़ के नीचे तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाएं. पीपल की सात बार परिक्रमा भी करें.

शनि की ढैया से ग्रस्ति व्यक्ति को हनुमान चालीसा का सुबह-शाम यथासंभव पाठ करना चाहिए.

शनिवार के दिन एक रोटी में गुड़ घी लगाकर अपने सिर के ऊपर से सात बुरा घुमाकर कुत्ते के खिलाने से लाभ होता है. इसे भैरव प्रयोग कहा जाता है. रोटी घुमाते समय कोई टोके नहीं इसका ध्यान रखें. इसे कम से कम चार शनिवार और अधिकतम 16 शनिवार को करना चाहिए.

शनिवार के दिन किसी चौराहे पर जाकर पांच सिक्कों को मुठ्ठी में बंद करके अपने सिर पर से सात बार घुमाकर वहीं चौराहे पर रख देना चाहिए. यह प्रयोग एक या दो बार करने से भी लाभ होता है.

जब पीडा असहनीय हो जाए तो क्या करें, अगले पेज पर देखें. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.वेदपाठी ब्राह्मण से कराए जाने वाले उपायः

शनि ग्रह की शांति के लिए वैदिक मंत्र, बीजमंत्र और तंत्र मंत्र के एक विशेष संख्या में जप के बाद शमी की लकड़ी से हवन कराने से शनि की कष्टमयी पीडा से तत्काल राहत मिलती है. जो लोग शनि के कारण बहुत पीडित हैं उन्हें इसका सहारा लेना चाहिए.

वैसे तो शनि के 23,000 मंत्रों के जप का ही विधान है किंतु कलियुग में मंत्रों का प्रभाव तब होता है जब उसे चौगुना पाठ किया जाए. कलौ चतुर्गुणितं प्रोक्तं. इसलिए शनि के मंत्रों का 92,000 पाठ कराना चाहिए.

शनि वैदिक मंत्रः
ऊं शनों देवीरभिष्ठयsआपो भवन्तु पीतये।
शंयोरभित्रवन्तु नः।

शनि बीज मंत्रः
ऊं ऐं ह्रीं, श्रीं शनैश्चराय नमः

शनि तंत्र-मंत्रः
ऊं शं शनैश्चराय नमः

शनि के रत्न अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

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किसी विद्वान ज्योतिषी के परामर्श से शनि के लिए नीलम धारण करें. नीलम के धारण करने में कई सावधानियां हैं इसलिए विद्वान का परामर्श लें. नीलम महंगा है. उसके स्थान पर उसका उपरत्न नीली भी धारण किया जा सकता है.

शनि की शांति के लिए लाजवर्त भी चांदी या पंचधातु में धारण किया जा सकता है. काले घोड़े की नाल या नौका की कील से बनी लोहे की अंगूठी को मध्यमा उंगली में शनिवार को धारण करना चाहिए.

शनि अमावस्या से अगर ये उपाय करते हैं तो विशेष रूप से शुभ है. यदि शनि अमावस्या से नहीं कर पाते तो किसी अन्य शुभ मुहूर्त में विद्वान के परामर्श से कर सकते हैं.

शनि से भय वे खाएं जो कुटिल हैं, दूसरों से जलते हैं, दूसरों को हानि पहुंचाने या बेईमानी की भावना रखते हैं, कपटी हैं. शनि आपके अंदर ऐसी भावना की प्रेरणा देकर आपकी परीक्षा भी लेते हैं.

यदि आप उनकी परीक्षा में फेल हो गए तो फिर परिणाम भोगने ही होंगे. यदि न्याय के मार्ग पर हैं तो शनि आपका कल्याण करते हैं.

प्रस्तुतिः
डॉ. नीरज त्रिवेदी,
सहायक प्रोफेसर ज्योतिषशास्त्र (राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान)
ज्योतिषाचार्य एवं ज्योतिषशास्त्र में पीएचडी (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय)

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