Advertisement728 × 90

जानिए भोलेनाथ ने क्यों धर लिया भिक्षु का रूप

जानिए भोलेनाथ ने क्यों धर लिया भिक्षु का रूप

lord-shiva-hd-wallpaper-1024x546
प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर 9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से save कर लें। फिर SEND लिखकर हमें उस नंबर पर whatsapp कर दें।
जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना whatsapp से मिलने लगेगी।

विदर्भ में एक राजा हुए सत्यरथ. धर्मनिष्ठ और प्रजापालक राजा. प्रजा अपने राजा से प्रसन्न थी और राजा अपने जीवन से. एक बार शाल्व नरेश ने विदर्भ पर आक्रमण कर दिया.

शत्रुओं के साथ युद्ध करती हुई सत्यरथ की सेना नष्ट हो गई. सत्यरथ भी रणभूमि में मारे गए. उनकी महारानी किसी तरह शत्रुओं से छिपकर भाग निकलीं. उस समय वह गर्भवती थीं.

रानी भगवान शिव की भक्त थीं. वह महादेव का स्मरण करती हुई एक अंजान रास्ते पर चलती जा रही थीं. रातभर चलकर वह एख सरोवर के तट पर पहुंचीं. रानी ने सरोवर के तट पर एक सुंदर बालक को जन्म दिया.

बालक को जन्म देने के बाद रानी को जोर की प्यास लगी. वह सरोवर में पानी पीने के लिए उतरीं तो दैवयोग से एक मगरमच्छ ने उनको खा लिया. बालक जन्म लेते ही अनाथ हो गया था.

भोलेनाथ स्वयं प्रकट होकर उसकी रक्षा करने लगे. उसी समय एक विधवा ब्राह्मणी अपने एक वर्ष के बालक को गोद में लिए वहां आ पहुंची. नवजात शिशु को अकेला देख उसके मन में ममता उमड़ी.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.उसने उस बालक को भी पुत्र के सामने पालने का निर्णय किया. ब्राह्मणी के आ जाने से भगवान शिव अदृश्य हो गए थे. उन्होंने एक भिक्षु का रूप धरा और वहां प्रकट हुए.

भिक्षुक वेषधारी भगवान ने कहा- यह शिवभक्त महाराजा सत्यरथ का पुत्र है. इसके पिता को शत्रुओं ने मार डाला और माता प्रसव के बाद ग्राह का ग्रास बन गई. तुम इसका पालन अपने पुत्र जैसा करो.

पूर्वजन्म में इसने प्रदोषकाल में बिना शिवजी की पूजा किए ही भोजन कर लिया था. इस कारण इस जन्म में इसे माता-पिता से विहीन होना पड़ा. यह बालक बड़ा शिवभक्त होगा.

ब्राह्मणी को उपदेश देने के बाद भोलेनाथ ने उसे वास्तविक रूप में दर्शन देकर कृतार्थ किया. उस स्त्री ने उनकी स्तुति की और पालन का वचन दिया. दोनों बच्चों का वह पालन करने लगी.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.शाण्डिल्य मुनि के उपदेश से वे दोनों बालक व्रत रखकर प्रदोषकाल में शिव उपासन किया करते थे. एक दिन ब्राह्मणी का पुत्र राजकुमार को लेकर नदी में स्नान के लिए गया. वहां उसे रत्नों से भरा एक कलश मिला और उसकी दरिद्रता दूर हो गई.

एक साल के बाद एक दिन राजकुमार, ब्राह्मणी के पुत्र के साथ वन में गया. वहां एक गंधर्व राजकुमारी अपनी सखियों के साथ भ्रमण कर रही थी. कन्या राजकुमार पर मोहित हो गई.

उससे विवाह करके राजकुमार उसके पिता के राज्य का स्वामी हो गया. राजकुमार ने पालन करने वाली माता को राजमाता के पद पर प्रतिष्ठित किया. राजकुमार धर्मगुप्त के नाम से प्रसिद्ध राजा हुआ.

महादेव की कृपा से उसने सभी शत्रुओं को पराजित किया और महान शिवभक्त के रूप में जाना गया. (शिव पुराण की कथा)

अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

ये भी पढ़ें-
आपके हाथ की विवाह रेखाएं बता सकती हैं कि आपका दांपत्य जीवन सुखद सफल होगा या विफल
करियर की बाधाओं का ज्योतिष से निकाल सकते हैं हलः करियर में सफलता के लिए सरल और बिना खर्च वाले उपाय
कहीं आप भी तो नहीं करते वही काम जिससे राजा भोज जैसे विद्वान मूर्खराज कह दिए गए- प्रेरक कथा
प्रभु श्रीराम का सम्मान, धर्मसंकट में सेवक श्री हनुमानः हनुमानजी की भक्ति कथा

हम ऐसी कथाएँ देते रहते हैं. Facebook Page Like करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा: Please Like Prabhu Sharnam Facebook Page

error: Content is protected !!