देवी मां ने शाप के जरिये दिये वरदान, पूरी की भक्त की इच्छाएं
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हमारा फेसबुक पेज लाइक कर लें इससे आपको प्रभु शरणम् के पोस्ट की सूचना मिलती रहेहगी. इस लाइन के नीचे हमारे फेसबुक पेज का लिंक है उसे क्लिक करके लाइक कर लें.मां की महिमा अनंत है, वे किस रूप में कैसे अपने भक्तों की सहायता करती हैं बूझना कठिन है. कई बार उनके शाप भी वन जाते हैं वरदान
रामनारायण देवी मां का भक्त था. उसके मन में दो इच्छाएं ऐसी थी जिनको पूरी करने के लिये मां से हरदम प्रार्थना करता था.
एक इच्छा थी नगर शहर घूमने की और दूसरी, जगह जगह का बढ़िया भोजन करने की. मां ही उसकी इच्छा पूरी करवा सकती थीं. क्योंकि उसके जैसे गरीब किसान के लिए तो यह सब सपना ही था.
एक बार देवी मां की प्रेरणा से उसने हिम्मत की कि नजदीकी शहर तो देख ही लिया जाये. अपने एक दोस्त को साथ ले वह पैदल चल पड़ा. दिन भर चले, शाम एक जंगल के बीच हो गयी. रात होते होते कहीं एक मंदिर तक पहुंच पाये.
राम नारायण ने कहा जंगल में रुकने के लिये यह मंदिर देवी मां की कृपा सेही मिला है. यहां इस मन्दिर से बेहतर और क्या हो सकता है! दोस्त से कहा, आज की रात इसी मंदिर में कटे तो कैसा रहे, मन्दिर के देवता भी हमारी रक्षा करेंगे.
पर दोस्त ने कहा, ‘‘नहीं भाई, यह तो चण्डमुखी देवी का मंदिर है. बड़ी ही गुस्सैल देवी है. वह दिन भर आकाश पाताल नाप कर रात को मंदिर आती हैं, उस व़क्त अगर किसे को मंदिर में देख लें तो उसकी खैर नहीं. शाप दे देती है. ’’
‘‘रामनारायण भी देवी मां का भक्त ही था, बोला देवी मुझ पर नाराज़ नहीं होंगी और हों तो भी मैं एक क़दम आगे नहीं जाउंगा. रामनारायण मंदिर के भीतर चला गया, पलट कर देखा तो केशव घने जंगल की तरफ बढ़ चुका था.थका मांदा रामनारायण अकेला रह गया, मंदिर में लेटते ही उसे नींद आ गयी. आधी रात के व़क्त उसे लगा कि किसी ने जैसे चाबुक फटकारा.
वह चौंककर उठ बैठा. उसने देखा, सामने कोई देवी लाल लाल आखें किये हाथ में चाबुक लेकर खड़ी हैं.
देवी ने कड़क कर पूछा, कौन हो? बिना मुझसे पूछे मेरे मंदिर में लेटने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?’’ रामनारायण ने देवी के चरण पकड़ लिये. बोला- ‘‘महामाई, ग़रीब किसान हूँ? शहर जाते हुए जंगल में भटक गया, रात हो गयी थी सो डर से आगे जाने का साहस नहीं कर पाया यहीं रह गया. सवेरा होते चला जाऊँगा.’’
‘‘देवी ने चाबुक परे कर लिया और बोलीं, ठीक है, पर तुम्हें माफ करने की बात लोगों को पता चल गयी तो लोग तो इस मंदिर को सराय ही बना डालेंगे. तुम्हें शाप दिये बिना काम न चलेगा!तुम अपने को किसान कहते हो, इसलिए आज से अगले साल तक तुम्हारे हाथ का पानी जिस पौधे को छुएगा, वह पौधा मर जाएगा. इतना कह कर देवी अंतरधान हो गयीं. सवेरा होने को था, रामनारायण भी शहर चल पड़ा.
शहर जाते हुए रामनारायण चिंता में मरा जा रहा था कि ऐसा ही रहा तो वह साल भर खेती किये बिना जीयेगा कैसे? शहर में किसान मेला लगा हुआ था. इसे देखने राजा भी आया हुआ था. किसानों ने राजा को बताया एक विचित्र प्रकार की घास फ़सलों को बरबाद कर रही है.
खास बात यह कि जड़ से निकाल देने पर भी वह बार-बार उग आती है. किसान भीषण कष्ट में थे. राजा को यह बात पता थी पर वह किसानों को कोई दिलासा न दे पाने से दुखी था.
