कार्तिक व माघ मास के व्रतों का उद्यापन कैसे करना चाहिए, नारद ने पृथु को बताई विधिः कार्तिक माहात्म्य, आठवां अध्याय
अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
नारदजी बोले- हे राजन अब मैं कार्तिक व्रतों का संक्षेप में उद्यापन सुनाता हूं. व्रत पूरा होने के फल और भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को उद्यापन करें.
तुलसी के ऊपर चार द्वारों का मंडप बनाकर, तोरन, बंदनवार बांधकर, फूलों को चमर से सजाएं. चारों द्वारों पर भगवान विष्णु के चारों द्वारपालों पुण्यशील, सुशील, जय और विजय की मिट्टी से बनी प्रतिमा स्थापित करके पूजन करें.
तुलसी के पास चार रंगों का सुशोभित सर्वतोभद्र चक्र बनाएं. इसके ऊपर पंचरत्न और एक नारियल रखकर कलश स्थापित करें. फिर वहां शंख, चक्र, गदाधारी पीतांबर से युक्त लक्ष्मी सहित विष्णु भगवान की स्थापना करके पूजन करें.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.व्रती पुरूष मंडल में इंद्र आदिकी पूजा करें. द्वादशी को भगवान उठे, त्रयोदशी को देवताओं ने उनके दर्शन किए और चतुर्दशी को पूजन करें. उस दिन शांत और सावधानी से उपवास करें. गुरू की आज्ञा लेकर श्रीकृष्ण की प्रतिमा का षोडशोपचार पूजन करें.
रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन करते रहें. प्रातःकाल उठकर नित्य नैमित्तिककर्म करें. उसके बाद हवन करें. ब्राह्मणों को भोजन कराएं, यथासंभव दक्षिणा दें. व्रती इस तरह व्रत पूर्ण करे तो उसे बैकुंठ की प्राप्ति होती है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.बैकुंठ चतुर्दशी के माहात्म्य को देवता और शेषजी सौ वर्षों में भी नहीं कह सकते. जो भगवान चक्रपाणि के जागरण में भक्तिपूर्वक आंगन में गायन और नृत्य करते हैं उनको सहस्त्र गायों के दान का फल मिलता है. इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्यरूप लिया था.
अतः इस दिन ब्राह्मणों को खीर आदि अन्न का भोजन कराएं तथा खीर और तिल का हवन करें. इस प्रकार अक्षय पुण्य प्राप्त होता है. फिर विधिपूर्वक कपिला गाय का पूजन करें और उपदेश करने वाले गुरू को सप्तनीक वस्त्र आभूषण आदि से सुसज्जित कर समापन कराएं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.भगवान से प्रार्थना करें कि हे प्रभु आप प्रसन्न हों. आपकी प्रसन्नता से मेरे सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाएं और मेरे सभी मनोरथ सफल हों. मरणोपरांत मुझे विष्णुलोक की प्राप्ति हो. इसके बाद गुरू से अपने बंधु बांधवों के साथ भोजन का आग्रह करें.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.कार्तिक और माघ माह के व्रत की यही विधि कही गई है. ऐसे सम्यक रीति से कार्तिक का व्रत करने वाला संपूर्ण कामनाओं से युक्त होकर भगवान विष्णु के समीप जाता है.
अष्टम अध्याय पूर्ण. कथा जारी रहेगी.
संकलन व संपादन- राजन प्रकाश
आप सभी Maa Durga Laxmi Sharnam एप्पस जरूर डाउनलोड कर लें. माँ लक्ष्मी व माँ दुर्गा को समर्पित इस एप्प में दुर्लभ मन्त्र, चालीसा-स्तुति व कथाओं का संग्रह है. प्ले स्टोर से डाउनलोड कर लें या यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करें. विनती है कि कृपया एप्प की रेटिंग जरूर कर दें.
ये भी पढ़ें-
सुहागिनों के पर्व करवा चौथ की सरलतम शास्त्रीय विधि, व्रत कथा और पूजन-पारण का महूर्त
माता सीता ने क्या युद्ध में रावण के वंश के एक असुर का संहार भी किया था
जानिए विवाह का आठवां वचन क्या है?
प्रभु श्रीराम का सम्मान, धर्मसंकट में सेवक श्री हनुमानः हनुमानजी की भक्ति कथा
हम ऐसी कथाएँ देते रहते हैं. Facebook Page Like करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा: Please Like Prabhu Sharnam Facebook Page