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देवों ने दिया वरदान, अतुलित बलधाम हुए हनुमान, हनुमानजी को मिले कौन से वरदान व शापः हनुमान कथा-3

देवों ने दिया वरदान, अतुलित बलधाम हुए हनुमान, हनुमानजी को मिले कौन से वरदान व शापः हनुमान कथा-3

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आपने हनुमान कथा के दो खंडों में अब तक शिवजी के अंश के श्रीराम कार्य के लिए स्वर्ग की अभिशप्त अप्सरा के शरीर से हनुमान रूप में जन्म लेने और हनुमानजी के राहु से युद्ध और इंद्र के प्रहार से मूर्च्छा की कथा पढ़ी.

पवनदेव द्वारा वायु संचार रोकने से देवताओं की विवशता और ब्रह्मा द्वारा हनुमान अवतार का प्रयोजन बताने की कथा पढ़ी. अब पढ़ें हनुमानजी कैसे बने अतुलित बलशाली.

ब्रह्मदेव द्वारा हनुमान अवतार का प्रयोजन बताने के बाद सभी देवों ने हनुमानजी की शक्तियां बढ़ाने के लिए उन्हें वरदान दिया.

इंद्र ने कहा- मेरे वज्र से इनका हनु टूटा है. इसलिए इन्हें हनुमान कहा जाएगा. हनुमानजी पर मेरे वज्र का कभी असर नहीं होगा. कुबेर ने हनुमानजी को गदा और यक्षों की मित्रता दी.

सूर्यदेव ने अपने तेज का सौंवा हिस्सा हनुमानजी को दिया. सूर्यदेव ने रूप-आकार बदलने का आशीर्वाद दिया और गुरू बनकर हनुमानजी को संपूर्ण शास्त्रों का ज्ञान देना भी स्वीकार किया.

वरुणदेव ने आशीर्वाद दिया कि हनुमानजी वरूणपाश और जल के भय से मुक्त रहेंगे. विश्वकर्मा ने वरदान दिया कि हनुमानजी पर उन दिव्यास्त्रों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जिनका निर्माण मैंने किया है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.ब्रह्माजी ने हनुमानजी को ब्रह्मज्ञान देकर चिरायु होने का आशीर्वाद दिया. ब्रह्मा ने हनुमानजी को ब्रह्मास्त्र और ब्रह्मपाश के प्रभाव से मुक्त कर दिया.

ब्रह्माजी ने पवनदेव से कहा- तुम्हारा पुत्र अतुलित बलशाली, इच्छानुसार रूप धारण करने वाला और मन के वेग से चलने वाला हो चुका है. वह श्रीराम का परम भक्त होगा.

सभी देवों की शक्तियों से संपन्न पवनपुत्र बालकाल में ही परम तेजस्वी और परम बलशाली हो गए. एक तो वानर, दूसरे बालक और तीसरा अतुलित बल. उनमें जितना बल आया उतना ही नटखटपन भी आ गया.

हनुमानजी ऋषियों के आसन पेड़ पर टांग देते, कमंडल का जल गिरा देते, वस्त्र फाड़ डालते. कभी उनकी गोद में बैठकर खेलते और एकाएक दाढ़ी नोचकर भाग खड़े होते. उन्हें कोई रोक नहीं सकता था.

ऋषियों को लगा कि बालरूप में हनुमान अतुलित बल संभाल नहीं पा रहे.

इसलिए ऋषियों ने शाप दिया- हनुमान अपना बल भूल जाएंगे. अपने बल के ज्ञान से तब तक अंजान रहेंगे जब तक उसका स्मरण न कराया जाए.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.सीताजी को खोजने निकले हनुमानजी विशाल समुद्र को देखकर घबराए. तब जामवंत ने उन्हें उनके बल का स्मरण कराया. पवनपुत्र ने समुद्र लांघकर श्रीराम का कार्य पूरा किया.

उन्होंने लंका दहन किया लेकिन अग्नि के वरदान से उन पर कोई असर नहीं हुआ. रावण के महल में कैद ग्रहों को मुक्त कराया. ग्रहों ने उन्हें वरदान दिया कि हनुमानजी के भक्तों पर ग्रहों की बुरी दशा का प्रभाव नहीं पड़ेगा.

हनुमानजी में सभी देवों की शक्तियां निहित हैं इसीलिए उन्हें सर्वसंकट हारी कहा जाता है. उनकी उपासना से सारे रोगों और सभी कष्टों का निवारण होता है और ग्रहों के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है.

संकलन व संपादन: राजन प्रकाश

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