रामनारायण ने राजा को प्रणाम कर कहा, ‘‘महाराज! मुझे मौक़ा दें, मैं साल भर में इस अनोखी घास के पौधों को जड़ समेत सफाया कर सकता हूँ. राजा ने कहा पहले सबूत दो कि ऐसा कर सकते हो. देवी मां के शाप से रामनारायण ने कर दिखाया.
अब तो राजा ने उसके लिए हर तरह का प्रबंध किया. रामनारायण ने अपने साथ सहायकों को लेकर गांव गांव घूमा. उसका हर जगह खूब खातिर होता फ़सल के बोने के पहले वह अपने हाथ से सभी खेतों को पानी दिया. खेत में पहले से जो भी पौधे थे साफ हो गये.
रामनारायण को किसान मेला के जरिये जो घूमने खाने को मिला तो ऐसा चस्का लगा कि अगले साल उन्हीं दिनों में फिर शहर की ओर निकल पड़ा. जाते हुए चण्डमुखी मंदिर के पास पहुँचा तो अंधेरा हो गया.
उस मंदिर में ही आराम करने को रुका, देवी आधी रात को पहले ही की तरह चाबुक लिये आईं.इस बार रामनारायण ने देवी को प्रणाम करके कहा, ‘‘आप के शाप से मेरी दो बड़ी इच्छाएँ पूरी हो गईं और साथ ही किसानों का भला भी हो गया.’’
चण्डमुखी खुश होने की बजाये नराज हो गईं, ‘‘मूर्ख! तुम मुझे उकसाने आये हो? इस साल तुम जहां जहां घूमने टहलने को पैदल चलोगे तुम्हारे क़द के बराबर गड्ढा बन जाएगा.’’
रामनारायण समझ गया कि वहां से हिल नहीं सकता है. सवेरा होने तक वह उसी मंदिर में बैठा रहा. सवेरा होते ही एक राहगीर के जरिये राजा के पास ख़बर भेज पालकी मँगवाकर उसमें बैठ राजा के पास गया. राजा को अपने शाप के बारे में और उससे लाभ लेने की योजना बताई.
रामनारायण की योजना थी कि राज्य भर में जहां जहां नहरें खुदवानी थीं, उनको नाप कर निशान बना दिया जाये.फिर वह उनसे होकर पैदल चलता जाएगा तो उसके पीछे अपने आप गहरी नहरें बन जाएँगी.
योजना सफल रही, रामनारायण जब नहर नहीं बना रहा होता तो पालकी में चलता और बढिया जगहों पर टिकता सोने चांदी के बरतनों में खूब तर माल उड़ाता.
बिना मेहनत मजदूरी के सस्ते में नहरें बन गईं. नयी उपजाऊ जमीन मिली तो राज्य मालामाल हुआ.
तीसरे साल आया तो रामनारायण फिर शहर चला और चण्डमुखी मंदिर मन्दिर में जा कर ठहर गया, पहले की ही तरह आधी रात को देवी आईं तो रामनारायण ने हाथ जोड़कर कहा, ‘‘आप के शाप अद्भुत हैं. मुझे और जनता दोनों को बड़ा लाभ हुआ.
रामनारायण की बात पर देवी और गुस्सा हो गयी और फिर शाप देते हुए बोलीं, मूर्ख! मेरे शाप देने के बावजूद तू दूसरी बार मंदिर में आया और अब तीसरी बार भी अब मैं देखूँगी कि इस बार मेरा शाप तुम्हे कैसे फलता है.चेताते हुये देवी बोली, अब से तुम जिस पर नज़र डालोगे , वह भस्म हो जाएगी. ज़िंदगी भर आँखों पर पट्टी बॉंधे अंधे की तरह अपने दिन काटोगे. देवी के अंतर्धान होने से पहले रामनारायण ने झट अपने आंखों अपर अपना गमछा बांध लिया और लेट कर सोचने लगा.
सवेरा होते की आहट मिलते ही वह टटोलते हुए मंदिर के बाहर आया और पट्टी खोलकर मंदिर पर अपनी भरपूर नजर डाली. दूसरे ही क्षण मंदिर जलकर भस्म हो गया. मंदिर खत्म तो देवी का दिया रामनारायण का शाप गायब.
रामनारायण सब समझ गया कि यह सब देवी मां का ही रचा गया चमत्कार है जिसने मुझे न सिर्फ अपनी इच्छायें पूरी करवायी बल्कि शाप से मुखि भी दिला दी.
इनाम पाकर अमीर हुये रामनारायण ने मंदिर वाली जगह पर जंगल में शाम हो जाने वाले यात्रियों को रुकने के लिये एक सराय और देवी मां का मंदिर बनवा दिया.
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